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भारत की प्राचीन नगरी उज्जैन...कालों के महाकाल करते हैं यहां निवास

Written By: Goldi

भारत जितना सुंदर देश है..उतने ही सुंदर यहां के तीर्थ है जो आपको एक असीम शांति का एहसास कराते हैं। यहां कई तीर्थ बर्फीली चोटियों और ऊंचाइयों में हैं तो वहीँ दूसरी तरफ कई महत्त्वपूर्ण तीर्थ सुदूर दक्षिण भारत में हैं। यानी आप चाहें उत्तर में हों या दक्षिण में आपको विविधता भरे तीर्थ अवश्य मिलेंगे। इसी क्रम में आज हम बतायेंगे मध्य प्रदेश के अंतर्गत आने वाले और हिन्दू धर्म के महत्त्वपूर्ण और प्राचीनतम तीर्थ उज्जैन के बारे में।

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महाकाल की नगरी उज्जैन मध्य प्रदेश का एक प्राचीनतम शहर है जो शिप्रा नदी के किनारे स्थित है और शिवरात्रि, कुंभ और अर्ध कुंभ जैसे प्रमुख मेलों के लिए प्रसिद्ध है। प्राचीनकाल में इस शहर को उज्जयिनी के नाम से भी जाना जाता है "उज्जयिनी" का अर्थ होता है एक गौरवशाली विजेता। उज्जैन धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है और मुख्य रूप से अपने प्रसिद्ध प्राचीन मंदिरों के लिए देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है।

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पौराणिक कथा के मुताबिक, उज्जैन में अशोका और विक्रमादित्य जैसे शासकों का शासन था। प्रसिद्ध कवि कालिदास ने भी इस जगह पर अपनी कविताएँ लिखी थी। वेदों में भी उज्जैन का उल्लेख किया गया है और ऐसा माना जाता है कि स्कंद पुराण के दो भाग इसी जगह पर लिखे गए थे। महाभारत में उज्जैन का उल्लेख अवंती राज्य की राजधानी के रूप में किया गया है। इस शहर को शिव की भूमि तथा हिंदुओं के सात पवित्र शहरों में से एक माना जाता है। यह शहर अशोक, वराहमिहिर और ब्रह्मगुप्त जैसी प्रसिद्ध हस्तियों से जुड़ा है।

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उज्जैन पर्यटन अपने यात्रियों के लिए कुछ प्रसिद्ध आकर्षण प्रदान करता है। महाकालेश्वर मंदिर,चिंतामणि गणेश मंदिर, बड़े गणेश जी का मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, विक्रम कीर्ति मंदिर, गोपाल मंदिर तथा नवग्रह मंदिर कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं।आइये अधिक जाने उज्जैन के इन प्रमुख मंदिरों के बारे में।

महाकालेश्वर मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन के पवित्र शहर में हिंदुओं के सबसे शुभ मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर एक झील के पास स्थित है। इस मंदिर में विशाल दीवारों से घिरा हुआ एक बड़ा आंगन है। इस मंदिर के अंदर पाँच स्तर हैं और इनमें से एक स्तर भूमिगत है। दक्षिणमूर्ति महाकालेश्वर की मूर्ति को दिया गया नाम है तथा इसमें देवता का मुख दक्षिण की ओर है। स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि भगवान को एकबार चढ़ाया हुआ प्रसाद फिर से चढ़ाया जा सकता है तथा यह विशेषता केवल इसी मंदिर में देखी जा सकती है।

PC: Arian Zwegers

काल भैरव मंदिर

काल भैरव मंदिर

उज्जैन के मंदिरों के शहर में स्थित काल भैरव मंदिर प्राचीन हिंदू संस्कृति का बेहतरीन उदाहरण है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर तंत्र के पंथ से जुड़ा है। काल भैरव भगवान शिव की भयंकर अभिव्यक्तियों में से एक माना जाता है। सैकड़ों भक्त इस मंदिर में हररोज़ आते हैं और आसानी से मंदिर परिसर के चारों ओर राख लिप्त शरीर वाले साधु देखें जा सकते हैं। मंदिर परिसर में एक बरगद का पेड़ है और इस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग है। यह शिवलिंग नंदी बैल की मूर्ति के एकदम सामने स्थित है। इस मंदिर के साथ अनेक मिथक जुड़े हैं। भक्तों का ऐसा विश्वास हैं कि दिल से कुछ भी इच्छा करने पर हमेशा पूरी होती है।PC:Utcursch

क्षिप्रा घाट

क्षिप्रा घाट

उज्जैन नगर के धार्मिक स्वरूप में क्षिप्रा नदी के घाटों का प्रमुख स्थान है। नदी के दाहिने किनारे, जहाँ नगर स्थित है, पर बने ये घाट स्थानार्थियों के लिये सीढीबध्द हैं। घाटों पर विभिन्न देवी-देवताओं के नये-पुराने मंदिर भी है। क्षिप्रा के इन घाटों का गौरव सिंहस्थ के दौरान देखते ही बनता है, जब लाखों-करोड़ों श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं।PC:Gyanendra_Singh

इस्कॉन राधा कृष्ण मंदिर

इस्कॉन राधा कृष्ण मंदिर

यदि आप उज्जैन ही यात्रा पर है तो आप इस्कॉन राधा कृष्ण मंदिर अवश्य जाएं। ये मंदिर वर्त्तमान कला का एक बेहद सुन्दर नमूना है और अन्य इस्कॉन मंदिरों की ही तरह आपको यहां भी हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्णा, हरे हरे का जाप होते सुनाई देगा और इसको सुनने के बाद आप अपनी सभी दुविधाओं सभी टेंशनों को भूल जाएंगे।

हरसिद्धि मंदिर

हरसिद्धि मंदिर

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन के मंदिरों के शहर में एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है जो गहरे सिंदूरी रंग में रंगी है। देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति देवी महालक्ष्मी और देवी सरस्वती की मूर्तियों के बीच विराजमान है। श्रीयंत्र शक्ति की शक्ति का प्रतीक है और श्रीयंत्र भी इस मंदिर में प्रतिष्ठित है। इस जगह का पुराणों में बहुत महत्व है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शिव सती के शरीर को ले जा रहे थे, तब उसकी कोहनी इस जगह पर गिरी थी।PC:Bernard Gagnon

चिंतामण गणेश मंदिर

चिंतामण गणेश मंदिर

चिंतामण गणेश मंदिर, उज्जैन के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। भगवान गणेश का आशीर्वाद पाने के लिए अनेक भक्त प्रतिदिन इस मंदिर में आते हैं। चिंतामण एक प्राचीन हिंदु शब्द है जिसका अर्थ है 'चिंता से राहत'।भक्तों की ऐसी मान्यता है कि गणेश भगवान दुख के समय उनके पास आने वाले प्रत्येक भक्त को राहत प्रदान करते हैं। स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि इस मंदिर में स्थित भगवान गणेश की मूर्ति स्वयंभू है। उनके दोनों ओर रिद्धि और सिद्धि विराजमान है जैसे कि वे उनकी पत्नियाँ हैं।

वेधशाला, उज्जैन

वेधशाला, उज्जैन

वेधशाला उज्जैन की प्रसिद्ध वेधशाला है जिसे 1719 में जयपुर के महाराजा सवाई राज जयसिंह द्वारा बनवाया गया था। यह सच है कि प्राचीन भारत में उज्जैन ज्योतिष विद्या के अध्ययन केंद्रों में से एक था। उत्तरी भारत में कैलेंडर पंचांग के रूप् में जाना जाता है और यह उज्जैन मेंकी जाने वाली गणनाओं के आधार पर बनाया जाता है। इस वेधशाला में 'सन डायल' बहुत प्रसिद्ध है क्योंकि यह उपकरण मुख्य रूप से किसी भी खगोलीय वस्तु का खगोलीय विशुवत रेखा से किसी भी प्रकार के झुकाव की गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है।

स्ट्रीट फूड प्रेमियों के लिए स्वर्ग

स्ट्रीट फूड प्रेमियों के लिए स्वर्ग

उज्जैन में स्ट्रीट फूड बहुत प्रसिद्ध है और टावर चैक नामक जगह पर पर्यटक इसका मज़ा ले सकते हैं। यहाँ पर्यटक स्थानीय स्ट्रीट फूड का मज़ा ले सकते हैं जिसमें मुँह में पानी लाने वाले स्नैक्स जैसे चाट, पानी पुरी, घीयुक्त मकई के स्नैक्स तथा भेलपुरी शामिल हैं।

कैसे पहुंचे उज्जैन

कैसे पहुंचे उज्जैन

वायु सेवा द्वारा
उज्जैन का सबसे निकतम हवाई अड्डा इन्दौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा है जो यहाँ से 55कि.मी की दूरी पर स्थित है। निजी और सार्वजनिक घरेलू विमान सेवाओं के माध्यम से इन्दौर हवाई अड्डा भारत के अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जुड़ा है। पर्यटक उज्जैन तक आने के लिए इन्दौर हवाई अड्डे से टैक्सी भी ले सकते हैं। इन्दौर से उज्जैन तक आने के लिए यात्री बस भी ले सकते हैं।PC:yourfriend Ap

 कैसे पहुंचे उज्जैन

कैसे पहुंचे उज्जैन

ट्रेन द्वारा
उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन उज्जैन का मुख्य रेलवे स्टेशन है जो भारत के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जुड़ा है। पर्यटक उज्जैन से इंदौर, दिल्ली, पुणे, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, जम्मू, भोपाल, जयपुर, वाराणसी, गोरखपुर, रतलाम, अहमदाबाद, बड़ौदा, ग्वालियर, हैदराबाद, बैंगलोर और अन्य कई बड़े शहरों के लिए सीधी रेलगाडि़याँ ले सकते हैं।PC:Gyanendra_Singh_

सड़क मार्ग

सड़क मार्ग

यह शहर भली प्रकार से राज्य सड़क परिवहन की सार्वजनिक बसों द्वारा जुड़ा है। भोपाल (183 किमी), इन्दौर (55 किमी), अहमदाबाद (400 किमी) तथा ग्वालियर (450 किमी) से उज्जैन के लिए नियमित बसें उपलब्ध हैं। इसके अलावा इन मार्गों पर पर्यटक नियमित रूप से डीलक्स एसी और सुपरफास्ट बसों का लाभ उठा सकते हैं।PC: Gyanendra_Singh

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