Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »Navratri Special! काशी में स्थित है माता कालरात्रि का मंदिर, वीरता और साहस की देवी कहलाती हैं मां

Navratri Special! काशी में स्थित है माता कालरात्रि का मंदिर, वीरता और साहस की देवी कहलाती हैं मां

काशी, पूरे विश्व में एक धार्मिक नगरी के नाम से पहचानी जाती है। ऐसे में यहां सभी देवी-देवताओं के मिलाकर कुल हजारों मंदिर है। आज भी आपको कई ऐसे मंदिर भी यहां पर मिल जाएंगे जिनके बारे में सिर्फ यहां के लोकल ही जानते हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ये कोई साधारण मंदिर है और यहां पर भक्त नहीं आते। इन मंदिरों में भक्तों की हमेशा भीड़ लगी रहती है। कुछ ऐसा ही है यहां का माता कालरात्रि का मंदिर। नवरात्रि के सप्तमी के दिन माता की पूजा की जाती है। ऐसे में आज के दिन माता के मंदिर भक्तों घंटों लाइन में खड़े रहकर माता का दर्शन प्राप्त करते हैं।

दर्शन मात्र से ही मिलती है भय से मुक्ति

माता कालरात्रि को वीरता और साहस की देवी कहा जाता है। कहा जाता है माता के दर्शन मात्र से ही भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है। ऐसे में नवरात्रि के दिन माता के मंदिर में सैकड़ों-हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जाती है। नवरात्रि के दिनों में मां का दिन होने के चलते सभी भक्त मां को प्रसाद के रूप में लाल चुनरी, सिंदूर और चूड़ी के साथ नारियल चढ़ाते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

mata kalratri

माता कालरात्रि मंदिर कहां है?

देश में माता कालरात्रि का मंदिर आपको देश के कई मंदिरों और स्थानों पर मिल जाएगा। लेकिन वाराणसी में मीरघाट के समीप कालिका गली में स्थित मां का मंदिर काफी प्रसिद्ध माना जाता है। कहा जाता है माता के मंदिर जो भी भक्त शीष झुकाता है और उनसे जो भी कुछ मांगता है, मां उसे जरूर पूरा करती हैं। चार भुजाओं वाली माता का स्वरूप दिखने में जितना विकराल लगता है, असल में उतना है नहीं। माता काफी सौम्य स्वभाव की है और उनके दर्शन मात्र से ही सभी नकारात्मक शक्तियां दूर चली जाती है।

mata kalratri

माता कालरात्रि मंदिर की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान शंकर ने माता पार्वती से मजाक करते हुए कहा कि देवी आप सांवली लग रही हैं और इस पर माता नाराज होकर काशी के इसी प्रांगण में चली आईं और सैकड़ों वर्षों तक कठोर तपस्या की। इसके बाद फिर माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ इस पवित्र स्थान पर आकर माता से बोले कि चलिए देवी आप गोरी हो गई और माता को साथ कैलाश ले गए थे। मंदिर प्रांगण में आपको केदारेश्वर का शिवलिंग भी है। मंदिर में दो शेरों की मूर्तियां भी है, इनमें से एक चलने वाला और दूसरा उड़ने वाला है।

mata kalratri

शारदीय नवरात्रि में माता की होती है विशेष पूजा

नवरात्रि के सप्तमी वाले दिन माता की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन भोर (सुबह 03:30 बजे) में ही माता की विशेष श्रृंगार कर मंगला आरती की जाती है और फिर भक्तों के लिए मंदिर का कपाट खोल दिया जाता है। कहा जाता है कि माता लाल चुनरी और लाल रेशम की साड़ी काफी पसंद है। इसी माता को चढ़ावे के रूप में चुनरी के साथ-साथ साड़ी भी चढ़ाई जाती है। इसके अलावा माता को लाल पेड़ा या गुलाब जामुन भी चढ़ाया जाता है।

मंदिर में प्रवेश करने का समय

भक्तों के दर्शन करने के लिए माता का मंदिर सुबह 06:00 बजे के रात के 10:00 बजे तक खुला रहता है। वहीं, दोपहर 12:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक परिसर बंद रहता है। लेकिन नवरात्रि के दिनों में मंदिर को सुबह 04:30 या 05:00 बजे तक खोल दिया जाता है और दिनभर खुला रहता है।

माता कालरात्रि मंदिर कैसे पहुंचें

नजदीकी एयरपोर्ट - वाराणसी एयरपोर्ट (30 किमी.)
नजदीकी रेलवे स्टेशन - वाराणसी कैंट जंक्शन (9 किमी.) या बनारस रेलवे स्टेशन (8 किमी.)
नजदीकी बस स्टेशन - वाराणसी कैंट (9 किमी.)

More News

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+