आज यानी 17 अगस्त 2023 को दो हिस्सों में बंट गया ISRO का चंद्रयान -3। इसरो चंद्रयान -3 के प्रपोल्शन मॉड्यूल से लैंडर और रोवर को सफलतापूर्वक अलग कर दिया है। चंद्रयान -3 अभी चंद्रमा की कक्षा में गोलाकार में घूम रहा है, जो चंद्रमा से महज 153 किमी की दूरी पर है।

इसरो से मिली जानकारी के अनुसार, 18 अगस्त की शाम को 4 बजे लैंडर को डिबुस्टिंग करने की योजना है। वैज्ञानिकों ने 16 अगस्त की सुबह करीब 8.30 बजे यान के थ्रस्टर को कुछ देर के लिए फायर किया था। इसके बाद ही चंद्रयान-3 153 x 163 किमी के गोलाकार कक्षा में घूमने लगा है। इसके बाद क्या होगा? कैसे चंद्रयान -3 को चंद्रमा पर लैंडिंग के लिए तैयार किया जाएगा? कब चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा?
आइए चंद्रयान-3 से संबंधित सारी Details आपको बताते हैं :
क्यों अलग होगा लैंडर और रोवर
17 अगस्त का दिन चंद्रयान-3 के लिए काफी नाजुक साबित होने वाला है। इसरो आज चंद्रयान-3 के प्रपोल्शन मॉड्यूल से लैंडर और रोवर को अलग करेगा। चंद्रयान-3 के चंद्रमा की सीमा में प्रवेश करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चंद्रयान-3 में एक प्रपोल्शन मॉड्यूल है जिसका वजन करीब 2,148 किलो है। इसका काम चंद्रयान-3 को चंद्रमा के करीब ले जाकर उसकी कक्षा में स्थापित करना था।
चूंकि यह काम पूरा हो चुका है, इसलिए अब इसे लैंडर व रोवर से अलग कर दिया जाएगा। चंद्रयान- 3 में एक लैंडर भी है जिसका वजन करीब 1,723.89 किलो है। चंद्रयान- 3 अपने साथ जिस रोवर को लेकर गया है, उसका वजन 26 किलो है। लैंडर का काम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर रोवर को लैंड करवाना होगा।
कैसे होगी लैंडिंग की तैयारी

एक-दूसरे से अलग होने के बाद प्रपोल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल 100 km x 100 km ऑर्बिट में घूमना शुरू कर देंगे, लेकिन उनके बीच थोड़ी दूरी बनाकर रखी जाएगी, ताकि वे एक दूसरे से टकरा ना जाए। इसके बाद 18 और 20 अगस्त को लैंडर की डीऑर्बिटिंग कराई जाएगी। 18 अगस्त 2023 की शाम को करीब 4 बजे 1 मिनट के लिए लैंडर के थ्रस्टर्स को ऑन किया जाएगा ताकि उसे सही दिशा में लाकर उसकी गति कम की जा सके (जो सबसे मुश्किल और महत्वपूर्ण काम है)। 20 अगस्त की आधी रात के बाद लगभग पौने 2 बजे भी यहीं काम किया जाएगा।
कब होगी चांद पर लैंडिंग और क्या होगा आगे
चंद्रयान- 3 को चांद पर लैंड करवाना ही सबसे अधिक मुश्किल भरा काम होगा। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-3 का लैंडर 23 अगस्त की शाम को करीब 5.47 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड कर सकता है। जिस समय लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा, उसकी ऊंचाई करीब 100 किमी होगी। इसलिए क्रैश लैंडिंग की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए सबसे पहले चंद्रयान-3 को सुरक्षित जगह खोजनी होगी। लैंडिंग के समय काफी धूल उड़ने की संभावना है, इसलिए धूल छंटने के बाद ही 6 पहियों वाले रोवर 'प्रज्ञान' को बाहर लाया जाएगा।

जो चांद की सतह पर उसके एक दिन तक प्रयोग करेगा। बता दें, चंद्रमा का एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। यानी लैंडिंग के बाद अगले 14 दिनों तक चंद्रयान-3 चांद की धरती का अध्ययन करेगा। अध्ययन से मिलने वाले डाटा को रोवर 'प्रज्ञान' अपने लैंडर 'विक्रम' को भेजेगा। 'विक्रम' उन जानकारियों को चांद की सतह से 100 किमी की ऊंचाई पर घूम रहे प्रपोल्शन मॉड्यूल को देगा जहां से बैंगलोर के इंडियन डीप स्पेश नेटवर्क को यह जानकारी मिल जाएगी। खास बात यह है कि चंद्रयान-3 चांद की सतह पर जहां भी घूमेगा, वहां वह अपने पहियों में बने विशेष खांचों की वजह से अपने पीछे राष्ट्रीय चिन्ह और इसरो का लोगो बनाता जाएगा।
अब तक कौन से चरण कर चुका है पार
चंद्रयान- 3 को इसरो ने श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया था। उस समय इसे हेवी लिफ्ट रॉकेट LVM3 के जरिए पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया था। इसके बाद 1 अगस्त को यह पृथ्वी की कक्षा को छोड़कर चंद्रमा की तरफ बढ़ गया। 5 अगस्त की शाम को करीब 7.15 बजे चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया। उस समय इसकी स्पीड को कम किया गया था ताकि यह चंद्रमा की ग्रैविटी में कैप्चर हो सके।
स्पीड को कम करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के फेस को पलटकर यानी उल्टी दिशा में करके थ्रस्टर को करीब आधे घंटे के लिए फायर किया था। इसके बाद यह क्रमशः 6, 9 और 14 अगस्त को चंद्रमा की अगली कक्षाओं में प्रवेश करता गया। हर कक्षा को पार करने के साथ-साथ यह यान चंद्रमा के और भी निकट पहुंचता रहा है। चंद्रमा की कक्षाओं को पार करने के साथ-साथ चंद्रयान-3 ने चांद की तस्वीरें भेजनी भी शुरू कर दी है। इन तस्वीरों में चांद के क्रेटर्स भी साफ-साफ नजर आ रहे हैं।



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