भारत में कुछ ही जगहें ऐसी हैं, जो अपनी संस्कृति और विरासत के मामले में अद्वितीय हैं। ओडिशा राज्य भी उन्हीं में से एक है। यदि आप ओडिशा में हैं तो आपको यहां के एक खूबसूरत शहर कालाहांडी की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। कालाहांडी इतिहास और संस्कृति में समृद्ध ओडिशा का एक जि़ला है। उत्तेयी और तेल नदियों के संगम पर स्थित कालाहांडी में 12वीं सदी की उत्कृष्ट वास्तुकला के कुछ बहुत प्राचीन मंदिर हैं। प्रपाती झरनों के साथ अनेक सुंदर पहाडि़याँ इस जगह की सुंदरता को बढ़ाती है। पाषाण युग और लौह युग के कई पुरातात्विक सबूत यहाँ पाए गए थे। कालाहांडी उत्सव हर साल मनाया जाता है और उत्तम कला, संस्कृति, संगीत और हस्तकला के लिए दुनियाभर में मशहूर है।
कालाहांडी पर्यटन अपने दर्शकों के लिए दिलचस्प इतिहास और बहुत सुंदर प्राकृतिक सौंदर्य वाले विदेशी स्थान प्रस्तुत करता है। यहां पर्यटकों के लिए ऐसा बहुत कुछ है जिसकी कल्पना उन्होंने कभी की होगी साथ ही ये स्थान इतने सुन्दर हैं कि आने वाले किसी भी पर्यटक का मन मोह सकते हैं। तो आइये अब देर किस बात की इस आर्टिकल के जरिये आपको बताते हैं कि अपनी कालाहांडी की यात्रा पर ऐसा क्या है जो आपको अवश्य देखना चाहिए।
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असुरगढ़
जैसा कि नाम से पता चलता है, असुरगढ़ कालाहांडी में नरला के पास असुरों का एक किला है। एक समय में यह जगह 500ई. पूर्व से 500ई. तक शहरी और सबसे सभ्य लोगों का निवास स्थान और राजनीतिक तथा सांस्कृतिक केंद्र था। लोग यहाँ इस किले के अवशेष देखने के लिए आते हैं जो 200 एकड़ में फैली हुई असुरसागर नामक बड़ी टंकी के पास स्थित है। इसकी चारों दिशाओं में प्रवेशद्वार हैं और प्रत्येक प्रवेशद्वार पर विभिन्न देवता प्रतिष्ठित है।
गुडाहांडी

फोटो कर्टसी - siddhant naik
गुडाहांडी कालाहांडी में तीन पहाडि़यों के मिलने से बनने वाला एक अविश्सनीय और सुरम्य स्थान है। केवल प्राकृतिक रूप से ही नहीं बल्कि गुडाहांडी में ऐसे कई सबूत पाए गए हैं जो पूर्व ऐतिहासिक समय के माने जाते हैं। इन पहाडि़यों में स्थित गुफाओं में अनेक प्रकार के चित्र बने हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि ये चित्र सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान बनाए गए थे।
रबनदढ़
रबनदढ़ में घने हरे जंगलों के बीच एक व्यापक झरना स्थित है। शहर के शोरगुल से दूर, रबनदढ़ केवल झरने की आवाज़ के साथ एक शांत और विचित्र स्थान है। इस जगह पहुँचने के लिए आपको धूल भरी सड़कों से होकर गुज़रना होता है। अच्छा कम्यूनिकेशन न होने के बावजूद, लोग प्रकृति की गोद में कुछ समय बिताने के लिए रबनदढ़ आते हैं। यह एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल है।
मोहनगिरी

फोटो कर्टसी - Siddhantbabu
मोहनगिरी कालाहांडी में स्थित एक विचित्र गाँव है जो शिव मंदिर आने वाले पर्यटकों के लिए पसंदीदा जगहों में आता है। इस गाँव के पास काली गंगा नामक धारा बहती है। इस जलधारा के किनारे पर जगमोहन हॉल के ग्यारह स्तंभों के साथ प्रचीन शिव मंदिर के अवशेष स्थित हैं। हालांकि, इस मंदिर का पुर्ननिर्माण करवाया गया है, लेकिन फिर भी 600 ई. के पुराने अवशेष मंदिर में आज भी देखे जा सकते हैं।
इस मंदिर की दीवारों पर चट्टानों को काटकर अनेक मूर्तियाँ बनाई गई हैं और साथ ही ढह चुके इस प्रचीन मंदिर पर बने पत्थरों के ब्लॉक इस मंदिर को देखने योग्य बनाते हैं।
कैसे जाएं कालाहांडी
कालाहांडी ओडिशा के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। केसिंगा रेलवे स्टेशन और भुवनेश्वर हवाईअड्डे से क्रमशः रेल और फ्लाइट लेकर आप आसानी से कालाहांडी पहुँच सकते हैं।
फ्लाइट द्वारा
आप 259 किलोमीटर दूर रायपुर हवाई अड्डे से या फिर 341 किलोमीटर दूर विशाखापत्तनम हवाई अड्डे से कालाहांडी तक पहुँच सकते हैं। 450 किलोमीटर दूर स्थित भुवनेश्वर हवाईअड्डा एक अन्य विकल्प है। आप इन हवाईअड्डों से कालाहांडी के लिए बस ले सकते हैं।
ट्रेन द्वारा
कालाहांडी के पास स्थित केसिंगा रेलवे स्टेशन यहाँ के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन है। यह भारत के बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता तथा चेन्नई आदि से भली प्रकार जुड़ा है।
सड़क मार्ग द्वारा
दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग 201 और 217 कालाहांडी से गुज़रते हैं। कई राज्य परिवहन की बसें आसानी से उपलब्ध होती हैं जो इसे देश के सभी बड़े शहरों जैसे भुवनेश्वर, कट्टक, संबंलपुर आदि से जोड़ती हैं। कई निजी बसें भी उपलब्ध हैं। आपको बताते चलें कि भुवनेश्वर से कालाहांडी तक आने के लिए लगभग 120रूपए लगते हैं।



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