महाकुंभ मेले की कहानी, AI और वर्चुअल रिएलिटी (VR) की जुबानी!! 144 सालों बाद प्रयागराज में महाकुंभ मेले की शुरुआत हो चुकी है। आज महाकुंभ मेले का दूसरा दिन है और मकर संक्रांति के मौके पर अमृत स्नान करने के लिए लाखों-करोड़ों की तादाद में लोग देश और दुनिया के विभिन्न कोनों से प्रयागराज पहुंच रहे हैं। महाकुंभ मेला 26 फरवरी तक चलने वाला है, जिस दौरान 6 शाही होंगे।
लेकिन महाकुंभ मेले की शुरुआत कैसे हुई? महाकुंभ मेले का इतिहास क्या है? इन सारी बातों को अनुभव किजीए AI के जरिए। इसके बावजूद अगर आपके मन में कोई सवाल रह जाता है तो बेझिझक होकर वर्चुअल रिएलिटी के माध्यम से इसे पूछ डालिए नारद मुनि से। है न मजेदार...!
महाकुंभ मेला में डिजिटल अनुभूति केंद्र
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल महाकुंभ मेले को पूरी तरह से डिजिटल बना दिया है। मेले की निगरानी में जहां AI कैमरों की मदद ली जा रही है, वहीं मेला से संबंधित जानकारियों के लिए मोबाइल ऐप को AI की शक्ति दी गयी है। इसके साथ-साथ महाकुंभ मेला में डिजिटल अनुभूति केंद्र (Digital Experience Center) भी बनाया गया है, जहां AI के माध्यम से लोगों को महाकुंभ मेले के इतिहास, पौराणिक कथाओं आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी।
ऐसा पहली बार हो रहा है जब महाकुंभ मेला इतना हाईटेक बनाया गया हो। महाकुंभ मेला परिसर में लगभग 60,000 वर्गफीट के क्षेत्र में यह सेंटर बनाया गया है जहां देश के विभिन्न मंदिरों आदि का लकड़ी से बनाया हुआ मॉडल भी रखा गया है।
क्या है डिजिटल अनुभूति केंद्र (Digital Experience Center)?
डिजिटल अनुभूति केंद्र मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिमाग की ही उपज है, जिसे नोएडा के एक इवेंट मैनेजमेंट फार्म ने अमली जामा पहनाया है। ETV भारत से बात करते हुए इस बात की जानकारी इस फार्म के मालिक मोहित वर्मा ने दी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी महाकुंभ में आने वाले देसी तीर्थ यात्रियों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी भारत के इतिहास और इसकी संस्कृति से रू-ब-रू करवाना चाहते थे।
वर्मा ने सेंटर के बारे में बताया कि इस सेंटर में जो कुछ भी प्रदर्शित किया गया है, वह पूरी की पूरी कलाकृति मेला परिसर में ही लकड़ी और हैंडक्राफ्ट से बनाया गया है। पूरे सेंटर को बनाने का काम मात्र 21 दिनों में पूरा किया गया है। कलाकृतियों में न तो कुछ रेडीमेड खरीदा गया है और न ही बाहर मंगवाया गया है। सब कुछ यहीं बनाया गया है। पूरे डिजीटल अनुभूति केंद्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्चुअल रिएलिटी (VR), ऑग्मेंटेड रिएलिटी (AR), LED डिस्प्ले और होलोग्राम से सजाया गया है।
क्या-क्या मिलेगा अनुभव?
जैसे ही कोई व्यक्ति/तीर्थ यात्री डिजीटल अनुभूति केंद्र में प्रवेश करेगा, सबसे पहले उसे प्रोजेक्शन पर महाकुंभ मेले का ट्रेलर दिखाया जाएगा। इसके बाद लकड़ी की दीवार पर प्रोजेक्शन के माध्यम से समुद्र मंथन की कहानी को दिखाया जाएगा। आगे बढ़ने पर लोग यमुनोत्री ग्लेशियर को AI और VR के माध्यम से अनुभव कर सकेंगे। सबसे मजेदार बात यह होगी, कि जब भी कोई व्यक्ति अपनी हाथ इस प्रोजेक्शन के सामने हिलाएगा या लहराएगा, यमुना नदी में भी लहरे पैदा होने जैसी दिखाई देगी।
यहां प्रयाग महात्मम और त्रिवेणी संगम जैसी कहानियां भी दिखाई जाएंगी। अगर इन सारी कहानियों के बावजूद आपके मन में कोई जिज्ञासा रहती है या कोई सवाल पैदा होता है, तो लोग VR के माध्यम से सीधे नारद मुनि से संपर्क कर सकते हैं और उनसे अपने सवाल भी पूछ सकते हैं।
डिजिटल अनुभूति सेंटर का विवरण
कहां - यह डिजिटल सेंटर महाकुंभ मेला परिसर के सेक्टर 3 में बनाया गया है।
टिकट शुल्क - ₹50 प्रति व्यक्ति
शो का समय - सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक प्रतिदिन शो चलाया जा रहा है। सिर्फ दोपहर 2 से 3 बजे के बीच इसे बंद रखा जाता है।
कब से खुलेगा - डिजीटल अनुभूति केंद्र का उद्घाटन 9 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी द्वारा किया जा चुका है। बताया जाता है कि महाकुंभ मेले के शुरू होने से पहले ही हर दिन लगभग 3000-4000 दर्शक यहां आ रहे हैं। मेला शुरू होने के बाद दर्शकों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।



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