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सुकून शांन्ति के जरुर जायें मध्य प्रदेश के इन खूबसूरत मन्दिरों में

Written By: Goldi

भारत के दिल यानि मध्य प्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। मध्यप्रदेश का इतिहास, वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और आलीशान ऐतिहासिक विरासतें मध्यप्रदेश को पर्यटकों के लिए स्वर्ग बनाती हैं।

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मध्य प्रदेश पर्यटन आपको एक ऐसे खूबसूरत शहर की सैर पर ले जाता है जहां चमचमाती नदियां, शांत झीलें और बुलंद पठार मनोरम दृश्‍य प्रस्‍तुत करते है।

                            वे मंदिर जहाँ की खासियत हैं वहाँ की कामुक मूर्तियाँ !
इस सब के अलावा मध्य प्रदेश का अन्य पहलु भी है.. जिसके बारे में बहुत ही काम लोग जाते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं यहां मौजूद अलग अलग मंदिरों की जो मध्य प्रदेश के कल्चर का हिस्सा तो नहीं हां मगर, यदि व्यक्ति को शांति की तलाश है तो मध्यप्रदेश के इन मंदिरों में ऐसा बहुत कुछ है जो शांति की तलाश करने आये एक पर्यटक का मन मोह सकता है।

महाकालेश्वर मंदिर,उज्जैन

महाकालेश्वर मंदिर,उज्जैन

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन के पवित्र शहर में हिंदुओं के सबसे शुभ मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर भारत के बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में स्थित मूर्ति ओंकारेश्वर शिव की है और देवता महाकाल तीर्थ के ऊपर गर्भगृह को समर्पित है।यह मंदिर एक झील के पास स्थित है। इस मंदिर में भलत शिवलिंग के दर्शन कर धनी हो जाते हैं।PC:Bernard Gagnon

शारदा देवी का मंदिर

शारदा देवी का मंदिर

यह मंदिर मध्य प्रदेश के मैहर शहर में त्रिकूट पर्वत की उँचाई पर स्थित है। मैहर शहर का नाम भी भगवान से जुड़ी कहानी पर ही निर्धारित है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव जी देवी सती के शव को गोदी में उठा कर ले जा रहे थे तब उनके गले का हार टूट कर इस जगह में गिर गया और तब से ही इस शहर का नाम माई का हार, 'मैहर' पड़ गया।PC: LRBurdak

पीतांबरा देवी मंदिर

पीतांबरा देवी मंदिर

मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं।PC: Work2win

 ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप 77 किमी की दूरी पर स्थित है। जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता हैअनादिकाल से मां नर्मदा ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर का जलाभिषेक करती आ रही है। ओंकारेश्वर लिंग किसी मनुष्य के द्वारा गढ़ा, तराशा या बनाया हुआ नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक शिवलिंग है। ओंकारेश्वर लिंग के दर्शन करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है तथा उसे मोख प्राप्त होता है।PC:Bernard Gagnon

बड़ा गणेश जी का मंदिर

बड़ा गणेश जी का मंदिर

बड़ा गणपति जी का मंदिर मध्यप्रदेश राजधानी इंदौर में स्थित है। इस मंदिर की विशेषता है की यहां स्थापित श्री गणेश प्रतिमा को एशिया की सबसे बड़ी प्रतिमा माना जाता है। गणेश जी की बैठी मुद्रा की ऊंचाई 25 फुट है। प्रतिमा 4 फुट ऊंचे और 14 फुट चौड़ी चौकी पर विराजित है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है ।

भैरव शक्तिपीठ

भैरव शक्तिपीठ

भैरव शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के उज्जैन के निकट क्षीप्रा नदी तट पर वास्तविक स्थित हैं, जहां माता का उफध्र्व ओष्ठ ( ऊपरी होंठ ) गिरा है। यहां की शक्ति अवन्ती तथा भैरव लंबकर्ण हैं। देवी मां की मूर्ति हमेशा लाल कपड़े से ढकी रहती है एवं हर दिन प्रार्थना और अन्य अनुष्ठान नियमित होते हैं।

कन्दारिया महादेव मन्दिर

कन्दारिया महादेव मन्दिर

कन्दारिया महादेव मन्दिर मध्यप्रदेश के खुजराहो में स्थित है..इस मंदिर का निर्माण चन्देल वंश के शासको द्वारा कराया गया था। यह मंदिर अपनी नागर स्थापत्य शैली और कामुक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यहं के म्द्निर हिन्दू व जैन धर्म से सम्बन्धित है।PC:Arun.arunb

लक्ष्मी नारायण मंदिर,भोपाल

लक्ष्मी नारायण मंदिर,भोपाल

लक्ष्मीनारायण मंदिर भोपाल के मालवीय नगर क्षेत्र में, अरेरा पहाड़ियों के निकट बनी झील के दक्षिण में स्थित है। मंदिर में स्थापित भगवान श्रीहरि विष्णु एवं लक्ष्मी जी की मनोहारी प्रतिमाएँ बरबस ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकृष्ट कर रही हैं। इसके अलावा, मंदिर में भगवान शिव और देवी पार्वती का मंदिर भी स्थित है। इस मंदिर में प्रतिदिन भारी संख्‍या में भक्‍त दर्शन करने आते है। मंदिर पहुंचकर पूरे शहर के नजारे को देखा जा सकता है।

चिंतामण गणेश मंदिर

चिंतामण गणेश मंदिर

चिंतामण गणेश मंदिर, उज्जैन के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में भक्त मनोकामना पूरी करने के लिये उल्टा स्वस्ति चिह्न बनाते हैं। जब मनोकामना पूरी हो जाती है तो लोग मंदिर में आकर सीधा स्वस्ति चिह्न बनाते हैं।

देवास टेकरी

देवास टेकरी

देवास टेकरी पर स्थित माँ भवानी का यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। लोक मान्यता है कि यहाँ देवी माँ के दो स्वरूप अपनी जागृत अवस्था में हैं। इन दोनों स्वरूपों को छोटी माँ और बड़ी माँ के नाम से जाना जाता है। ब ड़ी माँ को तुलजा भवानी और छोटी माँ को चामुण्डा देवी का स्वरूप माना गया है।

वैष्णो धाम इंदौर

वैष्णो धाम इंदौर

वैष्णो धाम इंदौर स्थित वैशनी धाम एक जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर की तरह हुबहू है।जम्मू के वैष्णो धाम की तरह इस मंदिर में भी आपको गुफा के रास्ते में गर्भगृह तक पहुंचना होता है।गुफा के रास्ते में एक दो जगह गहरी खाइयाँ, तथा झरने भी बनाये गए हैं। घोर आश्चर्य, शहर के बीचोंबीच स्थित इस आश्चर्यजनक मंदिर में गुफा पार करने के दौरान करीब पंद्रह बीस मिनट के लिए आप किसी दूसरी ही दुनिया में पहुँच जाते हैं।गर्भगृह में जहाँ बिलकुल वैष्णोदेवी मंदिर की तर्ज़ पर माता जी तीन पाषाण की पिंडियों के रूप में विराजित हैं। ये तीनों पिंडियाँ वैष्णोदेवी मंदिर कटरा से यहाँ लाई गई हैं।

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