» »जब एक भक्त के लिए गवाही देने चले आये थे बांके बिहारी

जब एक भक्त के लिए गवाही देने चले आये थे बांके बिहारी

Written By: Goldi

उत्तर प्रदेश स्थित मथुरा को कृष्ण की नगरी के नाम से जाना जाता है..। कहा जाता है यहाँ कहीं भी एक पत्थर उछालो तो वो किसी न किसी मंदिर में ही गिरेगा इसलिए तो इस नगरी को 'मंदिरों की नगरी' कहा जाता है।

वृन्दावन के निधिवन की दिलचस्प और रहस्यमयी बातें!

यहाँ के पौराणिक किस्से कई हैं और उन किस्सों में छुपी आस्था भी अटूट है। श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।इनमें से कुछ मंदिर एकदम खास हैं, जहां सिर नवाए बगैर कोई जाना नहीं चाहता।इन्ही में से एक मंदिर है पागल बाबा का मंदिर।

पागल बाबा मंदिर एक मॉडर्न वास्तुकला का उदाहरण है...इस मंदिर का निर्माण "पागल बाबा" द्वारा किया गया था। पूर्णिमा के अवसर पर इस मंदिर में हजारो की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। 

अहमदबाद बना भारत का पहला वर्ल्ड हेरिटेज शहर

कहा जाता है कि,इस मंदिर में कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता है..यहां भक्तो की पुकार पागल बाबा और बिहारी जी द्वारा सुनी जाती है। यह मंदिर दस मंजिल का बना हुआ है मंजिल के उपरी भाग से वृन्दावन को बखूबी निहारा जा सकता है..

कैसे पहुंचे पागल बाबा मंदिर?

कैसे पहुंचे पागल बाबा मंदिर?

हवाईमार्ग द्वारा
वृन्दावन का नजदीकी एयरपोर्ट दिल्ली है जोकि यहां से 145 किमी की दूरी पर स्थित हैं..नेशनल हाइवे 2 के जरिये यहां बस और कार से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

ट्रेन द्वारा
वृन्दावन का नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्सन है..यहां से पर्यटक बस द्वारा पहुंच सकते हैं...

सड़क द्वारा
वृन्दावन मुख्य राजमार्गों से अच्छे से जुड़ा हुआ है...यहां बस या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।PC: Ritukejai

बिहारी जी का मंदिर

बिहारी जी का मंदिर

मंदिर के अंदर बिहारी जी और पागल बाबा की पूजा होती है..माना जाता है कि, इस मंदिर में अगर कोई व्यक्ति अपनी कोई अर्जी लेकर आता है तो बिहारी जी उसकी सारी परेशानियों को हर लेते हैं।PC: Ritukejai

कठपुतली डांस

कठपुतली डांस

यह मंदिर दस मंजिल बना हुआ है। मंदिर के निचले भाग में पूरे साल कठपुतली डांस आयोजित होता है।

पागल बाबा मंदिर की कहानी

पागल बाबा मंदिर की कहानी

पौराणिक कथायों की माने तो, एक गरीब ब्राह्मण बांके बिहारी का परम भक्त था। एक बार उसने एक महाजन से कुछ रुपए उधार लिए। हर महीने उसे थोड़ा-थोड़ा करके वह चुकता करता था। जब अंतिम किस्त रह गई तब महाजन ने उसे अदालती नोटिस भिजवा दिया कि अभी तक उसने उधार चुकता नहीं किया है इसलिए पूरी रकम ब्याज वापस करे। ब्राह्मण परेशान हो गया। महाजन के पास जाकर उसने बहुत सफाई दी, अनुनय-विनय किया, लेकिन महाजन अपने दावे से टस से मस नहीं हुआ। मामला कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट में भी ब्राह्मण ने जज से वही बात कही कि मैंने सारा पैसा चुका दिया है। महाजन झूठ बोल रहा है।

 पागल बाबा मंदिर

पागल बाबा मंदिर

जज ने पूछा, कोई गवाह है जिसके सामने तुम महाजन को पैसा देते थे। कुछ सोच कर उसने कहा हां, मेरी तरफ से गवाही बांके बिहारी देंगे। अदालत ने गवाह का पता पूछा तो ब्राह्मण ने बताया, बांके बिहारी, वल्द वासुदेव, बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन। उक्त पते पर सम्मन जारी कर दिया गया। पुजारी ने सम्मन को मूर्ति के सामने रखकर कहा, ‘‘भगवन, आपको गवाही देने कचहरी जाना है।''

 पागल बाबा मंदिर

पागल बाबा मंदिर

गवाही के दिन सचमुच एक बूढ़ा आदमी जज के सामने खड़ा होकर बता गया कि पैसे देते समय मैं साथ होता था और फलां-फलां तारीख को रकम वापस की गई थी। जज ने सेठ का बहीखाता देखा तो गवाही सच निकली। रकम दर्ज थी, नाम फर्जी डाला गया था। जज ने ब्राह्मण को निर्दोष करार दिया, लेकिन उसके मन में यह उथल-पुथल मची रही कि आखिर वह गवाह कौन था। उसने ब्राह्मण से पूछा। ब्राह्मण ने बताया कि वह तो सर्वत्र रहता है, गरीबों की मदद के लिए अपने आप आता है।

 पागल बाबा मंदिर

पागल बाबा मंदिर

ततपश्चात जज साहब पंडित से बोले की ये वृद्व जन कौन थे जो गवाही देकर चले गये। तो पंडित बोला अरे जज साहब यही तो मेरा ठाकुर था। जो भक्त की दुविधा देख ना सका और भरोसे की लाज बचाने आ गया।

इतना सुनना था की जज पंडित जी के चरणों में लेट गया और ठाकुर जी का पता पूछा। पंडित बोला मेरा ठाकुर तो सर्वत्र है वो हर जगह है अब जज ने घरबार काम धंधा सब छोङ ठाकुर को ढूंढने निकल फकीर बन गया। बहुत साल बाद वह वृंदावन लौट कर आया पागल बाबा के नाम से।

कब जाएँ

कब जाएँ

इस मंदिर को देखने के लिए कभी भी जाया जा सकता है। इस मंदिर में सुबह और शाम दो टाइम पूजा की जाती है।

मंदिर खुलने का समय

मंदिर खुलने का समय

गर्मियों में- सुबह 5 बजे से 11 बजे तक और शाम को 3 बजे से 9 बजे तक।

सर्दियों में-सुबह 6 बजे से 12 बजे दोपहर तकऔर शाम को 3 बजे और 8:30 बजे तक।

जन्माष्टमी में लगता है भक्तों का हुजूम

जन्माष्टमी में लगता है भक्तों का हुजूम

कृष्णा के जन्मदिवस के मौके पर इस मंदिर में इस मंदिर में भक्तो का तांता देखा जा सकता हैं। इस दौरान यह मंदिर पूरी तरह फूलों से सजा हुआ होता है।

Please Wait while comments are loading...