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डल झील के पास बसा ऐतिहासिक किला, जानिए क्या है खास

श्रीनगर स्थित डल झील भारत की सबसे खूबसूरत झीलों में शामिल है, यहां रोजाना हजारों की तादाद में देश-विदेश से सैलानी हसीन वादियों का लुत्फ उठाने के लिए आते हैं। कश्मीर का राजधानी शहर श्रीनगर अपनी खास प्राकृतिक विशेषताओं के लिए जाना जाता है, जिसमें खूबसूरत घाटियां, सूरज की हल्की किरणों से चमक उठती झीलें और यहां मौजूद ऐशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन

डल लेक में शिकारों(हाउस बोट) की सैर किसी खूबसूरत ख्वाब से कम नहीं। झीलों में तैरते रंग-बिरंगे ये शिकारे वादियों को हसीन बनाने का काम करते हैं। लेकिन इसके अलावा भी श्रीनगर में घूमने और देखने लायक कई जगहें हैं, जिनका इतिहास काफी साल पुराना है।

इस खास लेख में जानिए डल झील के पास बसे खूबसूरत ऐतिहासिक किले और अन्य स्थानों के बारे में, जिनका प्लान आप इन गर्मियों के दौरान बना सकते हैं।  

 हरि पर्वत किला

हरि पर्वत किला

PC- Shibnaths2

यह खूबसूरत ऐतिहासिक किला डल झील की पश्चिम दिशा की ओर बना है। दरअसल यहां एक छोटी पहाड़ी है जिसका नाम हरि पर्वत है, उसी पहाड़ी पर बना है यह किला, जिसका नाम हरि पर्वत किला रख दिया गया था।

श्रीनगर की हसीन वादियों के बीच बसे इस किले का निर्माण मुहम्मद खान नाम के एक अफगान गर्वनर द्वारा किया गया था। जिसके बाद अकबर के शासन काल के दौरान इस किले की घेराबंदी की गई थी।कम बजट में इन 'रॉयल कैफे' की सेवाओं का उठाएं आनंद

प्रवेश के लिए अनुमति

प्रवेश के लिए अनुमति

PC- Pratik.sarode

यह ऐतिहासिक धरोहर अब पुरातात्विक विभाग के अंतर्गत है, किले के सुरक्षा और खूबसूरती बनाए रखने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। किले में दाखिल होने के लिए राज्य के पुरातात्विक विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है, तब जाकर आप पहाड़ी पर बसे इस खूबसूरत किले का दीदार कर सकते हैं। पर्यटकों द्वारा किसी भी तरह का नुकसान इस किले को न हो इसलिए यहां सुरक्षा का भी खास इंतजाम किया गया है।

किले की दीवारें, प्रवेश द्वार, परिसर में मौजूद वृक्ष देखने लायक हैं। हालांकि इसे बनाने के लिए खास वास्तुकला का प्रयोग नहीं किया गया है लेकिन इसकी खूबसूरती बेमीशाल है।

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जुड़ा है पौराणिक महत्व

जुड़ा है पौराणिक महत्व

इस किले से कई पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं, माना जाता है कि यहां कभी कोई बड़ी झील थी, जिसपर किसी जालोभाव नाम के राक्षक का राज था। यहां के लोग उस दैत्य से काफी परेशान रहते थे, माना जाता है कि लोगों ने फिर माता सती (अधिष्ठात्री देवी) से प्राथना की ।

जिसके बाद माता ने एक चिड़िया का रूप धारण कर उस राक्षक के सर एक छोटा सा पत्थर रख दिया। वो पत्थर बड़ा होता गया और परिणामस्वरूप वो दैत्य मारा गया।

अन्य दर्शनीय स्थल- मां शारिका देवी मंदिर

अन्य दर्शनीय स्थल- मां शारिका देवी मंदिर

PC- Akshey25

किले के अलावा पहाड़ी पर मां शारिका देवी का भव्य मंदिर भी है। माता के दर्शन करने के लिए यहां रोजाना भक्तों की कतार लगती है। मां शारिका देवी को महा त्रिपुरा सुंदरी और राज राजेश्वरी के नाम से जाना जाता है। इस भव्य मंदिर में मां शारिका स्थानीय निवारियों द्वारा इष्ट देवी के रूप में पूजी जाती हैं। यहां माता स्वयंभू श्रीचक्रा के रूप में विराजमान हैं।

माता के दर्शन के लिए 108 पत्थरों की बनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। आप मंदिर में प्रवेश सुबह के 6 बजे से लेकर रात के 10 बजे के बीच कर सकते हैं। मंगलवार के दिन मंदिर में भव्य आयोजन किया जाता है।पुणे से बनाएं इन खूबसूरत वन्यजीव अभयारण्यों का प्लान



 हजरत हमजा मखदूम की दरगाह

हजरत हमजा मखदूम की दरगाह

PC- Oniongas

मंदिर के अवाला यहां हजरत हमजा मखदूम की दरगाह भी मौजूद है। हमजा मखदूम कश्मीर के एक प्रसिद्ध सूफी संत, बुद्धीजीवी और एक आध्यात्मिक गुरू थे। जो आगे महबूब-उल-आलम ( ज्ञान का प्रेमी) और सुल्तान-उल-अरिफिन ( उन लोगों में प्रमुख जो भगवान को जानते हैं) के नाम भी से जाने गए। हमजा मखदूम का जन्म कश्मीर में हुआ था और उन्होंने अपनी अंतिम सांसे भी कश्मीर में ही लीं।

जिनके नाम का तीर्थस्थान आज श्रीनगर के हरि पर्वत पर हजरत हमजा मखदूम की दरगाह के रूप में जाना जाता है। जहां मत्था टेकने के लिए रोजाना कई लोग आते हैं।

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