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सीताकूप, 32 सीढ़ियां चढ़कर सिंहद्वार और धरती के ऊपर नहीं बिछाया गया कंक्रीट...और क्या है राम मंदिर में खास!

राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह 22 जनवरी को होगा। इस समारोह के लिए पूरी अयोध्या नगरी में ठीक उसी तर्ज पर तैयारियां चल रही है, जैसी 14 साल का वनवास काटकर भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने के समय किया गया होगा। काशी और अयोध्या के विद्वानों समेत कई अन्य जगहों के विद्वानों का समूह इस अनुष्ठान को पूरा करेगा।

singha dwar of ram mandir

देशभर से संतों की टोली अयोध्या पहुंच रही है। राम मंदिर का उद्घाटन होने के बाद अयोध्या जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड तोड़ने वाली है। उससे पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 20 प्वाएंट्स में राम मंदिर से जुड़ी सभी खासियतों को साझा किया है। राम मंदिर की लंबाई-चौड़ाई से लेकर खंभों की संख्या, पौराणिक काल का सीताकूप, परकोटे के चारों तरफ कितने और किसके मंदिर बनाए गये हैं, कितनी जमीन का इस्तेमाल मंदिर बनाने के लिए किया गया है आदि सभी जानकारियां शेयर की गयी हैं।

आइए एक नजर में जानते हैं राम मंदिर से जुड़ी सभी जानकारियां -

ram mandir photo from ayodhya

1. मंदिर परम्परागत नागर शैली में बनाया जा रहा है।

2. मंदिर की लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट तथा ऊंचाई 161 फीट रहेगी।

3. मंदिर तीन मंजिला रहेगा। प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट रहेगी। मंदिर में कुल 392 खंभे व 44 द्वार होंगे।

4. मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालरूप (श्रीरामलला सरकार का विग्रह) तथा प्रथम तल पर श्रीराम दरबार होगा।

5. मंदिर में 5 मंडप होंगे : नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप।

6. खंभों व दीवारों पर देवी-देवता तथा देवांगनाओं की मूर्तियां उकेरी जा रही हैं।

7. मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से, 32 सीढ़ियां चढ़कर सिंहद्वार से होगा।

8. दिव्यांगों एवं वृद्धों के लिए मंदिर में रैम्प व लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी।

9. मंदिर के चारों ओर आयताकार परकोटा रहेगा। चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट होगी।

10. परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, मां भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण होगा। उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर रहेगा।

11. मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान रहेगा।

12. मंदिर परिसर में प्रस्तावित अन्य मंदिर- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित होंगे।

13. दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णो‌द्धार किया गया है तथा वहां जटायु प्रतिमा की स्थापना की गई है।

14. मंदिर में लोहे का प्रयोग नहीं होगा। और ना ही धरती के ऊपर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है।

15. मंदिर के नीचे 14 मीटर मोटी रोलर कॉम्पेक्टेड कंक्रीट (RCC) बिछाई गई है। इसे कृत्रिम चट्टान का रूप दिया गया है।

16. मंदिर को धरती की नमी से बचाने के लिए 21 फीट ऊंची प्लिंथ ग्रेनाइट से बनाई गई है।

17. मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अग्निशमन के लिए जल व्यवस्था तथा स्वतंत्र पॉवर स्टेशन का निर्माण किया गया है, ताकि बाहरी संसाधनों पर न्यूनतम निर्भरता रहे। यानी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मंदिर को स्वयं ही सक्षम बनाया गया है।

18. 25 हजार क्षमता वाले एक दर्शनार्थी सुविधा केंद्र (Pilgrims Facility Centre) का निर्माण किया जा रहा है, जहां दर्शनार्थियों का सामान रखने के लिए लॉकर व चिकित्सा की सुविधा रहेगी।

19. मंदिर परिसर में स्नानागार, शौचालय, वॉश बेसिन, ओपन टैप्स आदि की सुविधा भी रहेगी।

20. मंदिर का निर्माण पूर्णतया भारतीय परम्परानुसार व स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है। पर्यावरण-जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुल 70 एकड़ क्षेत्र में 70% क्षेत्र सदा हरित रहेगा।

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