पर्यटन के लिहाज से उत्तर प्रदेश का काफी तेजी से विकास किया जा रहा है। पिछले कुछ सालों में राज्य भर के विभिन्न शहरों को केंद्र में रखकर कई तरह की परियोजनाओं को शुरू किया जा चुका है। इसी क्रम में संगम तट पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक नए Surprise की तैयारियां चल रही हैं।
प्रयागराज में गंगा नदी पर देश की सबसे लंबी रोपवे को तैयार किया जा रहा है। संभावना है कि अगले साल (2025) तक इसे तैयार कर लिया जाएगा।

आइए इस रोपवे के Route और लागत के बारे में आपको जानकारी देते हैं :
मिली जानकारी के अनुसार रोपवे को बनाने के लिए आवश्यक जमीन का सर्वेक्षण प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा कर लिया गया है। सभी आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नया DPR तैयार किया जाएगा।
प्रयागराज संगम रोपवे
मिली जानकारी के अनुसार प्रयागराज संगम रोपवे भारत में सबसे लंबी नदी रोपवे होगी। इस रोपवे को 110 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जाएगा जो करीब 2.2 किमी लंबी होगी। रोपवे के बन जाने के बाद अगले साल आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले में आने वाले करीब 12 हजार श्रद्धालु व पर्यटक आसमान से संगम का शानदार दृश्य निहार सकेंगे।

उम्मीद की जा रही है कि इससे उनकी आस्था को रोमांच के नये पंख मिल जाएंगे। गर्मी के मौसम में हर दिन रोपवे का संचालन सुबह 6 बजे से शाम को 6 बजे तक होगी। वहीं सर्दियों में सुबह 7 बजे से शाम को 6 बजे तक रोपवे चलायी जाएगी। बताया जाता है कि बरसात के मौसम में जब संगम में उफान ज्यादा होती है, उस समय इसका संचालन कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाएगा।
क्या है रूट और कितनी है लागत
मिली जानकारी के अनुसार प्रयागराज संगम रोपवे त्रिवेणी पुष्प, सोमेश्वरनाथ घाट से होकर संगम के ऊपर से गुजरेगी, जो उल्टा किला (झुसी, प्रयागराज) पर जाकर खत्म होगी। बताया जाता है कि इसका पहले चरण में निर्माण बड़े हनुमान मंदिर के पास शंकर विमान मंडपम मंदिर से लेकर अरैल बंध रोड तक होगा। करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से इस परियोजना का निर्माण किया जा रहा है।

संभावना है कि रोपवे में कुल 15 केबल कार होंगी और हर केबल कार में एक बार में लगभग 10 लोग बैठ सकेंगे। प्रयागराज संगम रोपवे के शुरू हो जाने से निश्चित रूप से विमान मंडपम से त्रिवेणी पुष्प के बीच यात्रा का समय काफी हद तक घट जाएगा।
बता दें, प्रयागराज में रोपवे बनाने की योजना नयी नहीं है, बल्कि साल 2018 से ही यहां रोपवे बनाने की योजना बनायी जा रही है। आखिरकार संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले साल महाकुंभ से पहले रोपवे बनाने का काम पूरा हो जाएगा।



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