मुगल हरम में रहने वाली महिलाएं सिर्फ अपने नाजो-नखरों, साज-श्रृंगार और अदाओं से बादशाहों को लुभाने या उनका मनोरंजन करने वाली महिलाएं ही नहीं होती थी। बल्कि हरम में रहने वाली महिलाएं बड़ी अच्छी जासूस भी हुआ करती थी। उनकी जासूसी से राज्य और प्रशासन के कामों में काफी मदद भी मिलती थी। समय-समय पर हरम में रहने वाली महिलाएं जासूसी का काम कर कई गोपनीय बातें सम्राट तक पहुंचाती थी।

हरम में रहने वाली इन महिलाओं की जासूसी की वजह से ही कभी बादशाहों का ताज सलामत रहता तो कई बार हरम में रहने वाली इन्हीं महिलाओं की जासूसी के कारण बादशाहों का तख्तापलट भी हो गया था। इन महिलाओं का राजप्रसाद तक निर्विरोध पहुंच था। ये सम्राटों के साथ लगभग हर राजकीय यात्राओं में हिस्सा तो लेती थी। 1539 ई. में चौसा के युद्ध में हुमायूं के हरम की कई महिलाओं ने सिर्फ भाग ही नहीं लिया था, बल्कि वे मारी भी गयी थी। हरम की महिलाएं सिर्फ जासूसी ही नहीं बल्कि कई महिलाएं तो सटिक भविष्यवाणी भी करती थी।
इन महिलाओं की भविष्यवाणी की वजह से सम्राट को कई परिस्थितियों को सुलझाने में भी मदद मिलती थी। मुगल बादशाह शाहजहाँ के हरम में उसकी दो बेटियां भी थी। इनमें से एक बेटी जहां शाहजहाँ को सलामत रखने के लिए ही जासूसी करती थी, तो वहीं दूसरी बेटी की जासूसी की वजह से ही शाहजहाँ का तख्तापलट हुआ और उसे अपनी बाकी की पूरी जिन्दगी जेल में बितानी पड़ी।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में डॉ. हितेंद्र प्रताप सिंह के सानिध्य में शोध करने वाले इतिहास के स्कॉलर मितेंद्र यादव ने मुगल हरम की जासूस महिलाओं और शाहजहाँ की दोनों बेटियों के बारे में कुछ यूं लिखा है :-
बाबर से लेकर हुमायूं तक को जासूस महिलाओं से मिली मदद
बाबर के शासन काल में उसकी दादी इहसान दौलत बेगम ने जासूसी के कई महत्वपूर्ण कारनामे किये थे। बाबर के एक अधिकारी हसन ने जब षड्यंत्र कर उसे अपदस्थ करना चाहा तो इसका पता उसकी दादी को चल गया। उसने तुरंत अन्य उच्चाधिकारियों से मिलकर हसन का मुकाबला किया और सभी षड्यंत्रकारियों को बंदी बना लिया। इसके अलावा बाबर की मां कुतलुग निगार खानम और उसकी पत्नी माहिम बेगम भी जासूसी के क्षेत्र में माहिर थी। बाबर के साथ सभी युद्धों में उसकी मां जरूर जाती थी।
वहीं उसकी पत्नी जो सुल्तान हसन की रिश्तेदार थी, उसने बदख्शाँ और ट्रासऑक्सियाना की यात्राओं में बाबर का साथ दिया था। उसी तरह हरम की एक अन्य महिला आगा-ए-सर्वकद, जो बाबर से लेकर अकबर तक के दरबारे-हरम का हिस्सा रही हैं, का भी उल्लेख मिलता है। हुमायूं के शासनकाल में बाबर की सबसे बड़ी बहन खानजादा बेगम की जासूसी का उल्लेखनीय योगदान मिलता है।

अकबर की धाय माँ माहम अनगा थी बड़ी जासूस
अकबर को उसके अपने राजप्रतिनिधि बैगम खाँ से छुटकारा दिलवाना हो या माहम अनगा के अपने बेटे अधम खाँ से लूट का सामान व हरम की दो सुन्दरियों को प्राप्त करना, इन सभी कार्यों में माहम अनगा का प्रमुख योगदान था। अकबर पर माहम अनगा का काफी अधिक प्रभाव था। अकबर के बाद जहाँहीर के शासनकाल में हरम की प्रमुख जासूस महिला उसकी पत्नी नूरजहाँ बेगम थी। नूरजहाँ में राजनीतिक सुझबुझ के साथ-साथ वह काफी अच्छी दूरदर्शी भी थी। जहाँगीर को उसने जिस प्रकार महावत खाँ के चुंगल से मुक्त करवाया था, वह काबिलेतारीफ था।
क्या आपको पता है हुमायूँ से लेकर अकबर और जहाँगीर तक ने सप्ताह में कुछ दिनों के लिए माँसाहार बंद कर दिया था। इनमें से एक बादशाह तो ऐसा था, जिसने बृहस्पतिवार को ही माँस खाना बंद किया था। कौन था वह बादशाह? यह जानने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लीक कर जरूर पढ़े नेटिव प्लैनेट का यह आर्टिकल :-
शाहजहाँ और उसकी दो जासूस बेटियाँ

शाहजहाँ के शासनकाल में उसकी बेटी जहाँआरा बेगम ने खुफिया क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। हरम में रहने वाली सभी महिलाएं उसका काफी सम्मान भी किया करती थी। जहाँआरा बेगम गोपनीय तरीके से पत्राचार कर राजकीय विवादों को सुलझाने में भी अपनी प्रमुख भूमिका निभाती थी। राजमहल में आने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों पर जासूसी करके पहले खुद सुनिश्चित होने के बाद ही जहाँआरा उन्हें बादशाह शाहजहाँ से मिलने की इजाजत देती थी। लेकिन शाहजहाँ की दूसरी पुत्री रोशनआरा की कुशल जासूसी की वजह से ही शाहजहाँ के हाथों से सत्ता की बागडोर छिन गयी।
दरअसल, रोशनआरा हरम पर अपनी पैनी नजर रखती थी और राजमहल में होने वाली हर गतिविधि की खबर अपने भाई औरंगजेब तक पहुंचाती थी। इस वजह से ही अपने पिता शाहजहाँ के बीमार पड़ने के बाद औरंगजेब सत्ता की लड़ाई जीतने में कामयाब रहा। पिता शाहजहाँ को उनकी बाकी की पूरी जिन्दगी जेल में बिताने के लिए भेजकर औरंगजेब ने दिल्ली की गद्दी संभाल ली। इसके बाद उसने रोशनआरा बेगम को 'पादशाह बेगम' की उपाधि और 5 लाख रुपए उपहार में भी दिये थे।
हमें पूरी उम्मीद है कि शोधपत्र के आधार पर लिखे गये इस आर्टिकल में मुगल शासनकाल में महिलाओं की जासूसी और सत्ता में उनके योगदान के बारे में पढ़कर अब तक आपको हरम में रहने वाली महिलाओं का महत्व जरूर समझ में आ गया होगा। मुगल हरम में रहने वाली महिलाएं सिर्फ बादशाह और शहजादों की खिदमतगार ही नहीं होती थी, बल्कि उनके द्वारा दिये गये गुप्त संदेशों के आधार पर ही मुगल शासक अपने साम्राज्य पर शासन किया करते थे। यहां तक की वे अपना तख्तो-ताज भी बचाकर रखा करते थे। मुगल शहजादी रोशनआरा की जासूसी का ही नतीजा था कि बादशाह शाहजहाँ को अपने ताज से हाथ धोना पड़ा था। हम आपको अगली बार मुगल हरम में सटिक भविष्यवाणी करने वाली महिलाओं के बारे में बताएंगे।



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