साल 1960 में रिलीज हुई दिलीप कुमार-मधुबाला स्टारर आईकॉनिक फिल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' का वह दृश्य जिसमें अनारकली शीश-महल में 'जब प्यार किया तो डरना क्या...' गाना गाती है, आपको जरूर याद होगा। इस फिल्म के लिए खासतौर पर उस शीश-महल को तैयार किया गया था। फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद उस शीश महल को तोड़ भी दिया गया था।
आज उस शीश महल को देखना संभव नहीं है लेकिन जयपुर में एक ऐसी जगह है जहां अनारकली की ये यादें आपके मन में फिर से ताजी हो जाएंगी। जी नहीं, हम आमेर किले के शीश महल के बारे में बात नहीं कर रहे हैं बल्कि द लीला पैलेस के मोहन महल रेस्तरां के बारे में बात कर रहे हैं। मगर रुकिये, इस रेस्तरां की खासियत यहीं खत्म नहीं हो जाती है। ज़रा कल्पना किजीए सिर्फ मोमबत्तियों की रोशनी से जगमगा रहे इस शीश महल में बैठकर अपने पार्टनर के साथ डिनर करना कितना रोमांटिक होता होगा।
मोमबत्तियों से हर शाम होती है रोशन
मोहन महल रेस्तरां जयपुर के 'द लीला पैलेस' का रेस्तरां है। जी हां, यह उसी पैलेस होटल का एक ब्रांच है जो हाल में बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और आप सांसद राघव चड्ढ़ा की शादी की वजह से काफी चर्चाओं में छाया हुआ था। जयपुर में मौजूद इस रेस्तरां की सबसे बड़ी खासियत है कि यह बिजली के किसी बल्ब से नहीं बल्कि मोमबत्ती की रोशनी से हर शाम को जगमगाता है।
आमेर किले के शीश महल के तर्ज पर तैयार किये गये इस रेस्तरां की खूबसूरती को मोमबत्ती की लौ कई गुना बढ़ा देती है। दिन के समय इस तरह की खूबसूरती को महसूस करना मुश्किल होता है, इसलिए इस रेस्तरां को सूरज ढ़लने के बाद ही ग्राहकों के लिए खोला जाता है। यह रेस्तरां द लीला पैलेस, जयपुर के लॉबी लेवल में मौजूद है।
आमेर के किले से है प्रेरित
मोहन महल का शीश महल आमेर के किले में मौजूद शीश महल से प्रेरित है। मोहन महल आमेर किला के शीश महल से सिर्फ प्रेरित ही नहीं है बल्कि इसका निर्माण भी उसी परिवार के सदस्यों ने किया है, जिन्होंने आमेर किला के शीश महल को बनाया था। मोहन महल के शीश महल को तैयार करने में करीब 3 सालों का समय लगा था।
बताया जाता है कि इस रेस्तरां में कांच के करीब 350 टुकड़ों का इस्तेमाल का शीश महल को पारंपरिक ठिकरी कलाकारी से तैयार किया गया है। कांच को इस तरह से लगाया गया है कि शाम के बाद मोमबत्ती की जगमगाती रोशनी से इसकी सुन्दरता और भी बढ़ जाएगा।
शाही राजपूती व्यंजनों में एक्सपर्ट
जयपुर मोहन महल रेस्तरां ने पारंपरिक भारतीय व राजपुती व्यंजन परोसने में महारथ हासिल किया हुआ है। शाम के वक्त मोमबत्तियों की हल्की रोशनी में जगमगाते शीश महल (मोहन महल) रेस्तरां में हल्के संगीत के साथ जब पारंपरिक भोजन की थाली परोसी जाती है तब किसी रॉयल परिवार जैसा है अनुभव होता है।
यह रेस्तरां शाम को 7 से रात को 11 बजे तक खुला रहता है। चुंकि इस रेस्तरां में ढेरों मोमबत्तियां जलायी जाती हैं, इसलिए 12 साल से कम उम्र के बच्चों को यहां आने की अनुमति नहीं दी जाती है। बच्चों के दौड़-धुप करने से उनके जल जाने का खतरा बना रहता है।
स्पेशल सिग्नेचर व्यंजन
- मट्ठा सांगरी की सीख
- बंजारा चाप
- शेखावटी नली गोश्त
- दाना मेथी
- किशमिश की सब्जी
रेस्तरां में टेबल रिजर्व करने और इस रेस्तरां के विषय में अधिक जानकारी के लिए आप द लीला पैलेज जयपुर के मोहन महल रेस्तरां के आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।



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