मुंबई में गणेश चतुर्थी को लेकर सारी तैयारियां अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। पंडालों में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की मूर्तियां भी पहुंचने लगी हैं। इस साल गणेश चतुर्थ का त्योहार 7 सितंबर से शुरू होने वाला है। गणेश चतुर्थी के समय क्यों न एक ऐसे मंदिर में भगवान गणपति के दर्शन करके आएं जो देशभर में इकलौता है। आपने भगवान गणेश के कई मंदिरों में दर्शन किये होंगे।
मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के बारे में भी जरूर सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर में दर्शन किया है, जहां भगवान गणेश की बिना सूंड वाली मूर्ति स्थापित है?

यह मंदिर राजस्थान के जयपुर में स्थित है। इस मंदिर को गढ़ गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर का इतिहास सैंकड़ों साल पुराना बताया जाता है। इतना पुराना कि यह मंदिर जयपुर शहर की नींव पड़ने से भी पहले का बताया जाता है। पर क्यों बिना सूंड वाले गणपति बाप्पा की मूर्ति को इस मंदिर में स्थापित किया गया है? जब जयपुर शहर ही नहीं बसा था तब किसने यहां इस मंदिर की स्थापना करवायी?
कहां है यह मंदिर?
गढ़ गणेश का मंदिर जयपुर के उत्तरी दिशा में अरावली पर्वत पर स्थित है। दूर से देखने पर यह मंदिर जयपुर के मुकुट की तरह दिखाई देता है। राजस्थान के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है गढ़ गणेश का मंदिर। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 500 मीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है जिसके लिए सीढ़ियों की संख्या 300 से ज्यादा ही बतायी जाती है।
मंदिर इतनी ऊंचाई पर बसा हुआ है कि वहां से जयपुर शहर की भव्यता देखते ही बनती है। इस मंदिर से आपको पूरा जयपुर शहर, नाहरगढ़, जलमहल सब कुछ साफ-साफ दिखाई देता है। बारिश के समय जब पूरा इलाका हरियाली से भर जाता है, तब यहां की सुन्दरता देखते ही बनती है।

किसने की थी स्थापना?
अरावली पर्वत पर गढ़ गणेश की स्थापना सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी, जो जयपुर के संस्थापक भी थे। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना तांत्रिक विधि से की गयी थी। मंदिर की स्थापना जयपुर शहर की नींव पड़ने से भी पहले की गयी थी।
बताया जाता है कि यह मंदिर जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसकी तलहटी में ही सवाई जयसिंह द्वितीय ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया था, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना हुई और उसके बाद ही जयपुर शहर की नींव पड़ी। इस मंदिर में भगवान गणेश का मुंह जयपुर शहर की ओर किया हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसा इसलिए किया गया है ताकि प्रथम पूज्य गणपति की नजर पूरे शहर पर बनी रहे।
क्यों स्थापित है बिना सूंड वाले गणेश की मूर्ति?
काफी लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि जब हर जगह भगवान गणेश की मूर्ति हाथी के सूंड वाली होती है, तो फिर जयपुर के गढ़ गणेश मंदिर में भगवान गणेश बिना सूंड के क्यों स्थापित हैं? दरअसल, ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां भगवान गणेश की मूर्ति उनके बाल स्वरूप में स्थापित किया गया है। इसलिए यहां बिना सूंड वाले भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की गयी है।

राजपरिवार सबसे पहले करता था गढ़ गणेश के दर्शन
गढ़ गणेश मंदिर का निर्माण इस प्रकार से किया गया था कि सिटी पैलेस के उस हिस्से, जहां राजपरिवार रहता था, से गढ़ गणेश मंदिर स्पष्ट दिखाई दे। सिटी पैलेस के ऊपरी हिस्से, जिसे चंद्र महल कहा जाता है, वहां महाराज- महारानी रहा करते थे। कहा जाता है कि सुबह उठकर सबसे पहले दोनों गढ़ गणेश मंदिर के दर्शन करने के बाद ही अपना दिन शुरू किया करते थे। मंदिर में दर्शन करने के लिए आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते रहते हैं।
विशेष नोट :-
- मंदिर में भगवान की मूर्ति का फोटो खींचना वर्जित है।
- मंदिर में दो बड़े-बड़े मूषक हैं, अगर आप दर्शन करने जाएं तो उनके कानों में अपनी मनोकामना जरूर कहें। कहा जाता है कि इससे आपकी बात गणपति तक जल्दी पहुंच जाएगी।
- गढ़ गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन मेले का आयोजन किया जाता है।
कैसे पहुंचे गढ़ गणेश मंदिर?
अगर आप निजी वाहन से जाते हैं तो गढ़ गणेश मंदिर में प्रसिद्ध गैटोर की छतरियां तक, वाहन जा सकेगा। इसके बाद चढ़ाई शुरू करनी होगी।
सड़क मार्ग - यह मंदिर जयपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किमी की दूरी पर शहर के बाहरी इलाके गैटोर रोड पर मौजूद है। स्टेशन से बस या टैक्सी के द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
रेल और हवाई मार्ग - ट्रेन से जाने के लिए जयपुर रेलवे स्टेशन ही सबसे नजदीकी स्टेशन है। वहां से बस या टैक्सी द्वारा जा सकेंगे। हवाई मार्ग से जाने पर भी जयपुर एयरपोर्ट ही सबसे नजदीकी एयरपोर्ट होगा। एयरपोर्ट के बाहर टैक्सी या किराए पर गाड़ियां मिल जाएंगी।



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