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नाहर सिंह पैलेस में बनाएं 'शाही महल' के बैंकग्राउंड में Reels, कई फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग

ओटीटी पर इन दिनों धूम मचा रही वेबसीरीज 'हीरामंडी' में आपने 'शाही महल' और 'ख्वाबगाह' का जिक्र तो जरूर सुना होगा। फिल्म के डायलॉग और गानों पर कंटेंट क्रिएटर्स खूब प्यार लुटा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। वर्तमान में हीरामंडी पाकिस्तान के लाहौर में स्थित है।

अगर आप भी किसी ऐसी जगह को ढूंढ रहे हैं जो हीरामंडी जैसी वाइव्स देती है तो हरियाणा के नाहर सिंह पैलेस में आ सकते हैं। इस पैलेस में फिल्मों और विज्ञापनों की शूटिंग होती रहती है और पैलेस का वातावरण किसी राजसी महल जैसा ही लगता है। यह पैलेस राजा नाहर सिंह के नाम से जाना जाता है, जिनका भारत की आजादी की लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण किरदार रहा है।

पैलेस का इतिहास

फरीदाबाद के राजा नाहर सिंह पैलेस का निर्माण वर्ष 1739 में जाट राजा नाहर सिंह के पूर्वजों ने शुरू करवाया था। इस पैलेस के कुछ हिस्सों का निर्माण 1850 तक जारी रहा, जब नाहर सिंह ने सत्ता की गद्दी संभाल ली थी। इस वजह से ही पैलेस को नाहर सिंह पैलेस के नाम से जाना जाता है।

उनका राज्याभिषेक 18 साल की आयु में हुआ था। अंग्रेजों के खिलाफ हुई 1857 की क्रांति में नाहर सिंह ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और इसमें उनका साथ दिया अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर ने। नाहर सिंह की बहादुरी को देखते हुए बहादुर शाह ने उन्हें अपना आंतरिक प्रशासक भी नियुक्त किया था।

चांदनी चौक पर दी गयी फांसी

कहा जाता है कि नाहर सिंह की बहादुरी के आगे अंग्रेज अफसर भी कांपते थे। उन्हें पता था कि जब तक नाहर सिंह को खत्म नहीं किया जाता, तब तक बहादुर शाह जफर का तख्ता पलट नहीं हो सकता। इसलिए उन्होंने नाहर सिंह को बातचीत करने का झांसा देकर दिल्ली बुलाया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक अपनी सेना की छोटी सी टुकड़ी लेकर नाहर सिंह दिल्ली पहुंचे और जैसे ही लाल किला में उन्होंने प्रवेश किया उन्हें बंदी बना लिया गया। आरोप लगाया गया कि उनपर खजाने की चोरी का झुठा इल्जाम लगाकर मुकदमा चलाया गया और फांसी की सजा सुनायी गयी। 9 जनवरी 1858 को चांदनी चौक में जिस जगह पर आज फव्वारा है, उस जगह के पास ही उन्हें फांसी पर लटका दिया गया।

राज्य के पर्यटन विभाग को सौंपी गयी जिम्मेदारी

नाहर सिंह के शहीद होने के बाद लंबे समय तक उनके पैलेस की देखरेख की जिम्मेदारी उनके परिवार ने संभाली लेकिन जब अर्थाभाव में महल जीर्णशीर्ण होने लगा तो साल 2003 में इसे हरियाणा की राज्य सरकार ने पर्यटन विभाग के अधीन ले लिया। अब हरियाणा पर्यटन विभाग नाहर सिंह पैलेस की देखरेख करती है।

महल में उनके परपोते राजकुमार तेवतिया, सुनील तेवतिया और अनिल तेवतिया हैं, जो राजा नाहर सिंह पैलेस में आज भी शहीद राजा की यादों को संजो कर रखे हुए हैं। बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन का नाम नाहर सिंह के नाम पर ही रखा गया है।

फिल्मों-विज्ञापनों की होती है शूटिंग

नाहर सिंह पैलेस में अक्सर फिल्मों की शूटिंग होती रहती है। यहां अब तक 'साहब बीवी और गैंगस्टर - 2', 'फगली', टीवी शो 'शेरशाह सूरी' आदि की शूटिंग हो चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में चुनाव प्रचार के लिए कव्वालियों की शूटिंग हुई थी।

दिल्ली के पास होने की वजह से कई ज्वेलरी शोरुम भी अपने प्रोडक्ट की शूटिंग यहां करवा चुके हैं। अगर आप भी खासतौर पर हीरामंडी की थीम पर कोई वीडियो बनाना चाहते हैं तो नाहर सिंह पैलेस में जा सकते हैं। महल के हर कोने में आपको कई तरह की कलात्मक चीजें, झुला आदि मिल जाएंगे जो आपकी वीडियो में जान फुंक देंगे।

कैसे पहुंचे नाहर सिंह पैलेस

  • यह पैलेस साउथ दिल्ली से महज 15 किमी की दूरी पर मौजूद है।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन - संत नगर
  • सड़क मार्ग - NIT फरीदाबाद बस स्टैंड पहुंचकर कैब, टैक्सी या फिर ऑटो रिक्शा बुक कर सकते हैं।
  • एंट्री शुल्क - ₹20 प्रति व्यक्ति

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