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समय के साथ कैसे बदली गुलाबी नगरी, देखे तस्वीरों में

उत्तर भारत से सटा हुआ और पश्चिमी भारत का हिस्सा राजस्थान भारत के समर्द्ध इतिहास का गवाह है, जिसे लोग सिर्फ देखने ही बल्कि जानने और समझने भी आते हैं।

By Goldi

उत्तर भारत से सटा हुआ और पश्चिमी भारत का हिस्सा राजस्थान भारत के समर्द्ध इतिहास का गवाह है, जिसे लोग सिर्फ देखने ही बल्कि जानने और समझने भी आते हैं। सम्पूर्ण राजस्थान में फैले खूबसूरत किले और महल अपनी एक अलग ही कहानी बयाँ करते हैं, जो सिर्फ इतिहासकारों की नहीं बल्कि हर वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करती है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर, जो आज लोगों के बीच गुलाबी नगरी के नाम से विखाय्त है, इस खूबसूरत से नगर को इस खूबसूरत शहर को अम्‍बेर के राजा महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बंगाल के एक वास्‍तुकार विद्याधर भट्टाचार्य की मदद से बनाया गया था। यह भारत का पहला शहर है जिसे वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार बनाया गया था। यह जगह हिंदू वास्‍तुकला का एक शानदार उदाहरण है, जो पिथापड़ा रूप यानि आठ भागों के मंडल में बना हुआ है। राजा सवाई सिंह माधों, खगोलविज्ञान के बारे में जानकारी रखते थे और इसी कारण उन्‍होने 9 के अंक को ज्‍यादा महत्‍व दिया और शहर के निर्माण में 9 का ध्‍यान रखा। यह 9 अंक, 9 ग्रहों के प्रतीक होते है।

जयपुर कैसे बना गुलाबी नगरी, कुछ ये है कहानी?
वर्ष 1818 में जयपुर ने ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि की। जैसे ही शहर में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने दस्तक दी, इस शहर आधुनिकीकरण का दौर भी शुरू हो गया। जयसिंह और उनके उत्तराधिकारियों का जयपुर सफेद और पीले रंग का हुआ करता था, सवाई रामसिंह ने इसे गुलाबी बनाया। जयपुर के आधुनिकीकरण का सारा श्रेय रामसिंह को जाता है, उन्होंने शहर में आधुनिक संस्थाएं स्थापित कीं, जिनके कारण जयपुर प्रगतिशील रियासतों में माना जाने लगा।गुलाबी नगरी में जल प्रदाय व्यवस्था, गैस की रोशनी, पक्की सड़कें, मेयो अस्पताल, रामनिवास जैसा विशाल सार्वजनिक उद्यान, रामप्रकाश थियेटर और अल्बर्ट हॉल की शानदार इमारत सवाई रामसिंह की देन हैं। तो आइये जानते हैं, कि कैसा था पुराना जयपुर और अब कैसा हो गया है

हवा महल

हवा महल

गुलाबी शहर के दक्षिण ओर स्थित, हवा महल एक राजसी महल है। खास तौर पर राजसी महिलाओं के लिए बनाई गई यह अद्भुत रचना लोगों का अपनी जादुई खूबसूरती से मन मोह लेती है।Pc:Bourne & Shepherd.

आज का हवा महल

आज का हवा महल

सन् 1798 में बनाई गई वास्तुकला की यह सटीक रचना महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारी बनवाई गई थी। इतिहास के कई पन्नों को अपने में समेटे हुए आज भी तत्परता से खड़ी यह रचना सदियों से शहर के करतबों और कहानियों को रोज़ाना देखती है। इस पांच मंज़िला इमारत का निर्माण राजा के मुकुट के आकार में किया गया था, जिसे डिज़ाइन किया था लाल चंद उस्ता द्वारा। Pc: flicker

अल्बर्ट हॉल

अल्बर्ट हॉल

गुलाबी नगरी ने स्थित अल्बर्ट हॉल संग्रहालय आपको अतीत की निशानियों के दर्शन कराता है। केंद्रीय संग्रहालय के नाम से भी जाना जाने वाला यह ऐतिहासिक संग्रहालय राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय है। इस ऐतिहासिक रचना का निर्माण महाराजा राम सिंह द्वारा, वेल्स के राजकुमार, राजा अल्बर्ट एडवर्ड का भारत में स्वागत करने के लिए किया गया था, जिसके निर्माण के बाद इसे राजा एडवर्ड का ही नाम दिया गया।

अल्बर्ट हॉल

अल्बर्ट हॉल

संग्रहालय का डिज़ाइन ब्रिटिश आर्किटेक्चर सैम्युल स्विंटन जेकब द्वारा तैयार किया गया।इस संग्रहालय की आधारशिला वेल्स के राजकुमार द्वारा ही सन् 1876 में रखी गई थी।अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में धातु कला, मिट्टी के बर्तन, हथियार व कवच, संगमरमर कला, लघु चित्रों और आभूषणों का संग्रह है।Pc:Ksheer

जयपुर पैलेस

जयपुर पैलेस

सिटी पैलेस एक लोकप्रिय विरासत है जो शहर के बीचोबीच स्थित है। यह शहर की शानदार इमारतों में से एक है। इस शानदार महल का निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह माधो ने करवाया था जिन्‍होने जयपुर की स्‍थापना की थी। महल में राजपूत और मुगल शैली की वास्‍तुकला का एक सुंदर समामेलन है। महल के प्रवेश द्वार पर मुबारक महल ( स्‍वागत महल ) बना हुआ है। इसका निर्माण भी महाराजा सवाई माधो सिंह ने 19 वीं सदी में करवाया था जिसका इस्‍तेमाल स्‍वागत क्षेत्र के रूप मे किया जाता था।

जयपुर पैलेस

जयपुर पैलेस

वर्तमान में इस इमारत को जयपुर के राजा सवाई माधो सिंह द्वितीय को समर्पित करके एक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया। इस संग्रहालय में बनारसी साडि़यों और पश्‍मीना शॉल के साथ कई शाही पोशाकों का प्रर्दशन किया गया है। महाराजा सवाई माधो सिंह ( 1750 - 1768 ) के द्वारा पहनी जाने वाली शाही पोशाकों को भी इस संग्रहालय में रखा गया है जिन्‍हे आम जनता देख सकती है। सिटी पैलेस परिसर में महारानी पैलेस या क्‍वीन पैलेस भी स्थित है जहां कई प्राचीन राजपूतों हथियारों को दर्शाया गया है। यहां के संग्रहालय में हाथी दांत तलवारें, चेन हथियार, बंदुक, पिस्‍टल, तोपें, प्‍वाइजन टिप वाले ब्‍लेड और गन पाउडर के पाउच भी प्रर्दशन के लिए रखे गए हैं।Pc:Clément Bardot

आमेर महल

आमेर महल

आमेर महल को राजा मानसिंह, राजा जयसिंह, और राजा सवाई सिंह ने बनवाया था जो अपनी 200 साल पुरातन की ऐतिहासिक गौरवशाली गाथा प्रस्तुत करता है। इस किले को लाल पत्थरों से बनाया गया है और इस महल के गलियारे सफ़ेद संगमरमर के बने हुए हैं। यह किला काफी ऊंचाई पर बना हुआ है इसलिए इस तक पहुँचने के लिए काफी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।

 आमेर महल

आमेर महल

इस किले के अंदर बने महल अपने आपमें बे-मिसाल हैं। इन्हीं महलों में शामिल है शीश महल जो अपनी आलीशान अद्भुत नक्काशी के लिए जाना जाता है।Pc:Firoze Edassery

जौहरी बाजार

जौहरी बाजार

19वीं शताब्दी के दौरान कुछ ऐसा नजर आता था जयपुर का व्यस्तम मार्केट जौहरी मार्केट

जौहरी मार्केट

जौहरी मार्केट

मानक चौक

मानक चौक

सन 1910 के दौरान खिंची गयी मानक चौक की तस्वीर।

मानक चौक

मानक चौक

वर्तमान में मानक चौक जयपुर का सबसे व्यस्तम इलाका है।

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