मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थापित महाकाल मंदिर में भगवान शिव ना सिर्फ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बल्कि उज्जैन के राजा के रूप में भी विराज करते हैं। महाकाल के दर्शन करने हर दिन सैंकड़ों लोगों की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ती है। इस कारण हर रोज कई किलो फूल महाकाल को चढ़ाये जाते हैं।

इतनी अधिक मात्रा में भगवान शिव के अर्पित होने वाले फूलों का सदुपयोग करते हुए मंदिर प्रशासन ने बड़ा ही अनोखा फैसला लिया है।महाकाल मंदिर में चढ़े फूलों से अब प्रसाद बनाया जाता है। है ना अनोखी पहल...।
महाकाल मंदिर में हर रोज सैंकड़ों की संख्या में भक्त भगवान शिव के महाकाल स्वरूप के दर्शन करने आते हैं। यहां आने वाले भक्तों में सिर्फ उज्जैन ही नहीं बल्कि भारत और दुनिया के कई अन्य देशों के लोग भी शामिल होते हैं। हर आम मंदिर की तरह महाकालेश्वर मंदिर में भी आने वाला हर भक्त भगवान को फूल चढ़ाता है। लेकिन महाकाल मंदिर में हर रोज चढ़ने वाले फूलों की मात्रा 400 किलो तक पहुंच जाती है।

इतनी भारी मात्रा में फूलों को अगर हर दिन नदियों में बहा दिया जाता है तो उससे नदियों में जलप्रदूषण काफी अधिक होने लगेगा। इसलिए महाकाल मंदिर प्रशासन ने निर्णय लिया कि वे एक रिसाइक्लिंग प्लांट बैठाएंगे। यह प्लांट महाकाल को रोज चढ़ाए गये 400 किलो फूलों को कंपोस्ट करने का काम करेगा।
कंपोस्ट किये गये फूलों से निकले बायो-गैस पर महाकाल मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए प्रसाद बनाया जाएगा। इस बायो-गैस से हर रोज लगभग 1 लाख भक्तों के लिए प्रसाद तैयार किया जा सकेगा। बायो-गैस बन जाने के बाद जो कंपोस्ट बचेगा उसका इस्तेमाल महाकाल लोक गार्डन में फर्टिलाइजर के तौर पर किया जाएगा।

इतना ही नहीं, उज्जैन मंदिर प्रशासन साल 2019 से हर रोज विभिन्न धार्मिक स्थलों से एकत्र कर 3 टन फूलों फ्लोरल प्रोसेसिंग प्लांट में भेजता है, जहां इससे हर्बल रंग और अगरबत्तियां तैयार किया जाता है। जानकारी के मुताबिक सिर्फ 18 लाख की लागत से इस प्लांट की शुरुआत हुई थी जिससे अब हर महीने लगभग 1.5 लाख रुपये की आय होती है। खास बात यह है कि इस प्लांट में मुख्य रूप से समाज के वंचित वर्ग की महिलाएं ही काम करती हैं।

महाकाल को समर्पित किये जाने वाले फूलों व पत्तियों को एकत्र कर प्रोसेसिंग प्लांट में 10 दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है। 10 दिनों बाद जब ये जैविक खाद बन जाते हैं, तो इन्हें आकर्षक रूप से पैकिंग कर इंदौर के बाजारों में भी बेचने के लिए भेजा जाता है। इंदौर के बाजारों में यह जैविक खाद 150 रुपये प्रति किलो और 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकता है। भगवान को समर्पित फूलों व पत्तियों का इतना अच्छा उपयोग होता देख निश्चित रूप से भक्त भी काफी खुश होते होंगे।
बता दें, पूरे भारत में हर रोज लगभग 20 टन फूलों को विभिन्न धार्मिक स्थलों से कचड़े के रूप फेंका जाता है। जो नदियों को प्रदूषित करते हैं। वहीं जैविक खाद का खेतों में इस्तेमाल करने से ना सिर्फ जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है बल्कि जिस फसल का उत्पादन होता है, वह भी कहीं अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होता है।



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