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होली की शाम मस्तमौला हाथियों के नाम...जयपुर का 'Elephant Festival', जानिए तारीख और विशेषताएं

राजस्थान की होली थोड़ी मस्ती, थोड़ा हंसी-मजाक, थोड़ी छेड़खानी के साथ ही ढेर सारी संस्कृति और कला का मिश्रण होती है। देशभर में होली जहां सिर्फ गुलाल और रंगों से मनायी जाती है वहीं राजस्थान में होली के दिन भी शाही परंपराओं और संस्कृति का पालन किया जाता है। इनमें से ही एक शानदार परंपरा होती है, जयपुर का हाथी महोत्सव या Elephant Festival।

सालों से इस शानदार उत्सव को जयपुर में बड़े ही शाही अंदाज में मनाया जाता है, जिसमें होली के ढेर सारे रंग तो होते ही हैं साथ में हिस्सा लेते हैं मस्तमौला हाथी और शाही परिवार। होली के उत्सव के दौरान जयपुर और उदयपुर के सिटी पैलेस का माहौल ही कुछ अलग होता है, जिसे आप साल के दूसरे समय में अनुभव नहीं कर सकते हैं।

कैसा होता है जयपुर का Elephant Festival?

जयपुर का Elephant Festival एक बहुत ही सुन्दर और राजस्थान की कला व संस्कृति को दुनिया के सामने लाने वाला उत्सव होता है। इस दिन रंग-बिरंगे और आकर्षक तरीकों से हाथियों को सजाया जाता है। उन्हें कई तरह के आभूषण पहनाए जाते हैं, जिस वजह से वे बड़े ही राजसी नजर आते हैं। जयपुर की गलियों में अपनी मस्तमौला चाल में जब ये सजे-धजे हाथी निकलते हैं, तो इन्हें देखने वाला हर व्यक्ति बस अपलक देखता ही रह जाता है।

जयपुर के सिटी पैलेस मैदान में यह फेस्टिवल आयोजित किया जाता है, जिसमें आज भी हाथियों का पोलो मैच खेला जाता है। हाथियों और इंसानों के बीच रस्साकस्सी का खेल खेला जाता है। इसके साथ ही होता है घोड़ों और ऊंटों की परेड। कलाकार यहां लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं।

जयपुर में आयोजित होने वाले Elephant Festival में हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में विदेशों से भी पर्यटक यहां आते हैं। होली का त्योहार सिर्फ जयपुर या उदयपुर की गलियों में ही नहीं बल्कि सिटी पैलेस के मैदानों में भी आयोजित होता है, जिसमें मेहमानों के साथ शाही परिवार के सदस्य भी हिस्सा लेते हैं। यहां प्राकृतिक रंगों से होली तो खेली ही जाती है, साथ में फूलों की होली भी खेली जाती है।

पारंपरिक नृत्य के साथ होता है होलिका दहन

पूरे राजस्थान में होली और होलिका दहन के साथ ही वहां की पारंपरिक नृत्य शैली घूमर और कलबेलिया जुड़ी हुई है। उदयपुर के सिटी पैलेस में मेवाड़ राजघराना शानदार होलिका दहन करता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां जमा होते हैं।

वहीं जयपुर में पारंपरिक नृत्य के साथ होलिका जलायी जाती है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक माना जाता है। इसके साथ ही अगले दिन मनायी जाती है धुलंडी...जिसमें लोग जमकर एक-दूसरे को रंगों और गुलाल से सराबोर कर देते हैं।

इस साल जयपुर का Elephant Festival 14 मार्च को सिटी पैलेस के मैदान में मनाया जाएगा।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जयपुर में Elephant Festival के दौरान कुछ ऐसा माहौल बन जाता है, जिसमें जिन्दगी में एक बार जरूर शामिल होना चाहिए और कुछ ऐसी यादें बनती हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

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