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नये संसद भवन के 6 द्वारों पर पहरा देते हैं ये जीव, जानिए क्यों बनाया गया है इन्हें भवन का पहरेदार

19 सितंबर 2023, यह दिन भारत के लिए काफी ऐतिहासिक रहा। संसद के विशेष के दूसरे दिन, मंगलवार को संसद भवन को नये भवन में शिफ्ट कर दिया गया। लगभग 65,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बना भारत का नया संसद भवन बाहर से दिखने में जितना ही भव्य है, इसे अंदर से भी काफी सोच-समझकर ही डिजाइन किया गया है। नये संसद भवन के हर एक कोने, दिवारों और दरवाजों को सजाने के लिए कहीं पौराणिक मान्यताओं तो कहीं भारतीय समृद्ध संस्कृति का सहारा लिया गया है।

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संसद भवन को इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि इसकी आयु कम से कम 150 साल हो। भुकंप के झटकों या तेज आंधी-तूफान भी इसका कुछ ना बिगाड़ सकें।

अब तक भारत के संसद भवन का नाम लेते ही मध्य प्रदेश में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर के तर्ज पर बने गोलाकार संसद की तस्वीर ही याद आती थी। आजादी के समय भी इस संसद भवन में कई ऐतिहासिक घटनाएं घटी थी। इसी भवन में बहरी हो चुकी अंग्रेजी हुकूमत के कान खोलने के लिए भगत सिंह ने बम फोड़े थे, क्योंकि भारत की आजादी के दीवाने भगत सिंह का मानना था कि जो सरकार आम जनता की आवाजें नहीं सुन सकती हैं, वह बहरी हो चुकी है।

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भारत के नये संसद भवन के बारे में अगर आप विस्तार से जानना चाहते हैं तो NativePlanet का यह आर्टिकल जरूर पढ़ें।

अब हम आपको भारत की नयी संसद भवन के विषय में एक दिलचस्प जानकारी देते हैं। भारत के नये संसद भवन में 6 द्वार हैं और प्रत्येक द्वार पर एक जीव को बतौर पहरेदार तैनात किया गया है। कौन से हैं वो जीव और क्यों उन्हें बतौर पहरेदार तैनात किया गया!

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1. गज द्वार :- हाथी को काफी बुद्धिमान प्राणी माना जाता है। इसलिए संसद के इस द्वार का नाम हाथी के नाम पर ही रखा गया है जो बुद्धि, स्मृति, धन और बुद्धिमत्ता का प्रतिक है। यह द्वार भवन के उत्तर की ओर है। वास्तु शास्त्र के अनुसार भी उत्तर दिशा का संबंध बुध से है जिसे बुद्धि का स्रोत माना जाता है।

2. अश्व द्वार :- अश्व यानी घोड़ा को साहस और बल का प्रतीक माना जाता है। इस बात का जिक्र ऋग्वेद में भी किया गया है। यह द्वार भारत की मजबूत लोकतांत्रिक जड़ों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।

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3. गरुड़ द्वार :- गरुड़ को भगवान विष्णु की सवारी माना जाता है। पक्षीराज गरुड़ को शक्ति, धर्म और कर्तव्य का प्रतिक माना जाता है। इसी वजह से कई देशों के प्रतीक चिन्ह के तौर पर गरुड़ का उपयोग किया गया है। नये संसद भवन का पूर्वी द्वार गरुड़ द्वार है।

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4. मकर द्वार :- नये संसद भवन का वह द्वार जो पुराने संसद भवन की तरफ है, उसे मकर द्वार कहा जाता है। मकर एक पौराणिक समुद्री जीव है, जो आधा स्तनपायी पशु और आधी मछली होता है। इस जीव को रक्षक माना जाता है जिसे हिंदू और बौद्ध स्मारकों में काफी देखा जाता है।

5. शार्दुला द्वार :- यह एक ऐसा प्राणी है, जिसका शरीर शेर का और सिर घोड़ा, हाथी या फिर तोते का होता है। नये संसद भवन में शार्दुला को बतौर शक्ति का प्रतीक रखा गया है। इसे सबसे शक्तिशाली और जीवित सभी प्राणियों में अग्रणी माना जाता है।

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6. हम्सा द्वार :- देवी सरस्वती का वाहन हंस होता है, जिसे संस्कृत में हम्सः कहा जाता है। हंस उड़ान व मोक्ष का प्रतीक है। यह जन्म-मृत्यु के चक्र से आत्मा की मुक्ति को दर्शाता है। नये संसद भवन के द्वार पर हम्सा की मूर्ति को भी ज्ञान और आत्म-साक्षरता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया है।

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