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बिना परमिशन के भारत की इन जगहों पर भारतीय पर्यटक है बैन

Written By: Goldi

विविधतायों से भरा खूबसूरत देश भारत देशी समेत विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है...भारत के ऐतिहासिक किले, हिल स्टेशन आदि पर्यटकों को खूब अपनी ओर लुभाते हैं। जिन्हें घूमने के लिए हर साल लाखों की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं।

भारत में कुछ ऐसे भी हिस्से है, जिन्हें घूमने के लिए पर्यटकों को एक परमिट की जरूरत होती है। जी हां स्थानीय लोगों को छोड़ दिया जाए तो इन जगहों पर जाने के लिए इनर लाइन परमिट लेना होता है। ये कानून देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए तमाम टूरिस्ट्स के लिए मान्य है।

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बताया जाता है कि ये सभी प्लेसेस दूसरे देशों की सीमाओं के नजदीक स्थित हैं, ऐसे में सुरक्षा कारणों से बगैर आदेश के एंट्री नहीं मिलती है। हालांकि, परमिशन लेकर जाने वाले लोग एक तय समय सीमा तक ही इन क्षेत्रों में घूम सकते हैं। इसके बाद टूरिस्ट को उन प्लेसेस को देखकर वापस लौट जाना होता है। ऐसे में आज हम आपको भारत के 5 ऐसे प्लेसेस के बारे में बताने जा रहे हैं।

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क्या है इनर लाइन परमिट 
इनर लाइन परमिट भारत का आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जो देश और विदेशों के टूरिस्ट्स को प्रोटेक्टेड एरिया में जाने के लिए परमिट देता है। ये परमिट तय समय सीमा और कुछ लोगों के लिए ही मान्य होता है। मुख्यत: ये परमिट भारत में इस समय सिर्फ तीन राज्यों - मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में ही पूर्ण रुप से लागू है। हालांकि, इन राज्यों के अलावा दूसरे देशों के बॉर्डर लाइन पर भी इस परमिट की आवश्यकता होती है।

अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश

पूर्वोत्तर भारत में स्थित अरुणाचल प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति लोगों को आकर्षित करती है। अरुणाचल में एक तरफ तो विभिन्न जनजातीय समूहों के उत्सव, उनके लोक संगीत की जीवंत परंपरा है तो दूसरी तरफ हरे-भरे ऊँचे-ऊँचे पहाड़, घने जंगल और उसके बीच से गुजरने वाली बलखाती सड़कें हैं जो लोगों को बरबस मुग्ध कर देती हैं। पूरे भारत में त्वांग में सबसे पहले सूरज निकलता है और इसे निहारने के लिए पर्यटक भी खूब आते हैं। अरुणाचल जाने के लिए भारतीय नागरिकों को भी इनरलाइन परमिट लेना होता है। अपना परिचय देने पर अरुणाचल हाउस से यह सहज ही मिल जाता है। पर्यटक इसे दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में भी प्राप्त कर सकते हैं।PC:Dhurba Jyoti Baruah

क्या देखें

क्या देखें

तवांग, रोइंग, इटानगर, बोमडिला, ज़ीरो, भालुकोंग, पासीघाट, अनीनी, सेसा ऑर्किड अभयारण्य, डारंग ज़ोंग, मोन्पा विलेज, सेला झील, नुरानानग फॉल्स, पेंगा तेंग झील आदि।PC: Saurabhgupta8

कोहिमा , नागालैंड

कोहिमा , नागालैंड

कोहिमा नागालैंड की राजधानी हैं। इस देश में अधिकतर आदिवासी रहते है, जिनकी संस्कृति काफी रंग-बिरंगी है। इसी अनोखी संस्कृति को देखने के लिए यहां टूरिस्टों पहुंचते है। इस खूबसूरत शहर को एशिया का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है लेकिन यहां पहुंचने के लिए आपको इनर लाइन परमिट लेना पड़ेगा।PC:Sharada Prasad CS

क्या देखें

क्या देखें

कोहिमा, दीमापुर, मोकोकचुंग, वोखा, सोम, फैक, किपैर आदि।

PC:PP Yoonus

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप जिसका अर्थ है "एक लाख द्वीप" यह भारत का एक संघ राज्य है। लक्षद्वीप जो पहले लक्कादीवस के नाम से जाना जाता था, 39 द्वीपों और छोटे द्वीपों का एक समूह है, जो तेजी से एक पर्यटक आकर्षण बन गया है, विशेष रूप से ये जगह उन लोगों के लिए जो प्रकृति को पसंद करते हैं और एकंतमय सूरज और रेत के आस पास छुट्टी मनाने का विचार कर रहे हैं, तो यहां पहुंचने के लिए पर्यटकों को इनर लाइन परमिट लेना पड़ेगा।PC: wikimedia.org

क्या देखें

क्या देखें

बंगारम द्वीप, मिनिकॉय द्वीप, कल्पनी द्वीप, अगत्ति द्वीप, कवरत्ती द्वीप लैगून, कदमत द्वीप, पिटी बर्ड अभयारण्य आदि।PC: CSP_4728

आइजोल

आइजोल

आइजोल भारत के मिज़ोरम प्रान्त की राजधानी है। यह ऐज़ौल ज़िले का मुख्यालय भी है यह कर्क रेखा के ठीक उपर है। मिजोरम की राजधानी आइजोल में कई शानदार स्थान हैं, जिसे देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। इनमें म्यूजियम, हिल स्टेशन, स्थानीय लोग और उनकी कला शामिल है। हालांकि, मिजोरम में भी इनर लाइन परमिट लागू है। इस वजह से यहां लिमिटेड टाइम पीरियड के लिए कोई व्यक्ति परमिशन लेकर जा सकता है।

लोकतल लेक

लोकतल लेक

लोकतल लेक भारत के मणिपुर राज्य में है, यहाँ पर सबसे बड़े साफ़ पानी के रूप में लेक है, यहाँ पर कई जगह पर भूखंड के तैरते हुए टुकड़े दिखाई देते ही, जिसे अंदर पानी भरा हुआ होता है। इस टुकडो को फुम्दी के नाम से जाना जाता है, ये टुकड़े मिट्टी, पेड़ पौधो को मिलकर बना है। इस झील को देखने के लिए कई लोग आते है, और इस झील को देखने के लिए भी इन लाइन परमिट लेने की जरुरत पड़ती है।

PC:Sharada Prasad CS

चांगु लेक

चांगु लेक

चांगु लेक सिक्किम का प्रमुख पर्यटन स्थल है ! सर्दियों में इस झील का पानी पूरी तरह से जम जाता है । चांगु लेक पर भी आने के लिए इनर लाइन परमिट लेने की आवश्यकता होती है।PC: Arup Ghosh

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