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अब पर्यटक नहीं कर सकेंगे पद्मावती के आलिशान महल चित्तोड़गढ़ का दीदार

Written By: Goldi

राजस्थान का प्रसिद्ध किला,यानी चितौड़गढ़ का किला पर्यटकों के लिए अब बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि, करीबन 200 प्रोटेस्टर्स चितौड़गढ़ किले के बाहर संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के खिलाफ वहां प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली। आजादी के बाद पहली बार चित्तौड़गढ़ के किले को पर्यटकों के लिए बंद किया गया है।

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आपको बता दें, चितौड़गढ़ भारत का सबसे बड़ा दुर्ग है। यह धरती से 180 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ की शिखा पर बना हुआ है। यह ऐतिहासिक दुर्ग सातवीं सदी में बनवाया गया था। ऐसा माना जाता है कि इस किले का उपयोग आठवीं से सोलहवीं सदी तक मेवाड़ पर राज करने वाले गहलोत और सिसोदिया राजवंशों ने निवास स्थल के रूप में किया। वर्ष 1568 में इस शानदार किले पर सम्राट अकबर ने अपना आधिपत्य जमा लिया। ऐसा माना जाता है कि मौर्य शासकों द्वारा निर्मित इस भव्य दुर्ग पर पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी के दरमियान मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी ने तीन बार छापा मारा था।

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आप सबने फिल्म पद्मावती का ट्रेलर तो देखा ही होगा, फिल्म की कहानी चित्तौड़ की प्रसिद्द राजपूत रानी पद्मिनी का वर्णन किया गया है जो रावल रतन सिंह की पत्नी थीं। यह फ़िल्म दिल्ली सल्तनत के तुर्की शासक अलाउद्दीन खिलजी का 1303 ई. में चित्तौड़गढ़ के दुर्ग पर आक्रमण को भी दर्शाती है।

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फिल्म के ट्रेलर देखने के बाद कह सकते हैं कि, भंसाली ने फिल्म को काफी सलीके से बनाया है, साथ ही हर बारीकी पर काफी ध्यान दिया गया है..फिल्म की पूरी शूटिंग मुंबई में सम्पन्न हुई है। फिल्म की शूटिंग के दौरान भंसाली को कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा, इस बीच फिल्म का सेट जोकि जयपुर के जयगढ़ किले में लगाया था, उसे भी तहस-मह्स कर दिया गया था। फिल्म के ट्रेलर को देखने के बाद आप यकीनन कह सकते हैं, कि भंसाली ने मुंबई में भी चितौड़गढ़ किले को बखूबी दिखाया है। फिल्म के माध्यम से आप राजस्थान के भव्य किले यानि चित्तौड़गढ़ को देख सकते हैं।

कब हुआ था निर्माण

कब हुआ था निर्माण

एक लोककथा के अनुसार इस किले का निर्माण मौर्य ने 7 वीं शताब्दी के दौरान किया था। यह शानदार संरचना 180 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित है और लगभग 700 एकड के क्षेत्र में फ़ैली हुई है। यह वास्तुकला प्रवीणता का एक प्रतीक है जो कई विध्वंसों के बाद भी बचा हुआ है।PC:Findan

किले तक पहुंचना है बेहद मुश्किल

किले तक पहुंचना है बेहद मुश्किल

किले तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं है; आपको किले तक पहुँचने के लिए एक खड़े और घुमावदार मार्ग से एक मील चलना होगा। इस किले में सात नुकीले लोहे के दरवाज़े हैं जिनके नाम हिंदू देवताओं के नाम पर पड़े। इस किले में कई सुंदर मंदिरों के साथ साथ रानी पद्मिनी और महाराणा कुम्भ के शानदार महल हैं।किले में कई जल निकाय हैं जिन्हें वर्षा या प्राकृतिक जलग्रहों से पानी मिलता रहता है।

बिल्कुल भी मिस ना करें

बिल्कुल भी मिस ना करें

ऐतिहासिक स्थापत्य से भरपूर इस खूबसूरत दुर्ग को राजस्थान में आकर न देखना बहुत कुछ मिस करने जैसा है। दुर्ग के बहुत सारे पक्ष आकर्षण हैं और उन्हें देखा जाना चाहिए। इस दुर्ग की विशालता और ऊंचाई को देखते हुए कहा जाता है कि 'चित्तौड़ का दुर्ग पूरा देखने के लिए पत्थर के पांव चाहिएं।'PC:Official Website

जौहर कुंड

जौहर कुंड

पर्यटक यहां वह कुंड भी देख सकते हैं,जिसमे राणा रतन सिंह के युद्ध में शहीद हो जाने के बाद उनकी पत्नी रानी पद्मिनी ने अन्य स्त्रियों के साथ आत्म-सम्मान और गौरव को मृत्यु से ऊपर रखते हुए जौहर कर लिया था। मेवाड़ी सेनाओं के मुगलों से परास्त होने के बाद अपनी आन बान और इज्जत बचाने के लिए क्षत्राणी महिलाएं बड़े पैमाने पर जलती आग में कूद गई थी। उनके जौहर को यहां इस जादुई परिसर में रूह से महसूस किया जा सकता है।

कुंभश्याम मंदिर और विजय स्तंभ

कुंभश्याम मंदिर और विजय स्तंभ

इस विशाल दुर्ग के दक्षिणी परिसर में कुंभश्याम मंदिर बना हुआ है। यह मीरां बाई का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिर है। इसी मंदिर के नजदीक विजय स्तंभ भी बना हुआ है। यह नौ मंजिला शानदार टॉवर राणा कुभा ने 1437 में मालवा के सुल्तान पर विजय प्राप्त करने के बाद प्रतीक के तौर पर बनवाया था।PC:Abhishek Singhal

पद्मिनी का महल

पद्मिनी का महल

पद्मिनी महल सुंदर और बहादुर रानी पद्मिनी का घर था। यह महल चित्तौड़गढ़ किले में स्थित है और रानी पद्मिनी के साहस और शान की कहानी बताता है। महल के पास सुंदर कमल का एक तालाब है। ऐसा विश्वास है कि यही वह स्थान है जहाँ सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी के प्रतिबिम्ब की एक झलक देखी थी। रानी के शाश्वत सौंदर्य से सुलतान अभिभूत हो गया और उसकी रानी को पाने की इच्छा के कारण अंततः युद्ध हुआ। इस महल की वास्तुकला अदभुत है और यहाँ का सचित्र वातावरण यहाँ का आकर्षण बढाता है। पास ही भगवान शिव को समर्पित नीलकंठ महादेव मंदिर है।PC: lensnmatter

चित्तौड़गढ़ संग्रहालय

चित्तौड़गढ़ संग्रहालय

चित्तौड़गढ़ संग्रहालय को फतेह प्रकाश पैलेस संग्रहालय के नाम से जाना जाता है और यह चित्तौड़गढ़ में जरुर देखे जाने वाली एक जगह है। चित्तौड़गढ़ के फतेह प्रकाश पैलेस संग्रहालय में कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कलाकृतियां रखी हुईं हैं।

प्रवेश शुल्क

प्रवेश शुल्क

दुर्ग में प्रवेश शुल्क दस रुपए है। इस दुर्ग में रात 8 बजे बाद प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। आप अगर कैमरा साथ लाए हैं तो कैमरे का चार्ज 25 रुपए अलग से देना होगा। यहां तीन-चार घंटे के लिए गाइड का शुल्क 250 रुपए तक होता है।PC:Sougata Bhar

 हवाईजहाज

हवाईजहाज

चित्तौड़गढ़ का निकटतम हवाई अड्डा
डबोक हवाई अड्डा है जिसे महाराणा प्रताप हवाई अड्डे के नाम से भी जाना जाता है, जो 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा सभी प्रमुख भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

रेलवे स्टेशन
चित्तौड़गढ़ का रेलवे स्टेशन महत्वपूर्ण शहरों जैसे अजमेर, जयपुर, उदयपुर, कोटा और नई दिल्ली से जुड़ा हुआ है।

सड़क द्वारा
चित्तौड़गढ बस व ट्रेन सेवाओं से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। चित्तौड़गढ शहर से चित्तौड़गढ दुर्ग जाने के लिए ऑटो को किराए पर लिया जा सकता है। तीन से चार घंटे की विजट के लिए आपको 300 से 400 रूपए चुकाने होंगे। इसके अलावा एक विकल्प टैक्सी का भी है। टैक्सी 1200 रुपए किराए में आपको चित्तौड़ के सभी लोकेशंस की सैर कराती है।PC:Daniel Villafruela.

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