कश्मीर अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के कारण ही धरती का स्वर्ग कहलाता है। यहां एक ओर पहाड़ों की बर्फिली चोटियों को देखकर ऐसा लगता है कि आइसक्रीम वाले पहाड़ आकाश को छू रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पहाड़ों के ठीक सामने हरे घास के मैदानों में पड़ने वाली ओस की बूंदे जो घास पर चमकती किसी मोती जैसी दिखती है।
उन्हें देखकर पर्यटकों का दिल बाग-बाग न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। लेकिन पिछले कुछ समय में कश्मीर की वादियों में पर्यटकों की भीड़ काफी अधिक बढ़ गयी है। अगर आप कश्मीर में कुछ ऑफबीट देखना और किसी ऐसी जगह पर घूमने जाना चाहते हैं जहां पर्यटकों की ज्यादा भीड़ न हो तो वेरीनाग तालाब पहुंच जाइए।

क्या है वेरीनाग?
यूं तो कश्मीर घाटी में सैंकड़ों झरने हैं, लेकिन उन सबमें सबसे अधिक खास दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित वेरीनाग झरना और तालाब है। इस झरने व इससे बनने वाले तालाब का कश्मीर घाटी में विशेष महत्व है। माना जाता है कि वेरीनाग झरना व तालाब कश्मीर घाटी की प्रमुख नदी झेलम नदी का मुख्य स्रोत है। माना जाता है कि झेलम नदी वेरीनाग झरने से शुरू होती है जो पूरे जम्मु-कश्मीर से होते हुए पाकिस्तान के पंजाब तक जाती है।

जहांगीर ने बनवाया था तालाब
इतिहासकारों का कहना है कि वेरीनाग शब्द, दो शब्दों से मिलकर बना है - वेरी और नाग। वेरी कश्मीर के इस क्षेत्र का पुराना नाम है और कश्मीरी भाषा में नाग का मतलब पानी का चश्मा होता है। वेरीनाग झरना और तालाब अनंतनाग से महज 32 किमी की दूरी पर मौजूद है।
इतिहासकारों के मुताबिक किसी समय इस झरने का प्रवाह काफी तेज हुआ करता था। फिर एक दिन मुगल बादशाह जहांगीर की नजर वेरीनाग पर पड़ी। कहा जाता है कि वेरीनाग तालाब को बनाने के लिए लगभग 400 साल पहले इरान से कारिगरों को बुलाया गया था।

काफी उपयोगी है झरना
वेरीनाग झरना न सिर्फ अनंतनाग जिले में ही सैंकड़ों एकड़ जमीन की सिंचाई के काम नहीं आता है बल्कि यह इस झरने की वजह से ही घाटी के हजारों घरों में साफ पेयजल की आपूर्ति भी की जाती है। माना जाता है कि इस झरने के पानी में काफी खनीज-तत्व हैं जो भोजन को पचने में मदद करते हैं।
जलवायु परिवर्तन की वजह से घाटी के दूसरे प्राकृतिक झरने एक ओर जहां सिकुड़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर सैंकड़ों सालों बाद भी इस झरने का प्रवाह जस का तस बना हुआ है। इस तालाब का गहरा नीला पानी आंखों को सुकून और दिल को ठंडक से भर देता है।

वेरीनाग झरने का पानी इसके पास ही बने तालाब में जमा होने के बाद एक नहर के रूप में बाहर निकलता है जो खानाबल में लिडर नदी और शोपियां जिले में रम्बी आरा जैसी अन्य सहायक नदियों से जुड़कर झेलम नदी बनाता है। यहीं झेलम नदी पूरी कश्मीर घाटी से होती हुई पंजाब, पाकिस्तान तक जाती है।



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