समुद्र के खारे या नमकीन पानी के बारे में आपने जरूर सुना और जाना होगा। गुजरात में नमक के रेगिस्तान कच्छ के रण के बारे में भला कौन नहीं जानता। लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे देश में बीच रेगिस्तान में एक ऐसा झील है, जिसका पानी पूरी तरह से खारा है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस खारे पानी से पूरे साल नमक का उत्पादन भी होता है, जिसका इस्तेमाल आसपास के राज्यों के लोग भी करते हैं।
हम बात कर रहे हैं राजस्थान के सांभर झील की। जयपुर से महज 80 किमी की दूरी पर मौजूद सांभर, जिसे 'Salt City' के नाम से भी जाना जाता है। पिछले कई सालों से रेगिस्तान में मौजूद इस झील से नमक का उत्पादन होता आ रहा है। सिर्फ नमक का उत्पादन के लिए ही नहीं बल्कि यह झील विदेशी पक्षियों के बसेरे के रूप में भी काफी चर्चित है। इस झील में पिंक फ्लेमिंगो देखने के लिए आने वाले बर्ड वॉचर की संख्या काफी ज्यादा होती है।

हजारों सालों से नमक उत्पादन कर रहा है सांभर झील
राजस्थान का सांभर गांव, जिसके नाम से ही इस झील का नाम पड़ा है। इस गांव पर सैंकड़ों-हजारों सालों पहले चौहान वंश का अधिकार था। इसी वंश ने सांभर झील के विकास में अपना योगदान दिया था, जिसकी वजह से नमक उत्पादन में भी वृद्धि हुई थी। यहां नमक का उत्पादन पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से ही की जाती है।
झील के एक हिस्से के पानी को प्राकृतिक तरीके से सुखाकर वहां जमे नमक को बाहर निकाला जाता है। फिर उसे रिफाइनरी में भेजकर उस नमक को शुद्ध और साफ करके पैकेट में भरकर मार्केट में भेजा जाता है। खास बात है कि झील से नमक निकालने का काम किसी मशीन द्वारा नहीं बल्कि मजदूर हाथों से करते हैं।
कैसे बनता है नमक?
सांभर झील का कुल क्षेत्रफर करीब 190-230 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यह झील जयपुर, अजमेर और नागौर जिले में फैली हुई है। समुद्रतल से करीब 1200 फीट की ऊंचाई पर यह झील मौजूद है। झील के पानी से नमक उत्पादन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक होती है। नमक बनाने के लिए झील के खारे पानी को झील में ही छोटे-छोटे कुएं और क्यारियां बनाकर उनमें खारे पानी को भरकर छोड़ दिया जाता है।
लगभग 1 महीने तक यह पानी यूं ही सुखता रहता है। जब पानी पूरी तरह से सुख जाता है तो उसके तल में कीचड़ के नीचे नमक की परत बिछी मिलती है। पहले गंदी परत को साफ किया जाता है और उसके बाद नीचे जमा नमक के ढेलों को बाहर निकालकर उन्हें साफ व शुद्ध कर पैकिंग के लिए फैक्ट्री में भेज दिया जाता है।
झील में कहां से आता है खारा पानी?
अब तक आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि समुद्र में खारा पानी होना तो स्वाभाविक माना जाता है लेकिन रेगिस्तान (राजस्थान) के झील में खारा पानी कहां से आता होगा? दरअसल, सांभर झील में लगभग 6 नदियों रुपनगढ, मेंथा, खारी, खंड़ेला आदि का पानी आकर गिरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली के गर्तों में भरा हुआ गाद ही इस नमक का असली स्रोत है।
गाद में घुला सोडियम बारिश की पानी के साथ बहकर झील में नदियों के रास्ते पहुंचता रहता है, जिससे झील का पानी खारा हो जाता है। इस झील में पूरे साल नमक का उत्पादन होता है और पूरे भारत का लगभग 9% नमक सांभर झील से ही निकलता है।
यहां काम करने वाले मजदूरों का दर्द?
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि नमक की झील में काम करने वाले मजदूरों का अंतिम संस्कार करना मुश्किल भरा काम होता है। दरअसल, लगातार नमक वाले पानी में लगातार काम करने की वजह से जब किसी मजदूर की मौत हो जाती है, तब अंतिम संस्कार के समय मजदूरों के हाथ-पाव वाले हिस्से नहीं जलते हैं। इन्हें जलाना बहुत मुश्किल भरा काम होता है। ऐसी स्थिति में मजदूरों के अधजले शरीर को नमक डालकर मिट्टी में दफना दिया जाता है।
देवी शाकंभरी का मंदिर
सांभर झील के पास ही देवी शाकंभरी का मंदिर है। यह मंदिर सांभर शहर के बाहरी हिस्से में मौजूद है, जो लगभग 2500 वर्ष पुराना बताया जाता है। स्थानीय लोग नियमित रूप से देवी शाकंभरी के मंदिर में दर्शन करने आते रहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धरती पर एक बार 100 वर्षों तक बारिश नहीं हुई थी। तब ऋषि-मुनियों ने देवी भगवती की उपासना की और उन्होंने मां शाकंभरी के रूप में धरती पर अवतार लिया।
उनकी कृपा से ही धरती पर वर्षा हुई और अन्न-जल का संकट खत्म हुआ। लेकिन कुछ समय बाद लोगों के बीच प्राकृतिक संपदा को लेकर झगड़े होने लगे। तब माता शाकंभरी ने ही यहां की प्राकृतिक संपदा को नमक में बदल दिया, जिससे सांभर झील की उत्पत्ति हुई।



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