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अब एक दिन में 50 हजार ही कर सकेंगे भक्त माता वैष्णो के दर्शन

Written By: Goldi

चलों बुलावा आया है माता ने हमें बुलाया है..जोर से बोलो जय माता दी..जब भी आप वैष्णो देवी मंदिर दर्शन करने हेतु पहुंचेगे तो आपको यह राग सुनने को जरुर मिलेगा।

माता का बुलावा आने पर भक्त किसी न किसी बहाने से उसके दरबार पहुँच जाता है। हसीन वादियों में त्रिकूट पर्वत पर गुफा में विराजित माता वैष्णो देवी का स्थान हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहाँ दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं।

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मंदिर के पिंड एक गुफा में स्‍थापित है, गुफा की लंबाई 30 मी. और ऊंचाई 1.5 मी. है। लोकप्रिय कथाओं के अनुसार, देवी वैष्‍णों इस गुफा में छिपी और एक राक्षस का वध कर दिया।

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वैष्णो देवी का भव्य मंदिर कटरा से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। माँ वैष्णो देवी के मदिर को भवन कहते है। यह भवन पहाड़ी पर स्थित है जिसे वैष्णो देवी पहाड़ी कहते है। इस पहाड़ी की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 5200 फिट है।प्रत्येक वर्ष यहाँ लाखो दर्शनार्थी दर्शन करने आते है। लाखो दर्शनार्थी प्रतिवर्ष माँ वैष्णोदेवी आते है। कहते है की माता के दरबार में आने वाले हर श्रद्धालु की मुराद पूरी होती है।

हाल ही में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने माता वैष्णो देवी के दरबार में हजारी लगाने वाले भक्तो की सीमा निर्धारित कर दी है। अब से माता वैष्णो देवी के दरबार में हर रोज सिर्फ 50000 हजार श्रद्धालु ही एक दिन में माता के दर्शन कर सकेंगे।

वैष्णो एवी मंदिर भारत में तिरूमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक मानक धार्मिक तीर्थ-स्थल है। इस मंदिर की देख-रेख श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ मंडल द्वारा की है। इस तीर्थ-यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए अब उधमपुर से कटरा तक ट्रेन चलाई गई है।

कहां से शुरू होती है यात्रा

कहां से शुरू होती है यात्रा

माँ वैष्णो देवी की यात्रा की शुरुआत कटरा से होती है। दर्शनार्थी सबसे पहले कटरा आते है। कटरा से एक निशुल्क यात्रा पर्ची मिलती है। यही से चढाई की शुरुआत होती है। चढाई करने के लिए यह पर्ची कटवानी आवश्यक होती है।PC: KuwarOnline

कटरा से 14 किमी चढ़ाई

कटरा से 14 किमी चढ़ाई

कटरा से माता के भवन तक यह चढाई 14 किलोमीटर की है। यह 14 किलोमीटर की लगभग खड़ी चढाई है।यहाँ दर्शनार्थी रात्रि को भी चढाई करते रहते है। पर्ची लेने से तीन घंटे बाद एक बाण गंगा नामक चेक पॉइंट पर पर्ची को दाखिल करवाना पड़ता है।PC: Nckumbhkar

छ घंटे बाद रद्द हो जाती है पर्ची

छ घंटे बाद रद्द हो जाती है पर्ची

पर्ची लेने के छः घंटे के अंदर यह दाखिला करवाना आवश्यक होता है। अन्यथा पर्ची रद्द हो जाती है। चढाई की पूरी यात्रा में जगह जगह पर खाना व चाय कॉफी इत्यादि की व्यवस्था है। यहाँ रस्ते में अनेक जगह पर क्लॉक रूम है जहा पर दर्शनार्थी निर्धारित शुल्क पर अपना सामान रख सकते है।PC:Ruchiarora1988

घोड़े, पिट्ठू से भी कर सकते हैं यात्रा

घोड़े, पिट्ठू से भी कर सकते हैं यात्रा

यह चढाई चढ़ने के लिए घोड़े, पालकी व पिट्ठू इत्यादि उपलब्ध रहते है। जिसका किराया लगभग 250 रुपये से 1000 रुपये तक होता है।
PC: Anirudh Singh Chauhan

हेलीकाप्टर सुविधा भी उपलब्ध

हेलीकाप्टर सुविधा भी उपलब्ध

यहाँ कटरा से भेरुनाथ मंदिर के कुछ किलोमीटर दूर सांझीछत तक हेलीकॉप्टर की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। जिसका किराया लगभग 1000 रुपये से 7000 रुपये तक होता है। अर्धक्वाँरी से माता के भवन के लिए बेट्री कार भी उपलब्ध है। माता के मंदिर से तीन किलोमीटर दूर भैरोनाथ का मंदिर है। यह तीन किलोमीटर भी चढाई पर है। यहाँ भी घोड़े, पालकी, पिट्ठू इत्यादि निर्धारित शुल्क पर तैयार मिलते है।PC:Designernj

मां वैष्णो देवी

मां वैष्णो देवी

जिस जगह पर मां वैष्णो देवी ने हठी भैरवनाथ का वध किया, वह स्थान आज पूरी दुनिया में 'भवन' के नाम से प्रसिद्ध है। इस स्थान पर मां काली (दाएँ), मां सरस्वती (बाएँ) और मां लक्ष्मी पिंडी (मध्य) के रूप में गुफा में विराजित है। इन तीनों के सम्मि‍लित रूप को ही मां वैष्णो देवी का रूप कहा जाता है।PC:. Raju hardoi

भैरवनाथ

भैरवनाथ

भैरवनाथ का वध करने पर उसका शीश भवन से 8 किमी दूर जिस स्थान पर गिरा, आज उस स्थान को 'भैरोनाथ के मंदिर' के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि मां ने तपस्या के बाद भैरवनाथ ने उनसे युद्द किया था लेकिन भैरवनाथ ने उनसे क्षमा मांग ली थी जिस पर मां ने उसे माफ करते हुए आशीष दिया था मेरे किसी भी भक्त की पूजा तब तक पूरी नहीं होगी जब तक कि लोग मेरे दर्शन के बाद तुम्हारी पूजा नहीं करेंगे। इसलिए मां वैष्णो देवी के दर्शन के बाद लोग जरूर से भैरवनाथ के दर्शन करते हैं।

PC: Devamanamit

नवरात्रि में लगता है मेला

नवरात्रि में लगता है मेला

माँ वैष्णो देवी के दरबार में नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। कई बार तो श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से ऐसी स्थिति निर्मित हो जाती है कि पर्ची काउंटर से यात्रा पर्ची देना बंद करनी पड़ती है।PC:Arnab.pani1

कैसे जाये

कैसे जाये

माता वैष्णोदेवी की यात्रा जम्मू के कटरा से शुरू होती है। कटरा एक गाँव है जो जम्मू से 50 किलोमीटर की दुरी पर है। जम्मू तक नेशनल हाइवे 1 A आता है। उत्तर भारत से आप टैक्सी या कार द्वारा जम्मू के कटरा आ सकते है। कटरा से चढाई शुरू होती है। PC:Devamanamit

कैसे जायें

कैसे जायें

बस द्वारा
कई बसे भारत के प्रमुख शहरों से खासकर उत्तर भारत से सीधे जम्मू आती है। जम्मू से कटरा 50 किलोमीटर टैक्सी इत्यादि करके आना पड़ता है। कुछ बसे सीधे कटरा भी आती है।

हवाई जहाज
जम्मू में जम्मू एयरपोर्ट है। यह एयरपोर्ट सबसे पास में है तथा कतरा से 50 किलोमीटर है। इस एयरपोर्ट पर भारत के सभी बड़े एयरपोर्ट से हवाई जहाज आते है।

रेल द्वारा
गर्मियों में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। तब दिल्ली से जम्मू के लिए विशेष ट्रैन चलाई जाती है। जम्मू में ब्राडगेज लाइन है। ऊधमपुर से भी कतरा तक रेल संपर्क है।PC:Kshekhawat

कब जाएँ

कब जाएँ

वैसे तो माँ वैष्णो देवी के दर्शनार्थ वर्षभर श्रद्धालु जाते हैं परंतु यहाँ जाने का बेहतर मौसम गर्मी है। सर्दियों में भवन का न्यूनतम तापमान -3 से -4 डिग्री तक चला जाता है और इस मौसम से चट्टानों के खिसकने का खतरा भी रहता है।PC:Devamanamit

कहां रुके

कहां रुके

माता के भवन में पहुँचने वाले यात्रियों के लिए जम्मू, कटरा, भवन के आसपास आदि स्थानों पर माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की कई धर्मशालाएँ व होटल हैं, ये धर्मशालाए माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की है। यहाँ पर कुछ प्राइवेट होटल भी उपलब्ध है। इनमे एडवांस बुकिंग की व्यवस्था भी रहती है।PC: Abhishek Chandra

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