लखनऊ की सर्दियां बड़ी अनोखी होती है। पुराने साल को विदा करना, नए साल का स्वागत के साथ-साथ विंटर वेकेशन की खुशियां...कई तरह की भावनाएं एक साथ मिलकर लखनऊ की सर्दियों को बड़ी खास बना देती है। सर्दियों का यह समय ही होता है जब लोग पिकनिक पर जाने, दोस्तों और परिवार के साथ फुर्सत के कुछ पल रिलैक्स होकर बिताना पसंद करते हैं।
यूं तो लखनऊ में घूमने की कई जगहें हैं लेकिन सर्दियों के मौसम में पिकनिक पर जाने के लिए कुछ चुनिंदा जगहें या ऐसा कहा जाए कि कुछ खास जगहें हैं जहां हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने जरूर पहुंचते हैं।

लखनऊ की वो जगहें जहां सर्दियों पिकनिक मनाना है ट्रेंड -
कुकरैल संरक्षित वन
लखनऊ का संरक्षित वन इलाका है कुकरैल। यहां पर पूरे परिवार के साथ लोग पिकनिक मनाने के लिए आते हैं। इस जगह हरियाली और शांति के साथ-साथ एक और बात है जो बड़ी खास बनाती है और वह है घड़ियाल व मगरमच्छ की कई तरह की प्रजातियों का दिखना।
यह बच्चों को बड़ा रोमांचित करती है। कुकरैल संरक्षित वन इलाके को बतौर पिकनिक स्पॉट भी विकसित किया जा रहा है, जहां बच्चों के खेलने के लिए चिल्ड्रेन पार्क, हाईकिंग आदि की जगह भी बनायी गयी है। कुकरैल संरक्षित वन क्षेत्र में प्रवेश शुल्क नहीं लगता है। कुकरैल के अंदर कई पार्क हैं -
मगरमच्छ प्रजनन पार्क - यहां कई प्रजातियों के मगरमच्छ और घड़ियालों का प्रजनन करवाया जाता है। इसलिए यहां विभिन्न आकार के मगरमच्छ और घड़ियाल तो दिखते ही हैं, साथ में यहां इन मगरमच्छ व घड़ियालों के बच्चे भी देख सकते हैं।
डियर पार्क - कुकरैल में मौजूद डियर पार्क में कई तरह के हिरण देख सकेंगे।
इसके अलावा यहां विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे भी होते हैं, जिनका इस्तेमाल कर आज भी दवाईयां तैयार की जाती हैं। भूख लगे तो पर्यटक कैफे में जाकर लजीज व्यंजनों का स्वाद भी चख सकेंगे।
जनेश्वर मिश्र पार्क
लखनऊ का सबसे नया पिकनिक स्पॉट बनकर उभरा है जनेश्वरम मिश्र पार्क में मौजूद डायनासोर जुरासिक पार्क। यह पार्क अपनी हरियाली और अनोखेपन की वजह से लोगों को खूब आकर्षित करता है। जनेश्वर मिश्र पार्क में एंट्री शुल्क नहीं लगता है लेकिन जुरासिक पार्क में एंट्री शुल्क ₹100 है। नए साल पर बच्चों के साथ घूमने जाने के लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां भी आपको घूमने के बाद खाने-पीने के लिए कैफेटेरिया मिल जाएगा।

चिड़ियाघर
चिड़ियाघर तो हमेशा से ही नए साल जैसे दिनों पर लोगों के घूमने की पहली पसंद होता है। लेकिन लखनऊ के चिड़ियाघर में आने वाले लोगों का मुख्य आकर्षण यहां मौजूद कई तरह के जानवरों के साथ-साथ मिनी ट्रेन (टॉय ट्रेन) होता है। यह ट्रेन पूरे चिड़ियाघर का चक्कर लगाकर यात्रियों को फिर से स्टेशन पर छोड़ती है।
बता दें, यह उत्तर प्रदेश की सबसे पहली टॉय ट्रेन है जिसमें बच्चों से लेकर बड़े तक सब सवारी करते हैं। टॉय ट्रेन की सवारी बिल्कुल किसी जंगल सफारी जैसा अनुभव करवाती है।
एंट्री शुल्क (चिड़ियाघर)
- वयस्क - ₹60
- 5-12 साल तक के बच्चे - ₹30
एंट्री शुल्क (टॉय ट्रेन)
- वयस्क (12 साल से ऊपर आयु) - ₹100
- 5 से 12 साल के बच्चे - ₹50
मूसाबाग
यह लखनऊ के इतिहास को अपने आप में समेटे हुए है। इसे लखनऊ के सबसे पुराने और सबसे खास जगहों में से एक माना जा सकता है। वर्ष 1857 की जंग के अवशेषों के तौर पर यह इमारत आज भी खड़ी है। आज के समय में यह इमारत खंडहर बन चुका है लेकिन इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोग आज भी यहां आते रहते हैं। मूसाबाग की एंट्री शुल्क ₹20 है।
दिलकुशा गार्डन
यह इमारत भी लखनऊ के उस इतिहास को अपने आप में समेटे हुए है, जो 1857 के जंग की कहानी बयां करता है। 1857 में हुए सिपाही विद्रोह का साक्षी रहा दिलकुशा गार्डन आज के समय में एक खंडहर मात्र जरूर है, लेकिन यहां की हर ईंट उस समय की ऐतिहासिक गाथाएं और वीरता की कहानियों की साक्षी है। दिलकुशा गार्डन में एंट्री शुल्क मात्र ₹5 है।



Click it and Unblock the Notifications














