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हावड़ा ब्रिज V/S हावड़ा मेट्रो स्टेशन : ऐतिहासिक तथ्य, क्या हैं इनकी खासियतें!

भारतीय इतिहास के कई बड़े अध्‍याय कलकत्ता (कोलकाता) में शुरू हुए और कलकत्ता में खत्म। हावड़ा स्टेशन से उतरते ही जब आप इस ऐतिहासिक नगरी की ओर चलते हैं, तो आपको एक पुल पार करना होता है। नाम है हावड़ा ब्रिज जो अपने अंदर इतिहास समेटे हुए है, वहीं इसके ठीक सामने अब बन रहा है हावड़ा मेट्रो स्टेशन जो आगे चलकर इतिहास रचेगा।

howrah bridge

जी हां, हम आज बात करने जा रहे हैं हावड़ा ब्रिज और हावड़ा मेट्रो स्टेशन की, जिनके नाम के आगे कई रिकॉर्ड दर्ज हैं और कई दर्ज होने वाले हैं।

सबसे पहले आपको बता दें हावड़ा ब्रिज (रवींद्र सेतु) और हावड़ा मेट्रो स्टेशन के बीच क्या समानता है। दोनों में से एक हुगली नदी पर बना ब्रिज है लेकिन दूसरा हुगली नदी के नीचे बना मेट्रो स्टेशन है। इन दोनों के बीच सबसे बड़ी समानता ही यहीं है कि यह कोलकाता को हावड़ा से जोड़ने का काम करती है।

ravindra setu

हावड़ा ब्रिज के इस पार बड़ाबाजार इलाका आता है जो कोलकाता कहलाता है और ब्रिज को पार करते ही वह क्षेत्र हावड़ा कहलाने लगता है। उसी तरह हावड़ा मेट्रो स्टेशन हावड़ा मैदान और महाकरण के बीच की कड़ी है जो कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने का काम करेगी।

देश का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन

howrah metro

हावड़ा मेट्रो स्टेशन जो हुगली नदी के ठीक नीचे बनाया गया है देश का पहला अंडरवॉटर मेट्रो स्टेशन होने के साथ-साथ देश का सबसे अधिक गहराई में मौजूद मेट्रो स्टेशन है। हावड़ा स्टेशन के ठीक पास में बना यह मेट्रो स्टेशन 33 मीटर (108 फीट) की गहराई में बनाया गया है। हावड़ा मेट्रो स्टेशन के बाद ही इस कॉरिडोर का आखिरी मेट्रो स्टेशन हावड़ा मैदान होगा। मेट्रो का यह कॉरिडोर पूरी तरह से बन जाने के बाद हावड़ा-कोलकाता के दो बड़े व्यापारिक क्षेत्रों, सॉल्टलेक सेक्टर 5 और बीबीडी बाग को एक साथ जोड़ेगा।

हावड़ा ब्रिज के बीच क्यों नहीं है कोई खंभा

आम तौर पर नदी में जब भी पुल/ब्रिज बनाया जाता है तो उसके बीच में सहारा देने के लिए खंभा बनाया जाता है। लेकिन हावड़ा ब्रिज के बीच में कोई खंभा नहीं है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है। जानकर हैरानी होगी कि हावड़ा ब्रिज अपने दोनों सिरों पर मौजूद सिर्फ दो खंभों की बदौलत ही तनकर खड़ा है।

no piller

हावड़ा ब्रिज इस्पात से बने 280 फीट ऊंचे दो खंभों पर ही खड़ा है। इन दोनों खंभों के बीच की दूरी करीब 1500 फीट है। दरअसल, हावड़ा ब्रिज का जिस समय निर्माण किया गया था तब हुगली नदी से होकर बड़े-बड़े जहाजों का आना-जाना लगा रहता था। जहाजों की आवाजाही में कोई परेशानी ना हो, इसलिए ब्रिज को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि इसके बीच में कोई खंभा ना हो।

कितनी है लागत

मिली जानकारी के अनुसार हावड़ा मेट्रो स्टेशन को तैयार करने में करीब 8000 करोड़ रुपयों की लागत आयी है। 4 भूमिगत स्तर में बना यह स्टेशन देश का सबसे गहरा और एशिया का दूसरा सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन होगा। हावड़ा मेट्रो स्टेशन से अधिक गहरा हांगकांग मेट्रो स्टेशन है, जिसकी गहराई 60 मीटर है। 14.67 किमी लंबा ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर में 8.90 किली का क्षेत्र भूमिगत होगा और 5.77 किमी लाईन जमीन के ऊपर होगा। इस पूरे स्ट्रेच में कुल 12 स्टेशन होंगे। वहीं दूसरी तरफ 1874 में हुगली नदी पर 22 लाख रुपये की लागत से पहले पीपे का एक पुल बनाया गया था।

howrah bridge at night

लेकिन बाद में जब ट्रैफिक बढ़ने लगा तो इस्पात से ब्रिज तैयार किया गया। हालांकि इस्पात से निर्मित हावड़ा ब्रिज या रवींद्र सेतु की लागत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। बताया जाता है कि इस ब्रिज को तैयार करने में 26,500 टन इस्पात का इस्तेमाल किया गया था जिसमें से 23,500 टन स्टील की सप्लाई टाटा स्टील ने की थी। तैयार होने के बाद यह ब्रिज दुनिया का तीसरा सबसे लंबा ब्रिज था।

आम लोगों के लिए कब खोला गया

bridge

रवींद्र सेतु का निर्माण 1936 में शुरू हुआ था और 1942 में इसका निर्माण कार्य पूरा हो गया था। इसके अगले साल ही यानी 3 फरवरी 1943 को हावड़ा ब्रिज को आम लोगों के लिए खोल दिया गया था। साल 1965 में कविगुरू रवींद्रनाथ टैगोर को सम्मान देते हुए इस ब्रिज का नाम रवींद्र सेतु रखा गया। जानकर हैरान हो जाएंगे लेकिन आज तक कभी भी इस ब्रिज का उद्घाटन ही नहीं किया गया। जी हां, जिस समय हावड़ा ब्रिज का निर्माण चल रहा था, तब द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था। जापानी सेना ने ब्रिज को तोड़ने के लिए बमबारी भी की थी, लेकिन इससे ब्रिज को खास नुकसान नहीं हुआ था। इसलिए ब्रिज को बिना किसी तामझाम के ही आम जनता के लिए खोल दिया गया।

howrah metro

हावड़ा मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जून 2023 में केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव खुद कोलकाता आकर इसका जायजा ले चुके हैं। संभावना जतायी जा रही है कि दिसंबर 2023 से हावड़ा मेट्रो स्टेशन को शुरू कर दिया जाएगा। बता दें, ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर (जिसका अहम हिस्सा हावड़ा मेट्रो स्टेशन है) के 3 सिरे होंगे, तेघरिया स्टेशन, सॉल्टलेक सेक्टर 5 और हावड़ा मैदान।

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