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इस गांव का हर नवविवाहित जोड़ा श्मशान घाट में करता है शादी के बाद पहली पूजा

शादी-विवाह के बाद नवविवाहित जोड़े का घर-परिवार की कुल देवी या देवता के मंदिर में दर्शन और पूजा करने की परंपरा भारत के लगभग हर घर में है। धूम-धाम से शादी के बाद जब नयी दुल्हन का गृह प्रवेश होता है तो उसे घर में लक्ष्मी का आगमन माना जाता है। इसके बाद ही नवविवाहित जोड़े को लेकर घर महिलाएं कुल देवी या देवता की पूजा के लिए जाते हैं।

Shamshan Chhatari

लेकिन क्या कभी किसी ऐसे गांव के बारे में सुना है जहां नवविवाहित जोड़ा शादी के बाद अपनी पहली पूजा श्मशान घाट में करता है? वह भी शादी के लंबे समय बाद नहीं बल्कि शादी के ठीक अगले दिन ही...। जी हां, राजस्थान में ऐसा ही एक गांव है जहां आज भी हर नवविवाहित जोड़े को अपनी शादी के बाद पहली पूजा श्मशान घाट में जाकर करनी पड़ती है।

आखिर क्यों है ऐसी अजीब परंपरा और क्या है श्मशान घाट में जिसकी पूजा नवविवाहित जोड़ा करता है!

कहां है ऐसा अनोखा गांव?

राजस्थान के जिस गांव में यह अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है वह जैसलमेर के पास स्थित है। इस गांव का नाम बड़ा बाग गांव है, जो जैसलमेर से करीब 6 किमी दूर स्थित है। इस गांव में शादी के आने वाला हर नवविवाहित जोड़ा गृह प्रवेश के बाद शादी के बाद अपनी पहली पूजा इस गांव के श्मशान घाट में जाकर करता है।

Bada bagh gaon

अगर किसी जोड़े की शादी इस गांव में नहीं होकर किसी दूसरी जगह हुई हो तब भी वह जोड़ा एक बार इस श्मशान घाट में आकर पूजा जरूर करता है। इतना ही नहीं, इस गांव के किसी घर में कोई भी शुभ काम करने से पहले श्मशान घाट में जाकर पूजा करने की परंपरा है। है ना बड़ी अजीब परंपरा!

क्या है श्मशान घाट में जिसकी होती है पूजा?

Bada bagh gaon chhatri

बड़ा बाग गांव के जिस श्मशान घाट में जाकर नवविवाहित जोड़ा पूजा करता है या किसी भी शुभ काम से पहले पूजा की जाती है, वह कोई आम श्मशान घाट नहीं है। दरअसल, वह श्मशान घाट राजपरिवार का खानदानी श्मशान घाट है। यहां 103 राजा और रानियों की याद में छतरियां बनायी गयी हैं, जो वास्तुकला का उत्कृष्ठ नमुना पेश करती है। इन सभी छतरियों के नीचे उन राजा और रानियों की समाधियां भी हैं। जैसलमेर के इस अनोखे गांव में शादी कर आने वाला हर नवविवाहित जोड़ा पहले इस श्मशान घाट में जाकर इन राजा-रानियों की समाधियों पर पूजा करता है।

क्यों नवविवाहित जोड़ा जाता है श्मशान घाट?

Bada bagh chhatri

आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि गांव में इतने सारे मंदिर होने के बावजूद नवविवाहित जोड़ा श्मशान घाट में राजा-रानियों की समाधि पर जाकर ही क्यों पूजा करता है? सदियों से इस गांव में परंपरा चली आ रही है कि शादी के बाद पूर्णिमा के दिन जो पूजा होती है, वह नवविवाहित जोड़ा श्मशान घाट में जाकर ही करता है। नवविवाहित जोड़ा श्मशान घाट में मौजूद राजा-रानियों की 103 छतरियों पर जाकर उनसे आर्शिवाद लेता है। कहा जाता है कि अपने नये जीवन की शुरुआत में दिवंगत राजा-रानियों का आर्शिवाद लेने से उनका जीवन सुखमय कटता है।

भूतिया है यह श्मशान घाट

Haunted shamshan

श्मशान घाट या कब्रिस्तान में लोगों को ऐसे भी डर ही लगता है। यह शाही श्मशान घाट भी उससे अलग नहीं है। रात के समय इन छतरियों के पास से होकर कोई भी नहीं गुजरना चाहता है। स्थानीय लोगों का कहना है उन्हें रात के समय इन छतरियों के पास से पायल के छनकने, घुड़सवारों के घोड़ों की टाप और हुक्का की गुड़गुड़ाहट सुनाई देती है। इस वजह से शाम के बाद श्मशान घाट में छतरियों के आस-पास कोई नहीं जाना चाहता है।

कैसे पहुंचे जैसलमेर के छतरियों वाले गांव में?

राजस्थान के बड़ा बाग गांव में राजा-रानियों की याद में बनाए गये 103 छतरियां हैं। राजस्थान की वास्तुकला देखने लायक होती है और ये छतरियां भी उनसे अलग नहीं है। इस गांव तक पहुंचने के लिए आपको पहले जैसलमेर आना पड़ेगा। जैसलमेर स्टेशन से बड़ा बाग गांव में पहुंचने के लिए आपको कैब या लोकल गाड़ियां लेनी होगी। चुंकि गांव के लोग इन छतरियों के पास सूरज ढलने के बाद नहीं जाना चाहते हैं, इसलिए शाम के बाद वह जगह सुनसान हो जाती होगी। इस वजह हमारी सलाह है कि दिन के समय ही इस जगह पर घूमना अच्छा है।

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