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इस वेकेशन सैर करें पंजाब का ऐतिहासिक नगर अमृतसर की

By Khushnuma

अमृतसर पंजाब का ऐतिहासिक नगर होने के साथ साथ स्वर्ण मंदिर के लिए भी विश्व-भर में मशहूर है। इस शहर का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है, जिसकी संस्कृति व इतिहास बहुत कुछ दर्शाता है। बताया जाता है कि इस शहर की नीवं सिखों के चौथे गुरु रामदास ने राखी थी। कहा जाता है कि मुग़ल बादशाह अकबर ने गुरु रामदास को यह ज़मीन भेंट के स्वरुप दी थी। तब गुरु रामदास ने इस ज़मीन पर एक सरोवर को बनवाया था इस सरोवर को अमृतसर सरोवर कहा गया जिसके आधार पर इस शहर का नाम अमृतसर पड़ गया।

गुरु रामदास की जब मृत्यु हो गई तब उनके बेटे अर्जुनदेव ने इस सरोवर के बीच इस आलीशान मंदिर का निर्माण करवाया। जो आज अमृतसर की ललाट पर जगमगाता है। जिसे स्वर्ण मंदिर 'गोल्डन टेम्पल' का नाम दिया गया है। तो चलिए सैर करते हैं इस ऐतिहासिक नगर की।
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स्वर्ण मंदिर

स्वर्ण मंदिर

स्वर्ण मंदिर को 'गोल्ड टेम्पल' के नाम से भी जाना जाता है और इसे 'दरबार साहिब' भी कहा जाता है।यह मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है जहाँ हर साल हज़ारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर की दीवारों पर तथा कलशों पर शुध्द सोना मढ़ा हुआ है। जिसमे 400 किलो सोना लगा है।
Image Courtesy:Punjabi Assassin

जलियांवाला बाग

जलियांवाला बाग

जलियांवाला बाग स्वतंत्रता संग्राम का जीता जागता उदाहरण है जो तक़रीबन 2000 सिख व हिन्दुओं की शहादत का गवाह है। इस बाग़ की दीवारों पर आज भी गोलियों के निशाँ बाकी है। यहीं शहीदों की याद में एक स्मारक बनवाया गया है, जहाँ हरदम एक ज्योति प्रज्वलित रहती है।
Image Courtesy:Joanjoc

बाघा बोर्डर

बाघा बोर्डर

बाघा बोर्डर पाकिस्तान और हिन्दुस्तान का बॉर्डर है जहाँ हर शाम भारत और पाकिस्तान की सैनिक टुकड़ियां इकट्ठी होती हैं। 14 अगस्त की रात जब दोनों देशों में जब आज़ादी का जश्न मनाया जाता है तो यहाँ उस रात जागरण होता है और अमन शांति की दुआएं की जाती हैं। उसी रात बॉर्डर के आरपार वालों को मिलने की अनुमति होती है।
Image Courtesy:Paasikivi

दुर्ग्याना मंदिर

दुर्ग्याना मंदिर

दुर्ग्याना मंदिर पुराने अमृतसर में स्थित है। यह अपने आपमें बेहद लोकप्रिय है जिसकी भव्य कलात्मक शैली पर्यटकों को खींचे लिए आती है। इस मंदिर के चारों और सरोवर है जिसका दृश्य बेहद लुभावना लगता है।
Image Courtesy:Flickr upload bot

अकाल तख़्त

अकाल तख़्त


स्वर्ण मंदिर के परिसर में स्थित अकाल तख़्त एक बेहद लुभावना ऐतिहासिक भवन है। बताया जाता है कि इसको गुरु हरगोविन्द ने बनवाया था।

Image Courtesy:Ggia

अजायबघर

अजायबघर


इस अजायबघर में सिख इतिहास से सम्बंधित कई दुर्लभ वस्तुएं, कलाकृतियां व आकर्षक चित्र मौजूद हैं। जिनको देखने दूर दूर से पर्यटक आते हैं। यहाँ का खूबसूरत वातावरण देख पर्यटक मंत्रमुग्ध हो उठते हैं।

Image Courtesy:Peripitus

सिख संग्राहलय

सिख संग्राहलय


सिख संग्राहलय स्वर्ण मंदिर के पास ही बना हुआ है। इस संग्राहलय में अनेकों पेंटिंग्स हैं जिसमे सिख इतिहास से सम्बंधित युद्धों को चित्रों में दर्शाया गया है।

Image Courtesy:Haa900

तरन तारन

तरन तारन


तरन तारन एक तालाब है जिसके बारे में मान्यता है कि इस पानी में हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बिमारी को दूर करने की ताकत है। यहाँ अक्सर भक्त अवश्य आते हैं।

Image Courtesy:jasleen_kaur

कैसे जाएँ

कैसे जाएँ

वायु मार्ग द्वारा
अमृतसर में शहर से 11 किमी दूर श्री गुरू रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जिसके जरिए यहां हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह एयरपोर्ट दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद और सिंगापुर जैसे शहरों को अमृतसर से जोड़ता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इसे विश्व के कई स्थानों से जोड़ती हैं।
Image Courtesy:Jujhar.pannu

कैसे जाएँ

कैसे जाएँ

रेल मार्ग द्वारा
अमृतसर रेल मार्ग से भारत के ज्यादातर हिस्सों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और जम्मू से अमृतसर के लिए प्रतिदिन ट्रेनें मिलती हैं। समझौता एक्सप्रेस नाम से विशेष ट्रेन वाघा-अत्तारी बॉडर के जरिए अमृतसर को लाहौर से जोड़ती है।
Image Courtesy:Roadahead

कैसे जाएँ

कैसे जाएँ

सड़क मार्ग द्वारा
ग्रेंड ट्रंक रोड (एनएच-1) पर स्थित होने के कारण भारत के प्रमुख शहरों से यहां सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू से अमृतसर के लिए बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा जीटी रोड अमृतसर को पाकिस्तान के लाहौर से भी जोड़ता है।
Image Courtesy:Poco a poco

कहाँ ठहरें

कहाँ ठहरें

अमृतसर में कहाँ ठहरें होटलों की अधिक जानकारी की लिए बस एक क्लिक करें-
अमृतसर में यूँ तो कई होटल हैं जो हर रेंज में हैं जहाँ आसानी से ठहरा जा सकता है जिनमे से कुछ यूँ हैं-
मोहन इंटरनेशनल (अल्बर्ट रोड), एस्टोरिया (क्वीन रोड) आदि।
इसके अलावा यहाँ ठहरने के लिए गुरु रामदास सराय, सीता मंदिर सराय आदि धर्मशालाएं भी हैं जहाँ ठहरा जा सकता है।

Image Courtesy:banmeet singh

कब जाएँ

कब जाएँ

अमृतसर घूमने की दृष्टि से कभी भी जाया जा सकता है लेकिन बैसाखी में यहाँ आकर इस पर्व का लुफ्त उठा सकते हैं। सितंबर की शुरुआत में मानसून खत्म होने के बाद का मौसम काफी खुशगवार होता है। इस दौरान दिन और रात में तापमान अपेक्षाकृत काफी कम रहता है। इसके बाद आने वाला ठंड का मौसम इस जगह को घूमने और आउटडोर एक्टिविटी के काफी अनुकूल होता है। इसलिए अमृतसर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च का होता है।

Image Courtesy:Arian Zwegers

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