Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »अद्भुत : समूचे पर्वत को तराश कर बनाया गया विशाल मंदिर

अद्भुत : समूचे पर्वत को तराश कर बनाया गया विशाल मंदिर

मिस्र के पिरामिड, रोम का कालीज़ीयम या चीन की दीवार, ज्यादातर हमने इन सब को ही मानव द्वारा बनाई गई विशाल सरंचनाओं के रूप में जाना है। पर ऐसा नहीं है भारत में ऐसी विशाल अद्भुत संरचनाओं का निर्माण नहीं हुआ। भारत में ऐसे कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं जिसकी वास्तुकला और बनावट किसी आश्चर्य से कम नहीं।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में खड़ा कैलास मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा विशाल मंदिर जिसे एक ही चट्टान को काटकर (मोनोलिथिक) बनाया गया है। यह पूरी संरचना द्रविड़ शैली का एक अनूठा उदाहरण है। आगे हमारे साथ जानिए यह ऐतिहासिक मंदिर पर्यटन के लिहाज से आपके लिए कितना खास है।

शोधकर्ताओं और पर्यटकों केंद्र

शोधकर्ताओं और पर्यटकों केंद्र

PC- Jean Pierre Dalbera

कैलास मंदिर लंबे समय से शोधकर्ताओं और पर्यटकों का केंद्र रहा है। यहां की वास्तुकला, बनावट किसी को भी आश्चर्य में डाल सकती है। यह संरचना इतनी खास मानी जाती है कि शोधकर्ता अबतक यह जानने में लगे हुए हैं कि विशाल चट्टान को काटकर इस मंदिर का निर्माण किस प्रकार किया गया होगा।अद्भुत : इसलिए यह जगह बनी 'राम तेरी गंगा मैली' की शूटिंग लोकेशन

क्योंकि प्राचीन समय में आज के जैसी आधुनिक तकनीके विकसित नहीं की गईं थीं। बिना आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर ऐसी विशाल सरंचना का निर्माण एक शोध का विषय बना हुआ है।

मंदिर का निर्माण

मंदिर का निर्माण

PC- Jean Pierre Dalbera

यह पूराकैलास मंदिर 276 लंबी और 154 चौड़ी चट्टान को काटकर बनाया गया है। अगर आप इसकी संरचना को बारीकी से देखें तो आपको पता लगेगा कि इसका निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया गया है। मंदिर के निर्माण के दौरान लगभग 40 हजार टन वजनी पत्थरों को पहाड़नुमा चट्टान से हटाया गया था।इस स्थान से जुड़ा है भगवान कृष्ण की मृत्यु का बड़ा राज

जिसके बाद इस पहाड़ को बाहर और अंदर से काटकर 90 फुट ऊंचे मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर की दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी की गई है। इसके अलावा मूर्तियों से अलंकृत किया गया है।

वास्तुकला और मूर्तिकला

वास्तुकला और मूर्तिकला

PC- Jean Pierre Dalbera

कैलास मंदिर उन 34 मठों और मंदिरों में से एक है जो एलोरा गुफाओं को एक अद्भुत रूप प्रदान करते हैं। जिन्हें सह्याद्री पहाड़ियों की बेसाल्ट चट्टान की दीवारों के किनारे लगभग 2 किमी के क्षेत्र में खोदकर बनाया गया है। मंदिर गुफा संख्या नं 16 में पल्लव शैली के प्रमाम मिलते हैं। जहां वास्तुकला और मूर्तिकला द्रविड़ शैली से प्रभावित लगते हैं।

कैलास मंदिर परिसर में बनाए गए विशालकाय हाथी भारतीय वास्तुकला का अद्भुत नमूना माने जाते हैं। जो यहां आने वाले सैलानियों को अपनी ओर ज्यादा आकर्षित करते हैं।रहस्य : कहीं भूत मारते हैं तमाचा तो कहीं अपने आप पहाड़ चढ़ती हैं गाड़ियां

भगवान शिव को समर्पित

भगवान शिव को समर्पित

PC- Jean Pierre Dalbera

भगवान शिव को समर्पित इस विशाल मंदिर का निर्माण 8 वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण आई द्वारा करवाया गया था। लेकिन कैलास मंदिर के कई प्रतीक जैसे देवताओं की मूर्तियां, खंभे और जानवरों की आकृतियां किसी अज्ञात अतीत की ओर इशारा करती हैं। माना जाता है इनका निर्माण 5वीं और 10 वीं शताब्दी के आसपास किया गया होगा।

शोधकर्ताओं का क्या मानना है ?

शोधकर्ताओं का क्या मानना है ?

PC- Pratheepps

कई शोधकर्ताओं का मानना है कि कैलास मंदिर के निर्माणकर्ताओं ने एक वर्टिकल खुदाई पद्धति का इस्तेमाल किया था ताकि वे इस सरंचना को दुनिया के सामने एक अद्भुत रूप में पेश कर सके। जिसे हासिल करने में वे कामयाब रहे। इसलिए वे बड़े चट्टान के शीर्ष से शुरू हुए और नीचे की ओर बढ़े।

दिलचस्प बात यह है कि बहुत से शोधकर्ताओं की सुई यहां आकर अटक जाती है कि आखिर बिना किसी आधुनिक उपकरण के कैसे इस विशाल मंदिर का निर्माण किया गया होगा।पंच केदार : जहां दर्शन मात्र से ही दूर हो जाते हैं सारे कष्ट

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

PC- Ghumakkar Punit

आप औरंगाबाद से कैलास मंदिर तक का सफर टैक्सी या बस के माध्यम से पूरा कर सकते हैं। औरंगाबाद सड़क मार्गों द्वारा महाराष्ट्र के बड़े शहर जैसे मुंबई, पुणे, नासिक, सतारा,कोल्हापुर और अहमदनगर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इसके अलावा आप रेल मार्ग से लिए औरंगाबाद रेलवे स्टेशन और हवाई मार्ग के लिए औरंगाबाद हवाई अड्डे का सहारा ले सकते हैं।

भारत का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक पोल. क्या आपने भाग लिया?

यात्रा पर पाएं भारी छूट, ट्रैवल स्टोरी के साथ तुरंत पाएं जरूरी टिप्स

We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Nativeplanet sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Nativeplanet website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more