कैलाश और मानसरोवर शिवभक्तों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ यात्रा होती है। मान्यताओं के अनुसार कैलाश महादेव का निवास स्थान है। अब तक कैलाश-मानसरोवर की यात्रा के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को चीन या फिर नेपाल के रास्ते आगे बढ़ना पड़ता था। लेकिन कैलाश-मानसरोवर दर्शन के लिए उत्तराखंड का रास्ता खुलने के साथ ही इस यात्रा में अब करीब 6 दिनों का समय कम लगता है।

माना जा रहा है कि यह रूट चीन-नेपाल के मुकाबले शॉर्ट कट भी होगा और भारतीय तीर्थ यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक भी।
कौन सा था पुराना रूट
अब तक कैलाश-मानसरोवर की तीर्थ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु चीन या फिर नेपाल के रास्ते आगे बढ़ते थे। नेपाल से होकर जाने वाले यात्रियों को पहले काठमाण्डु जाना पड़ता था और वहां से वे मानसरोवर के लिए आगे बढ़ते थे। वहीं चीन से होकर जो यात्रा करनी पड़ती है उसमें तिब्बत से होकर जाना पड़ता है। इस यात्रा को पूरा करने में करीब 20 से 25 दिनों का समय लग जाता है।
लेकिन कई तरह की परेशानियां और झंझट होते हैं जो रास्ते का रोड़ा बन जाते हैं। वीजा शुल्क और वीजा से संबंधित विभिन्न प्रतिबंधों की वजह से यह यात्रा काफी मुश्किल भरा बन जाता है। हालांकि हाल में नेपाल की निजी एयरलाइंस 'श्री एयरलाइंस' ने चार्टर्ड प्लेन से माउंटेन फ्लाइट की शुरुआत की है, जिसमें विमान में बैठाकर यात्रियों को कैलाश-मानसरोवर के दर्शन करवाए जा रहे हैं। लेकिन यह उड़ान नेपाल के नेपालगंज से शुरू होती है, जो लखनऊ से लगभग 200 किमी की दूरी पर मौजूद है।
कौन सा होगा शॉर्टकट रूट

कैलाश-मानसरोवर का जो शॉर्ट-कट रूट तैयार किया है, वह भारत के अंदर होगा। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जल्द नया रास्ता तैयार किया गया है। कैलाश-मानसरोवर का उत्तराखंड वाला रास्ता लिपुलेख पास से होकर जाता है। पिथौरागढ़ से लिपुलेख दर्रा तक के लिए सड़क को खोल दिया गया है। इसके अलावा पिथौरागढ़ जिले के नाभीढांग के ठीक 2 किमी ऊपर ऊंची पहाड़ी से तिब्बत में मौजूद कैलाश पर्वत स्पष्ट नजर आता है।
हालांकि इस जगह के बारे में अभी तक किसी को पता नहीं था लेकिन कुछ स्थानीय लोग लिपुपास की पहाड़ी से ऊपर पहुंचे तो उन्हें वहां से भव्य कैलाश पर्वत स्पष्ट नजर आया। बीआरओ की हीरक परियोजना में नाभीढ़ांग से केएमवीएन हटस से लिपुलेख दर्रा तक करीब 6.5 किमी लंबी सड़क तैयार किया जा रहा है। इस सड़क के साथ ही 'कैलाश व्यू प्वाएंट' भी बनाया जाएगा, जहां से लोग आसानी से कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे।
फ्लाइट से पिथौरागढ़ पहुंचना हुआ आसान

साल 2020 तक बंद रहने के बाद हाल ही में पिथौरागढ़ के नैनी-सैनी एयरपोर्ट से विमान का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया है। Flybig ने सप्ताह में तीन दिन, सोमवार, मंगलवार और शुक्रवार को देहरादून से पिथौरागढ़ के बीच अपनी उड़ान सेवा को शुरू किया है।
पिथौरागढ़ के लिए उड़ान सेवा के शुरू हो जाने से कैलाश दर्शन और भी आसान हो गया है। बता दें, बीआरओ ने धारचूला से लिपुलेख तक सड़क का विस्तार कर लिया है जो कैलाश मानसरोवर का प्रवेश द्वार होगी। साल 2020 से ही इस परियोजना पर काम चल रहा था।



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