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ओडिशा में मिलेगा दुर्लभ काले बाघों को देखने का मौका, दुनिया में और कहीं नहीं मिलते हैं ये बाघ

ओडिशा में घूमने जाने वाले पर्यटकों को अब कुछ ऐसा अनुभव होने वाला है जो उन्हें दुनिया में और कहीं भी नहीं मिलेगा। ओडिशा सरकार ने हाल ही में दुर्लभ काले बाघों की सफारी का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि इन शानदार जीवों को जंगलों में उनके प्राकृतिक आवास में घूमते हुए देख सकेंगे जो दुनिया भर में सिर्फ ओडिशा में ही पाए जाते हैं।

melanic tiger

इन काले बाघों को Malenistic Tiger कहा जाता है जिनके शरीर पर सुनहरे और काले रंग की धारियों के स्थान पर गहरे काले रंग की धारियां पायी जाती हैं।

दुनियाभर में मैलेनिस्टिक टाइगर सिर्फ ओडिशा के सिमलिपाल टाइगर रिजर्व में ही पाए जाते हैं। उम्मीद जतायी जा रही है कि ओडिशा सरकार के इस कदम से निश्चित रूप से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी तादाद में वन्यजीव प्रेमी इन दुर्लभ (बड़ी) बिल्लियों को देखने ओडिशा का रुख करेंगे। साल 2007 में आधिकारिक रूप से पुष्टि हुई थी कि ओडिशा के इस क्षेत्र में ये काले बाघ पाए जाते हैं।

अगर यह सफारी शुरू हो जाती है तो यह दुनिया का एकलौता मैलेनेस्टिक टाइगर सफारी होगा। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने X (पूर्व के ट्वीटर) पर किये गये एक पोस्ट में दुनिया के पहले मैलेनेस्टिक टाइगर सफारी की शुरुआत सिमलिपाल टाइगर रिजर्व, मयूरभंज में शुरू करने की योजना की घोषणा की। मयूरभंज का यह हिस्सा विशेष रूप से काली धारियों वाले बाघों का प्राकृतिक निवास स्थान है, जो दुनिया में एकमात्र है।

rare black tiger

कहां होगी सफारी

जिस क्षेत्र को दुर्लभ काले बाघों की सफारी के लिए विकसित किया जा रहा है, वह जगह बरीपदा के पास और सिमलिपाल टाइगर रिजर्व से करीब 15 किमी की दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र लगभग 200 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला है। इनमें से 100 हेक्टेयर का क्षेत्र बाघों के प्रदर्शन के लिए समर्पित होगा और बाकी के 100 हेक्टेयर के क्षेत्र का इस्तेमाल पशुओं की चिकित्सा, उनकी देखभार, कर्मचारियों के बुनियादी ढांचों का निर्माण, आने वाले मेहमानों के लिए सुविधाएं व अन्य चीजों के लिए समर्पित होगा।

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ओडिशा की शोभा में चार चांद लगाने वाले इस शानदार पशु (काले बाघ) को संरक्षित और उन्हें प्रदर्शित करना है। इसके साथ ही इस परियोजना का एक उद्देश्य दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और इससे संबंधित सभी आवश्यकताओं के बारे में आम लोगों को जानकारी देना है। बता दें, यह परियोजना वर्तमान में संबंधित अधिकारी से वैधानिक मंजूरी, राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा साइट का अध्ययन और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमोदन के लिए लंबित है।

ओडिशा का सिमलिपाल टाइगर रिजर्व करीब 2750 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है जो जैव विविधता का शानदार उदाहरण है। इससे होकर 12 नदियां बहती हैं। रिजर्व में 50 से अधिक स्तनपायी जानवर, 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी और 60 से अधिक प्रजातियों के सरीसृप पाये जाते हैं। काले बाघों की सफारी का शुरू होना निश्चित रूप से वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में ओडिशा के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली है। इसके शुरू होते ही सिमलिपाल वन्यजीव अभारण्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि होने की पूरी संभावना है।

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