मेरठ से दिल्ली के बीच नमो भारत ट्रेन की शुरुआत होने के बाद अब मेरठ में मेट्रो सेवा को शुरू करने की तैयारियों में तेजी लायी गयी है। मेरठ में मेट्रो का परिचालन NCRTC द्वारा किया जाएगा। मेरठ मेट्रो का संचालन 23 किमी के क्षेत्र में किया जाएगा। पिछले दिनों NCRTC के एमडी शलभ गोयल ने RRTS के दुहाई डिपो में मेरठ मेट्रो ट्रेन के कोच से पर्दा उठाया। मेरठ मेट्रो के सामने आते ही दिल्ली मेट्रो और मेरठ मेट्रो के बीच तुलनाएं की जाने लगी हैं।
अभी तक दिल्ली मेट्रो के कोच को भारत में सबसे आधुनिक माना जाता था लेकिन अब दावा किया जा रहा है कि मेरठ मेट्रो के कोच उससे भी ज्यादा स्मार्ट होंगे।

मेरठ मेट्रो का संचालन कब से शुरू होगा? मेरठ मेट्रो के स्टेशन कौन-कौन होंगे? मेरठ मेट्रो की खासियतें क्या होगीं और मेरठ मेट्रो या फिर नमो भारत ट्रेन में से कौन बेहतर होगा? सवाल कई हैं, जो इस समय लोगों के दिमाग में घूम रहे हैं। चलिए इनका जवाब ढ़ूंढने की कोशिश करते हैं -
मेरठ मेट्रो का प्रोजेक्ट क्या है?
सबसे पहले आपको बता दें कि मेरठ मेट्रो का प्रोजेक्ट क्या होगा? केंद्र सरकार के सहयोग से मेरठ में 23 किमी लंबा मेट्रो कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इस कॉरिडोर पर कुल 13 स्टेशन होंगे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मेरठ मेट्रो का 18 किमी लंबा कॉरिडोर एलिवेटेड यानी जमीन के ऊपर होगा। 18 किमी लंबे कॉरिडोर में 9 स्टेशन होंगे। वहीं बाकी का 5 किमी कॉरिडोर भूमिगत होगा, जिसमें 3 स्टेशन होंगे।
ट्रेन को पार्क करने के लिए एक मेंटेनेंस डिपो भी बनाया जाएगा। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार 18 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर में से मेरठ साउथ से मोदीपुरम स्टेशन तक का वायडक्ट का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं भूमिगत सुरंग का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा होने ही वाला है। दावा किया जाता है कि मेरठ मेट्रो के शुरू हो जाने के बाद उत्तर से दक्षिण तक की दूरी को तय करने में महज 30 मिनट का समय लगेगा।

मेरठ मेट्रो के स्टेशन कौन-कौन होंगे?
- मेरठ साउथ (एलिवेटेड)
- परतापुर (एलिवेटेड)
- रिठानी (एलिवेटेड)
- शताब्दी नगर (एलिवेटेड)
- ब्रह्मपुरी (एलिवेटेड)
- मेरठ सेंट्रल (भूमिगत)
- भैसाली (भूमिगत)
- बेगमपुल (भूमिगत)
- एमईएस कॉलोनी (एलिवेटेड)
- दौरली (एलिवेटेड)
- मेरठ नॉर्थ (एलिवेटेड)
- मोदीपुर (एलिवेटेड)
- मोदीपुरम डिपो (धरातल)
जहां रुकेगी मेट्रो और नमो भारत ट्रेन
- मेरठ साउथ
- शताब्दी नगर
- बेगमपुल
- मोदीपुरम स्टेशन

कब से शुरू होगी मेरठ मेट्रो?
मेरठ मेट्रो के सभी स्टेशनों ने आकार लेना शुरू हो चुका है। कई स्टेशनों का निर्माण कार्य तो अपने अंतिम चरण में है। वहीं दुहाई डिपो में मेट्रो की टेस्टिंग का काम भी किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 23 किमी लंबे मेरठ मेट्रो का निर्माण पूरा होकर इसके शुरू होने की संभावना दिसंबर 2024 तक जतायी जा रही है।
हालांकि सभी सुरक्षात्मक जांच और ट्रायल रन भी किये जाएंगे। संभावना है कि जून 2025 तक मेरठ में यात्रियों के लिए मेट्रो का संचालन शुरू किया जा सकता है। बात अगर किराए की करें तो NCRTC ने इस बारे में अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है। बताया जाता है कि अभी इस बारे में मंथन चल रहा है और टिकटों का दाम निर्धारित नहीं किया गया है।
कैसा होगा मेरठ मेट्रो का कोच और इसकी विशेषताएं?
- मेरठ मेट्रो के कोच का बाहरी हिस्सा फ्लोरोसेंट हरे, नीले और नारंगी का है।
- मेरठ मेट्रो में कुल 3 कोच होंगे। हर कोच में 173 यात्री बैठ सकेंगे और तीनों कोच मिलाकर कुल 700 यात्री (बैठकर और खड़े होकर) एक बार में सफर कर सकेंगे।
- महिला और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीटें आरक्षित रहेंगी।
- यात्रियों की सुविधा और आराम को प्राथमिकता देते हुए वातानुकूलित कोच में लगेज रैक, ग्रैब हैंडल, यूएसबी मोबाइल चार्जिंग की सुविधा, डायनामिक रूट मैप, सीसीटीवी कैमरे आदि लगाए गये हैं।
- मेरठ मेट्रो के सभी स्टेशनों पर प्लेटफार्म स्क्रीन डोर होगा।
- ट्रेन में इमरजेंसी कम्यूनिकेशन सिस्टम, टॉक-बैक, अग्निशमन यंत्र, अलार्म आदि होंगे।
- मेरठ मेट्रो को 135 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने के लिए डिजाइन किया गया है लेकिन इसकी रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा होगी।
- दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर की सुविधा मेट्रो में उपलब्ध रहेगी।
- मेट्रो में स्वचालित ट्रेन सुरक्षा और स्वचालित ट्रेन संचालन की सुविधा होगी।
- मरीजों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर ले जाने की व्यवस्था भी होगी।
दिल्ली और मेरठ मेट्रो में क्या अंतर?
| दिल्ली मेट्रो | मेरठ मेट्रो |
| अधिकतम स्पीड 90 किमी प्रति घंटा | अधिकतम स्पीड 135 किमी प्रति घंटा |
| सीट पर कुशन नहीं लगे | कुशन वाली सीट |
| सभी दरवाजे एक साथ खुलते और बंद होते | बटन दबाने पर दरवाजे खुलेंगे और बंद होंगे |
| सामान रखने का रैक नहीं | सामान रखने का रैक |
| चार्जिंग प्वाएंट कम | अधिक चार्जिंग प्वाएंट |
| स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की जगह नहीं | स्ट्रेचर या व्हीलचेयर ले जाने की सुविधा |
| कम यात्रियों के लिए जगह | अधिक यात्रियों के लिए जगह |



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