
भारत में धार्मिक मान्यताओं को काफी तवज्जों दिया जाता है। ऐसे में देश के लोग भी देवी-देवताओं के पूजा-पाठ से कभी पीछे नहीं हटते। आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत भी हो रही है तो पहला दिन होने के चलते आज के दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता के मंदिर की बात की जाए तो काफी कम ही ऐसे स्थान आपको मिलेंगे, जहां माता के दर्शन आपको मिल सकें। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे स्थान के बारे में जहां जाकर आप माता के दर्शन भी कर सकेंगे और आसपास दर्शन करने के लिए आपको कई सारे मंदिर भी मिल जाएंगे।
दरअसल, हम बात कर रहे हैं शिव नगरी 'काशी' की, जहां के अलईपुर क्षेत्र में माता शैलपुत्री का मंदिर स्थित है। नवरात्रि के दिनों में माता के दरबार में भक्तों की काफी भीड़ देखी जाती है। कहा जाता है कि नवरात्रि में पहले दिन माता के दर्शन करने से भक्तों को विवाह संबंधी परेशानियों से भी मुक्ति मिलती है और भक्तों की मन्नतें भी पूरी हो जाती है। ऐसे में अगर आप भी इन दिनों वाराणसी में हैं तो आप भी एक बार माता के दर्शन जरूर कर आएं।

माता शैलपुत्री मंदिर का इतिहास
इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि जब माता पार्वती ने हिमवान की पुत्री के रुप में जन्म लिया था तो वे शैलपुत्री कहलाई थीं। मंदिर को लेकर एक और किवदंती है कि एक बार माता भगवान शिव से नाराज होकर कैलाश से काशी आ गई थीं और जब भगवान भोलेनाथ उन्हें मनाने के लिए काशी आए तब माता ने कहा कि उन्हें यह स्थान काफी अच्छा लग रहा है और यह कहकर माता यही रूक गई, जो आज तक अपने भक्तों को दर्शन देती आ रही हैं और मुरादें भी पूरी करती आ रही हैं।
माता शैलपुत्री मंदिर का आकर्षण
इस मंदिर में प्रवेश करते ही आपको एक अलग ही अनुभूति होगी, जो शायद आपने कभी ना की हो। माता का मंदिर भी काफी सुंदर है। इस मंदिर में माता की दिन बार आरती की जाती है। इसके साथ ही माता को चढ़ावे के रूप में चुनरी और नारियल चढ़ाया जाता है। माता का वाहन वृषभ होने के कारण मां वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं।
कैसे पहुंचें माता शैलपुत्री मंदिर
नजदीकी एयरपोर्ट - वाराणसी एयरपोर्ट (30 किमी.)
नजदीकी रेलवे स्टेशन - वाराणसी जंक्शन (7 किमी.)
सड़क मार्ग - नेशनल हाईवे - 19 और तमाम बड़े शहरों से वाराणसी के लिए बस सेवाएं भी चलती है।



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