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कबाब और ककोरी कांड का मिला जुला संगम है काकोरी, वहां क्या ज़रूर देखें ट्रैवलर

काकोरी, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 14 किलोमीटर दूर इक प्रमुख नगर पंचायत है। जो भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान क्रान्तिकारी काकोरी काण्ड के लिए जानी जाती है।

By Staff

भारत का शुमार विश्व के उन देशों में जो अपने प्रभावशाली इतिहास के चलते हर साल लाखों पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करता है। साथ ही अगर इतिहासकारों की मानें तो भारत में ऐसा बहुत कुछ है जो किसी भी व्यक्ति को हैरत में डालने के लिए काफी है। भारत में मौजूद कोई भी राज्य हो अगर वहां की संस्कृति पर गौर करें तो मिलता है कि गुज़रे हुए इतिहास ने वहां अपनी एक विशेष पहचान छोड़ी है। तो इसी क्रम में हम आज अपने इस आर्टिकल के जरिये आपको रू-ब-रू कराने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी से करीब 14 किलोमीटर दूर मौजूद एक ऐसे डेस्टिनेशन से जो जहां एक तरफ इतिहास और वास्तु में रूचि रखने वालों का मक्का और फैशन और फ़ूड में इंटरेस्ट लेने वालों के लिए पेरिस और वेनिस से कम नहीं है।

जी हां हम बात कर रहे हैं काकोरी की। काकोरी, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 14 किलोमीटर दूर इक प्रमुख नगर पंचायत है। जो भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान क्रान्तिकारी काकोरी काण्ड के लिए जानी जाती है। आपको बताते चलें कि यहाँ पर काकोरी शहीदों की स्मृति में एक स्मारक भी है जिसे देखने हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं।

इस शहर के स्मृति को लोगों के बीच जिंदा रखने के लिए वर्तमान में मंगल ग्रह के एक प्रमुख क्रेटर का नाम भी काकोरी रखा गया है। आइये कुछ बिन्दुओं के जरिये जानें कि ट्रैवल और टूरिज्म की दृष्टि से क्यों महत्त्वपूर्ण है काकोरी। वेडनेसडे वंडर सेल : गोआईबीबो के दिलकश ऑफर

गुज़रे हुए इतिहास की याद ताज़ा करने के लिए

यदि इतिहासकारों की मानें तो भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में "काकोरी कांड" का एक बेहद महत्त्वपूर्ण योगदान है। काकोरी काण्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रान्तिकारियों द्वारा ब्रिटिश राज के विरुद्ध भयंकर युद्ध छेड़ने की खतरनाक मंशा से हथियार खरीदने के लिये ब्रिटिश सरकार का ही खजाना लूट लेने की एक ऐतिहासिक घटना थी जो 9 अगस्त 1925 को घटी। जहां इस घटना में महान क्रांतिकारी राम प्रसाद 'बिस्मिल' अशफाक उल्ला खाँ समेत कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें कठोर दंड दिया गया।

ज़रदोज़ी और चिकन के काम को निहारिये

हालिया दिनों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फैशन जगत में ज़रदोज़ी और चिकन के काम से बने वस्त्रों का खूब प्रचालन है और महंगे होने के बावजूद भी इन्हें ग्राहकों द्वारा हाथों हाथ लिया जा रहा है। अब अगर आपको ये देखना है कि आखिर ये काम होता कैसे हैं तो काकोरी और उसके आसपास का हिस्सा इसके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यहां चिकन और ज़रदोज़ी का काम प्रायः हर घर में होता है जहां पुरुष ज़रदोज़ी के काम को और महिलाएं चिकन के काम को करती हैं।

फोटो कर्टसी - SWATI SINGH

ज्ञात हो कि चिकनकारी और ज़रदोज़ी दोनों ही बारीक कढ़ाई के काम हैं जिन्हें हाथ के जरिये किया जाता है। आपको बताते चलें कि पहले नवाबों और बादशाहों के समय ज़रदोज़ी के काम में सोने और चांदी के तारों का इस्तेमाल होता था मगर वर्तमान में पीतल और मिश्रित धातुओं के तारों से ये कढ़ाई होती है। हमारा दावा है कि लोगों को ये बारीक काम करते देखना भी आपके लिए अपने आप में एक अनोखा अनुभव रहेगा।

दशहरी आम की खुशबू और जायका लीजिये

चाहे आप लखनऊ में हों या काकोरी में अगर आपने यहां दशहरी आम नहीं खाया तो समझ लीजिये आपकी यात्रा में बहुत कुछ मिस हो गया। आपको बताते चलें कि दशहरी आम आम की एक किस्म है जो अपनी भीनी खुशबू और स्वाद के लिए विदेशों में भी मशहूर है। जो केवल मलीहाबाद, काकोरी के इलाके में पैदा होता है। यदि आप काकोरी में हैं तो यहां मौजूद दशहरी के कोई 200 साल पुराने पेड़ को देखना न भूलें। स्थानीय लोगों के अनुसार ये दशहरी का मदर प्लांट है और दुनिया में मौजूद दशहरी के सभी प्रकार इसी से हैं।

फोटो कर्टसी - Jahanzaib Zai

काकोरी कबाब की भीनी भीनी खुशबू का लुत्फ़ लीजिये

बात अगर काकोरी की हो रही है और ऐसे में हम भोजन का वर्णन न करें तो बात पूरी तरह अधूरी रह जाती है। आज काकोरी अपने ख़ास काकोरी सींख कबाब के लिए प्रसिद्ध है जिसका जायका चखने यहां हर रोज़ हजारों लोग आते हैं। तो अब आप भी अपनी काकोरी यात्रा पर यहां के वर्ल्ड फेमस कबाब का जयका चखना न भूलें इसके अलावा आपको यहां कई अन्य मुगलाई व्यंजन चखने को मिलेंगे जो आपने पहले कभी नहीं खाए होंगे।

फोटो कर्टसी - Shashwat Nagpal

साहित्य और उर्दू के लिए भी है काकोरी

शायद आपको जानकार हैरत हो कि काकोरी वो स्थान है जिनसे साहित्य, कविताओं के क्षेत्र में भी अपनी एक विशेष पहचान दर्ज कराई है। ज्ञात हो कि वर्तमान में काकोरी हिंदी, उर्दू कविताओं और शायरी के अलावा साहित्य का भी गढ़ है जहां से हर साल बेहतरीन साहित्य और उर्दू अदब के कई बेहतरीन शेर और शायरी निकलती है।

http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_mango_cultivars#mediaviewer/File:Chaunsa.JPG

कैसे जाएं काकोरी

फ्लाइट द्वारा - काकोरी आने का निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ में है जो शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। हवाई अड्डे से काकोरी तक के लिए आपको बस कैब और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हो जायगी।

रेल द्वारा - काकोरी में रेलवे स्टेशन मौजूद है जो देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छे रेल नेटवर्क के जरिये जुड़ा हुआ है । इसके अलावा लखनऊ स्थित चारबाग़ रेलवे स्टेशन से भी आसानी से काकोरी पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग द्वारा - राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर स्थित काकोरी एक अच्छे रोड नेटवर्क द्वारा देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। अतः रोड ट्रिप भी काकोरी पहुँचने का एक बेहतरीन विकल्प है। साथ ही यूपीएसआरटीसी की बसों द्वारा यहां आसानी के साथ आया जा सकता है।

फोटो कर्टसी - The Indscribe

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