राजस्थान के हर शहर में कोई न कोई किला होता है, जिससे जुड़ा इतिहास लोगों को अचंभित कर देता है। लेकिन आज हम आपको राजस्थान के जिस शानदार महलनुमा संरचना के बारे में बताने जा रहे हैं, वह किसी राजा-महाराजा का किला नहीं बल्कि एक हवेली है।
राजस्थान की सुनहरी नगरी जैसलमेर में मौजूद पटवों की हवेली, ऐसी ही एक जगह है जिसके साथ किसी राजा या रजवाड़े का नहीं बल्कि एक व्यवसायी का नाम जुड़ा हुआ है। जैसलमेर आने वाला हर पर्यटक पटवों की हवेली में घूमें बिना यहां से वापस नहीं जाता है। आइए आपको भी बताते हैं कि जैसलमेर की ट्रिप में मस्ट विजीट क्यों है पटवों की हवेली!

एक नहीं 5 हवेलियों का है समूह
पटवों की हवेली कोई एक हवेली नहीं बल्कि एक जैसी दिखने वाली 5 हवेलियों का समूह है। इन शानदार हवेलियों का निर्माण 19वीं शताब्दी में एक अमीर व्यापारी गुमान सिंह पाटवा ने अपने 5 बेटों के लिए करवाया था, जो एक प्रसिद्ध आभूषण व्यापारी था।
माना जाता है कि 1800-1860 के बीच इन पांचों हवेलियों का निर्माण पाटवा जैन भाईयों लिए करवाया गया था। समूह की हर एक हवेली की वास्तुकला, झरोखे से लेकर हवेली के खंभों और दिवारों तक में इतनी बारीकी से काम किया गया है कि इन्हें देखने वाला बस देखता ही रह जाएगा। सभी पांचों हवेलियों को मिलाकर इस समुह में कुल 60 झरोखे और बराम्बे हैं।

30 सालों में बना डिजाइन
कहा जाता है कि पटवों की हवेली का डिजाइन ही इतना अनोखा है कि इन हवेलियों का सिर्फ डिजाइन बनाने में लगभग 30 सालों का समय लग गया था। इसके बाद अगले 30 सालों में इन हवेलियों का निर्माण कार्य पूरा हो सका था। पांचों हवेलियां मिलाकर जैसलमेर में सबसे अनोखी हवेली का डिजाइन बनाती हैं।
इन हवेलियों में सबसे बड़ी और प्रमुख हवेली पहली हवेली है, जिसे कोठारी की पाटवा हवेली के नाम से भी जाना जाता है। पटवों की हवेली को 'ब्रोकेड मर्चेंट की हवेली' के नाम से भी जाना जाता है।

पटवों की हवेली से जुड़े दिलचस्प तथ्य
- पटवों की हवेली समूह की सभी पांच हवेलियों को कांच और चित्रों से सजाया गया है। लेकिन सबसे खास बात है कि हर हवेली में अलग-अलग शैली का इस्तेमाल कर उसे सजाया गया है।
- पटवों की हवेली में एक संग्रहालय भी है, जिसे आम लोगों के लिए खोला जाता है। यहां पाटवा परिवार और गुजरे जमाने के राजस्थान से जुड़ी कई तरह की चीजें रखी हुई हैं, जिन्हें देखा जा सकता है।
- इन हवेलियों की सबसे शानदार चीज इनकी वास्तुकला है। हवेली के हर दरवाजे पर बारीक डिजाइन बनाया गया है, जो इसकी सुन्दरता में चार चांद लगा देता है।

- स्थानीय लोगों का दावा है कि पाटवा अफीम का व्यापार कर काफी दौलतमंद बन गये थे, जिससे उन्होंने इन हवेलियों का निर्माण करवाया।
- पटवों की हवेली के दरवाजे सुबह 9 बजे से खोल दिये जाते हैं। इसके बाद दिनभर पर्यटक इनका दिदार कर सकते हैं। शाम को 6.30 बजे हवेलियों को बंद कर दिया जाता है।
- पटवों की हवेली का प्रवेश शुल्क ₹20 प्रति व्यक्ति है।



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