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पूर्णागिरी मैय्या के दरबार सबकी मन्नत होती हैं पूरी!

Written By: Goldi

भारत मन्दिरों का देश है..यहां आपको दस कदम की दूरी पर एक से एक खूबसूरत मंदिर देखने को मिल जायेंगे।यहाँ भक्ति में डूबे बहुत से तीर्थ स्थल हैं जो श्रद्धालुओं को दूर दूर से खींचे लिए आते हैं। यहाँ की पावन धरती भगवान की श्रद्धा में डूबे भक्तों को खूब भाति है जिसके मोह में पर्यटक हज़ारों की संख्या में यहाँ आते हैं।

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इसी क्रम में आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं, उत्तर प्रदेश में स्थित पूर्णागिरी धाम के बारे में। पूर्णागिरी धाम 108  सिद्ध पीठों में से एक है। जोकि टनकपुर से 21 किमी दूर पर स्थित है।टनकपुर क्षेत्र उत्तराखंड के चंपावत जिले में पड़ता है। जहां हरे-भरे पहाडों में पूर्णागिरी का निवास स्‍‌थान है। माँ वैष्णो देवी जम्मू के दरबार की तरह पूर्णागिरी दरबार में हर साल लाखो की संख्यां में भक्तगण पहुंचते हैं।

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पौराणिक कथायों के मुताबिक, इस स्थान पर माता सती की नाभि का भाग यहाँ गिरा था,ऊँची चोटी पर गाढ़े गये त्रिशुल आदि ही शक्ति के उस स्थान को इंगित करते हैं जहाँ सती की नाभि का भाग यहाँ पर विष्णु चक्र से कट कर गिरा था । 

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पूर्णागिरी माता का यह धाम सारे भारत में अब इतना प्रसिद्द हो गया है कि यहाँ आकर शीश झुकाने मात्र से भक्तो के सारे बिगडे काम बन जाते है और मन में नई स्फूर्ति का संचार हो जाता है।

 पूर्णागिरी धाम

पूर्णागिरी धाम

यू तो उत्तराखंड पर्यटन के लिहाज से काफी धनी है लेकिन पूर्णागिरी धाम की ख्याति पूरे देश में फैली है... "माँ वैष्णो देवी" जम्मू के दरबार की तरह पूर्णागिरी दरबार में लाखो की संख्या में लोग आते है।

 पूर्णागिरी धाम

पूर्णागिरी धाम

पूर्णागिरी मैया का धाम समुद्र तल से 5000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है... इस धाम को समस्त दुखो को हरने वाली देवी के रूप में जाना जाता है।

 कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

पूर्णागिरी मन्दिर टनकपुर से20 कि॰ मी॰ की दूरी पर स्थित है। पूर्णागिरी मे वर्ष भर तीर्थयात्रियो का भारत के सभी प्रान्तो से आना लगा रहता है। विसेशकर नवरात्री (मार्च-अप्रिल) के महीने मे भक्त अधिक मात्रा मे यहा आते है। भक्त यहा पर दर्शनो के लिये भक्तिभाव के साथ पहाड पर चढाई करते है।

पूर्णागिरी

पूर्णागिरी

पूर्णागिरी पुण्यगिरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां से काली नदी निकल कर समतल की ओर जाती है वहा पर इस नदी को शारदा के नाम से जाना जाता है। इस तीर्थस्थान पर पहुचने के लिये टनकपुर से ठूलीगाड तक आप वाहन से जा सकते हैं। ठूलीगाड से टुन्यास तक सड़क का निर्माण कार्य प्रगति पर होने के कारण पैदल ही बाकी का रास्ता तय करना होता है। ठूलीगाड से बांस की चढाई पार करने के बाद हनुमान चट्टी आता है।

 पूर्णागिरी धाम

पूर्णागिरी धाम

यहां से पुण्य पर्वत का दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा दिखने लगता है। यहां से अस्थाई बनाई गयी दुकानें और घर शुरू हो जाते हैं जो कि टुन्यास तक मिलते हैं। यहा के सबसे ऊपरी हिस्से (पूर्णागिरी) से काली नदी का फैलाव, टनकपुर शहर और कुछ नेपाली गांव दिखने लगते हैं। यहां का द्रश्य बहुत ही मनोहारी होता है। पुराना ब्रह्मदेव मण्डी टनकपुर से काफी नज़दीक है।

मेला

मेला

वैसे तो इस पवित्र शक्ति पीठ के दर्शन हेतु श्रद्धालु वर्ष भर आते रहते हैं। परन्तु चैत्र मास की नवरात्रियों से जून तक श्रद्धालुओं की अपार भीड दर्शनार्थ आती है। चैत्र मास की नवरात्रियों से दो माह तक यहॉ पर मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें श्रद्धालुओं के लिए सभी प्रकार की सुविधायें उपलब्ध कराई जाती हैं।

कथा

कथा

किंवदन्ती है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री पार्वती (सती) ने अपने पति महादेव के अपमान के विरोध में दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ कुण्ड में स्वयं कूदकर प्राण आहूति दे दी थी। भगवान विष्णु ने अपने चक्र से महादेव के क्रोध को शान्त करने के लिए सती पार्वती के शरीर के 64 टुकडे कर दिये। वहॉ एक शक्ति पीठ स्थापित हुआ। इसी क्रम में पूर्णागिरि शक्ति पीठ स्थल पर सती पार्वती की नाभि गिरी थी।

कैसे पहुंचे मैय्या के द्वार

कैसे पहुंचे मैय्या के द्वार

पूर्णागिरी माता का धाम टनकपुर में स्थित है..यहां पहुँचने के लिए पहले

कैसे पहुंचे
दिल्ली से टनकपुर के लिए सीधी बस है। टनकपुर पहुंचने के बाद टैक्सी से पूर्णागिरी जा सकते हैं। यह टैक्सी टनकपुर में उपलब्‍ध होती हैं। इसके साथ ही आप अपने वाहन से भी यहां जा सकते हैं।

ट्रेन द्वारा
यहाँ का निकटतम रेलवे स्टेशन टनकपुर है। जो यहाँ से 20 किमी है।

सड़क द्वारा
सड़क से यहाँ आने के लिये मोटर मार्ग ठूलीगाड तक है जोकि टनकपुर से14 किमी है। उसके बाद टुन्यास तक सडक का निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी दूरी 5 किमी है। उसके बाद 3 किमी का रास्ता पैदल ही पूरा करना होता है।

वायु मार्ग द्वार
टनकपुर का नजदीकी हवाई अड्डा पन्तनगर है जो कि खटीमा नानकमत्त्था के रास्ते 121 किमी की दूरी पर है।

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