
सितंबर का महीना चल रहा है, जो कि अधिकांश हिंदी कैलेंडर के भाद्रपद महीने में आता है। इस दौरान महीने के पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है, जो 15 दिनों तक यानी कि आश्विन महीने के अमावस्या तक चलता है। इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहे और किसी प्रकार की कोई दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।
ऐसे में अगर पिंडदान की बात की जाए तो आप देश के किसी भी हिस्से में पिंडदान कर सकते हैं लेकिन इसके भारत की कुछ खास जगहें हैं, जहां जाकर आप पूर्वजों का पिंडदान करवा सकते हैं। जहां श्राद्ध करने से बेहद पुण्य मिलता है और पितरों की आत्मा को काफी शांति भी मिलती है। ऐसे में आज ऐसी ही जगहों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जहां आप जाकर अपने पूर्वजों का पिंडदान कर सकते हैं।

बोधगया
पिंडदान के लिए सबसे अच्छा स्थान बिहार के गया को माना गया है। आमतौर पर यहां पिंडदान की प्रक्रिया फाल्गु नदी के तट पर आयोजित की जाती है। इस स्थान का उल्लेख रामायण और महाभारत दोनों में गयापुरी के नाम से किया गया है। गया में आपको काफी स्थान मिल जाएंगे, जहां पिंडदान के लिए पूजा कराई जाती है।

वाराणसी
गंगा नदी के किनारे बसे होने के कारण वाराणसी को सबसे धार्मिक और शीर्ष तीर्थस्थलों में गिना जाता है। ऐसे में काशी के गंगा घाटों पर लोग अपने पूर्वजों के लिए हवन और पिंडदान के लिए पूजा करवाते हैं। वाराणसी को लेकर कहा जाता है कि यहां के लोग मृत्यु को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

हरिद्वार
पिंडदान के बारे में सबसे ज्यादा जिस स्थान के बारे में सुना जाता है, वो उत्तराखंड में बसा हरिद्वार है। कहा जाता है कि अगर इस पवित्र स्थान पर किसी का अंतिम संस्कार किया जाता है तो उसकी आत्मा सीधे स्वर्ग लोक जाती है। हरिद्वार को लेकर कहा जाता है कि यहां के नारायणी शिला पर पूजा करने से पितरों की को मोक्ष प्राप्ति होती है, पुराणों में भी इसका वर्णन किया गया है। गंगा नदी के किनारे पर बसा ये शहर घूमने के लिहाज से भी काफी खूबसूरत है।

उज्जैन
काशी की तरह ही उज्जैन को भी मंदिरों का शहर कहा जाता है। यहां पर भी पिंडदान को लेकर काफी मान्यताएं है। शहर में शिप्रा नदी के तट पर पितृ पक्ष के महीने में पिंडदान के लिए एक समारोह भी आयोजित किया जाता है। महाकाल की इस नगरी में घूमने के लिए काफी स्थान है।

मथुरा
मथुरा शहर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है, इसलिए इस शहर को काफी पवित्र माना जाता है। ऐसे में इस शहर में पिंड दान करना काफी अच्छा माना जाता है। यहां यमुना नदी के तट पर बोधिनी तीर्थ, विश्रंती तीर्थ और वायु तीर्थ पर आयोजित किए जाते हैं। यहां पर लोग पिंडदान के लिए पूजा कर अपने पूर्वजों को काफी प्रसन्न करते हैं।

प्रयागराज
प्रयागराज शहर को गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम के रूप में जाना जाता है। इसलिए इसे संगम नगरी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि यहां पर पिंडदान करने से आत्मा को होने वाले सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। यहां के संगम नगरी में स्नान करने से इंसान के सारे पाप धुल जाते हैं। इसके अलावा अगर घूमने के लिहाज से बात की जाए तो यहां आसपास घूमने के लिए काफी स्थान आपको मिल जाएंगे।

अयोध्या
भगवान राम की जन्मस्थली भी पिंडदान के लिए काफी अच्छा शहर माना जाता है। अयोध्या में सरयू नदी के किनारे भात कुंड पर पिंडदान के अनुष्ठान किया जाता है। इसके अलावा अगर घूमने की बात की जाए तो यहां आसपास में आपको घूमने के लिए काफी कुछ मिल जाएगा।

जगन्नाथ पुरी
जगन्नाथ पुरी के नाम से तो आप सभी वाकिफ होंगे, यहां पर साल में एक रथयात्रा पर्व मनाया जाता है, जो यहां का काफी फेमस त्योहार है। दरअसल, महानदी और भार्गवी नदी किनारे पर पुरी बसा है, जिससे इसके संगम स्थल पर पिंडदान समारोह को आयोजित किया जाता है। पुरी को चार धामों में से एक माना जाता है। यहां आसपास में पर्यटकों के घूमने के लिए काफी शानदार जगहें है।



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