दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर या फिर कोलकाता...हर शहर में सुबह से लेकर रात तक की तस्वीर एक जैसी ही होती है। सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम, गाड़ियों की भीड़ को नियंत्रित करते ट्रैफिक गार्ड, सिग्नल की लाल और हरी बत्ती और इसके साथ ही गाड़ियों का इतना तेज हॉर्न कि मानों कान के पर्दे फाड़कर ही दम लेंगी। लेकिन इन सबसे पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में राजधानी आइजोल की सुबह बिल्कुल अलग होती है।

यहां गाड़ियां हॉर्न बजाती ही नहीं हैं। ऐसा लगता है जैसे आइजोल की सभी गाड़ियों हॉर्न निकाल ही दिया गया है। इसी वजह से तो यह भारत का एकमात्र Silent City है। खास बात है कि यहां आपको न तो गाड़ियों को नियंत्रित करता कोई ट्रैफिक गार्ड दिखेगा और न ही ट्रैफिक सिग्नल है।
आइजोल एक शानदार पर्यटन स्थल भी है। लेकिन यहां घूमने आने वाले लोग इस शहर में घूमने की शानदार जगहों के बजाए घंटों सड़क के किनारे खड़े होकर बस यह निहारना पसंद करते हैं कि कितनी अच्छी तरह से लोग यहां ट्रैफिक के हर नियम का खुद से पालन करते हैं। दिन के सबसे व्यस्त समय में भी राजधानी आइजोल में जाम की समस्या नहीं खड़ी होती है।
दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर में जहां लोगों की आधी जिन्दगी तो जाम में ही बीत जाती है। इस वजह से छुट्टियों के दिन लोग घूमने निकलने का प्लान बनाने से भी डरते हैं, क्योंकि सप्ताह के 6 दिन वह ट्रैफिक जाम को झेल चुके होते हैं। लेकिन आइजोल...इनसे बिल्कुल अलग है।
सड़कों पर इन नियमों का पालन करना आइजोल में आम बात है :-

- हर वाहन का ड्राईवर या राइडर अपनी लेन को मेंटेन करता है।
- एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में नहीं की जाती है ओवरटेकिंग।
- जाम के कारण गुस्से में कोई किसी से सड़क पर लड़ने-झगड़ने में न तो अपना समय बर्बाद करता है और ना ही जाम को और बढ़ाता है।
- हर किसी के साथ अनुशासन और शिष्टता के साथ पेश आया जाता है।
- सबसे महत्वपूर्ण बात कि आइजोल में कोई भी ट्रैफिक लेन को तोड़कर गाड़ियां ना तो इधर-उधर मोड़ने की कोशिश करता है और ना ही किसी और का लेन खाली देखकर वहां अपनी गाड़ियां घुसा देता है।
और ये सब पिक आवर के दौरान भी होता है।
कैसे नियंत्रित होता है आइजोल का ट्रैफिक :-

आइजोल में सड़के ज्यादा चौड़ी नहीं बल्कि पतली ही होती हैं। राइट (दायां) और लेफ्ट (बायां) लेन के बीच में कोई डिवाइडर नहीं होती है। दोनों तरफ गाड़ियों की आवाजाही के लिए अनदेखी दिवार बनी होती है, जिसका पालन हर कोई करता है। कहीं-कहीं दोनों लेन के बीच सफेद रंग की एक पट्टी नजर आती है। यहां सड़कों पर चारपहिया और दोपहिया वाहनों के लिए भी अलग-अलग लेन बने होते हैं।
हर कोई सिर्फ अपनी लेन में ही गाड़ी चलाता है। अगर राइट लेन खाली भी हो, तब भी लेफ्ट लेन वाली गाड़ियां राइट लेन में नहीं घुसती है। वो राइट लेन से आने वाली गाड़ियों के लिए रास्ता खाली ही रखती हैं। सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक के नियमों का यहां प्रत्येक व्यक्ति खुद और बड़ी ही सख्ती के साथ पालन करता है।
नोट :- अगर किसी को वास्तव में बहुत जल्दी है आगे बढ़ने की तो वो तेज रफ्तार से अपनी गाड़ी नहीं भगाता है और न ही सामने वाली गाड़ी को लंबी-लंबी हॉर्न पर हॉर्न देता रहता है। ऐसी स्थिति में आगे वाली गाड़ी को हल्का सा 'बिप' देकर ही आइजोल में काम बन जाता है। अगर आगे का रास्ता खाली होगा तो सामने वाली गाड़ी जरूर पास दे देगी।
चलिए अब आपको बताते हैं कि आइजोल में देखने लायक क्या-क्या मुख्य जगहें हैं!
रिएक पीक :- इस जगह से लगभग आधा आइजोल शहर साफ नजर आता है। पीक पर मौसम बड़ा सुहाना होता है और यहां से चारों तरफ का नजारा बहुत सुन्दर दिखता है। अगर आपको हल्के-फुल्के ट्रेकिंग का शौक है तो पीक तक पहुंचने में आप अपना वह शौक भी पूरा कर सकते हैं।

सोलोमन मंदिर :- यह मंदिर पूरी तरह से संगमरमर से बना हुआ है। इस मंदिर के चारों पर पहाड़ की चोटियां हैं जो इस जगह को और भी खुबसूरत बना देती है। इस मंदिर को आइजोल का सबसे बड़ा मंदिर है।
मिजोरम स्टेट म्यूजियम :- मिजोरम और आइजोल घूमने गये हैं तो उसके इतिहास से परिचित होना भी तो जरूरी है। इसलिए कुछ देर का समय निकाल कर मिजोरम स्टेट म्यूजियम में जरूर जाएं। यहां आपको आइजोल की समृद्ध संस्कृति और युद्ध में शहीद जवानों के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी।
रुंग्डिल लेक :- मिजोरम की 4 प्रमुख लेक में से एक है रुंग्डिल लेक। यह लेक आइजोल शहर से थोड़ी दूर पर ही मौजूद है। आइजोल में यह एक मस्ट वीजिट टूरिस्ट स्पॉट है। झील के चारों तरफ सदाबहार पेड़-पौधे हैं, जो इसकी सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं। इस लेक में आप नाव में भी घूम सकते हैं।



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