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भारत की सबसे पुरानी सुरंगे... जिनका इतिहास आज तक कोई नहीं जान पाया

आधुनिक युग की शुरुआत हो चुकी है, दुनिया के लोगों ने पूरी तरीके से विज्ञान को अपना लिया है। लेकिन आज भी विश्व में कई ऐसे स्थान है, जिनके बारे में आज तक कोई सही से जान न सका। या यूं भी कहा जा सकता है, ये सभी स्थान आज भी रहस्यमई बने हुए है, इनके इतिहास के बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया है और शायद न जान पाएगा। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से बात करने जा रहे हैं भारत के उन सुरंगों की, जो जानकारी में सभी के है लेकिन आज तक कोई उसके बारे में सही से जान नहीं सका।

अगर सुरंग के बारे में जानने की कोशिश की जाए तो सुरंग एक प्रकार का एडवेंचर भी है, जिसे पार करना और उसके उस पार जाना सभी चाहते हैं। लेकिन ये सुरंगे थोड़ी अजीब है, इनको आज तक कोई पार भी नहीं कर पाया। इनके रहस्य आज भी अनसुलझे है। दरअसल, अगर पुराने समय की बात की जाए तो काफी समय पहले लोग जानवरों से बचने के लिए सुरंगों का इस्तेमाल किया करते थे, जो आज भी कहीं न कहीं मिल ही जाती है।

oldest tunnel

हिमालय की सुरंगें

हिमालय की सुरंगों को लेकर कहा जाता है कि ये सुरंगे प्राचीन काल में एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने के लिए किया जाता था, जिसे आज भी आप देख सकते हैं लेकिन आज के समय इन सुरंगों को पार करना काफी मुश्किल है। हिंदू कुश की पहाड़ियों से लेकर अरुणाचल तक फैले इन सैंकड़ों सुरंगों का इतिहास आज तक कोई नहीं जान सका।

oldest tunnel

शिवखोड़ी गुफा की सुरंग

जम्मू कटरा से शिवखोड़ी की दूरी मात्र 30 किमी. है, जहां शिवलिंग के पास में आपको एक गुफा दिखाई देगी, जो अंदर जाकर दो भागों में विभाजित हो जाती है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे स्वयं शिव भगवान ने अपने हाथों से निर्मित किया था। इस गुफा के बारे में कहा जाता है कि इसमें से एक अमरनाथ के मुख्य गुफा तक जाती है लेकिन आज तक दूसरी गुफा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कहा जाता है कि आज तक इस गुफा में जिसने भी प्रवेश किया वो कभी लौटकर वापस नहीं आया।

लाल किला

दिल्ली में स्थित लालकिला से ज्यादा रहस्यमई स्थान शायद ही कोई हो। इस किले में कई सुरंग और कई गुप्त मार्ग है, जिनके बारे में अब तक कोई सटिक जानकारी नहीं मिल पाई है। अभी हाल ही में एक सुरंग के बारे में जानकारी हासिल की गई है, वो सुरंग दिल्ली के विधानसभा भवन तक जाती है। इसमें एक और सुरंग है, जो यमुना नदी तक जाती है।

आमेर का किला, जयपुर

आमेर का किला, राजस्थान की गुलाबी नगरी में स्थित है, जिसे अंबर पैलेस या अंबर किला के नाम से भी जाना जाता है। इस पैलेस को जयगढ़ किले से जोड़ने वाली एक ओपन सुरंग है, जो लगभग 325 मीटर लंबी है। इस निर्माण को लेकर कहा जाता है कि इसे 18वीं शताब्दी में बनाया गया था।

कुरुक्षेत्र की सुरंग

महाभारत की भूमि कही जाने वाली कुरुक्षेत्र में स्थित प्राचीन कुलतारण तीर्थ के किनारे आपको एक प्राचीन सुरंग देखने को मिल जाएगी, जो आज भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए रहस्य बना हुआ है। इस पर आज भी शोध जारी है लेकिन आज तक इसके अतीत के बारे में कोई नहीं जान सका। इस स्थान को लेकर किवदंती है कि पांडुओं की अस्थियां इसी कुलतारण तीर्थ में विसर्जित की गई थी। इसीलिए यहां के लोग इस तीर्थ में अस्थि विसर्जन करने के लिए आते हैं।

चारमीनार

हैदराबाद का चारमीनार और गोलकुण्डा का किला भी इन रहस्यों से परे नहीं है। इन दोनों ऐतिहासिक स्थानों को लेकर कहा जाता है कि इन दोनों में एक सुरंग है, जो दोनों स्मारकों को आपस में जोड़ती है।

मनिहरण सुरंग, सिलचर

मनिहरण सुरंग, भुवन पहाड़ी से 5 किमी. की दूरी पर स्थित है, जहां भुवन महादेव मंदिर है। इस प्राचीन सुरंग का उल्लेख महाभारत में मिलता है। इस सुरंग को लेकर किवदंती है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसका इस्तेमाल किया था। वहीं, पवित्र त्रिवेणी नदी भी इसी सुरंग के नीचे से बहती है। इसके अलावा सुरंग के पास में ही भगवान श्रीकृष्ण का एक मंदिर भी है, जहां काफी श्रद्धालु दर्शन करने भी आते हैं। यहां पर हर साल होली और शिवरात्रि का पर्व भी इसी सुरंग के पास में ही मनाई जाती है, जो इस स्थान को और भी खास बनाती है।

तलातल घर

18वीं शाताब्दी के दौरान यह स्थान शासकों और उनके उत्तराधिकारियों द्वारा उपयोग किए जाने वाला एक गुप्त सैन्य अड्डा था। यह रंगपुर पैलेस का एक हिस्सा था, जो ताई अहोम वास्तुकला का सबसे शानदार उदाहरण भी है। इसमें दो गुप्त सुरंगे है, जो अहोम युद्ध के दौरान निकास मार्गों के रूप में इस्तेमाल किए जाते थे। इनमें से एक 3 किमी. लंबी है, जो दिखौ नदी के पास जाकर मिलती है और दूसरी 16 किमी. लंबी है, जो गढ़गांव पैलेस की ओर जाती है।

चुनारगढ़ की सुरंग

चुनारगढ किले के सुरंगों की बात की जाए तो यहां एक नहीं बल्कि कई सुरंगे है, जो इस किले को और भी रहस्यमई बनाती है। इसके अलावा इस किले में कई तहखाने भी दिख जाएंगे, जो काफी गहरे भी है। ये सभी गुप्त रास्तों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए है। किले को लेकर किवदंती है कि यहां जहरीले सांपों का बसेरा है। इस किले में आपको एक बावड़ी भी दिखेगी, जो काफी गहरी है, इसमें आपको काफी सीढ़ियां और दीवारों पर प्राचीन समय चिन्ह बने हुए हैं, जिन्हें समझना बेहद मुश्किल है।

महम की बावड़ी, रोहतक

रोहतक में स्थित महम की बावड़ी को ज्ञानी चोर की गुफा के नाम से भी जाना जाता है। इस गुफा को लेकर कहा जाता है कि जब भारत में ब्रिटिश हुकूमत थी, तब एक बारात इसी गुफा के रास्ते में दिल्ली जा रही थी, लेकिन वो बारात ना तो कभी दिल्ली पहुंची और ना कभी वापस आई। आज तक उन बारातियों के बारे में कोई जानकारी हाथ नहीं लग पाई है। उसके बाद इस गुफा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया, ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना ना हो।

परगवाल सुरंग, जम्मू

जम्मू में स्थित परगवाल सुरंग की खोज भारतीय द्वारा साल 2014 में की गई थी। इस सुरंग के छोर के बारे में आज तक पता नहीं लग पाया है।

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