सावन की शुरुआत हो चुकी है और महादेव की नगरी में भक्तों की भीड़ का उमड़ना भी शुरू हो जाएगा। इस साल सावन का महीना 22 जुलाई से 19 अगस्त तक रहेगा। सावन के महीने में यूं तो महादेव के सभी मंदिरों में उनके भक्तों की भीड़ उमड़ती है लेकिन काशी विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की बात ही अलग होती है। यहां आने वाले भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इस बात का खास ख्याल रखते हुए दोनों मंदिर प्रशासन की तरफ से हर साल खास व्यवस्थाएं की जाती हैं।
इस साल भी विश्वनाथ धाम और महाकालेश्वर मंदिर में सावन को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गयी हैं। तो अगर आप भी इस साल सावन और भादो में से किसी भी महीने में इन दोनों मंदिर में कहीं भी जाने के बारे में सोच रहे हैं या कांवड़ अथवा डाक बम की यात्रा पर जाने वाले हैं तो उससे पहले इन मंदिर की विशेष तैयारियों के बारे में जरूर जान लें।

काशी विश्वनाथ धाम :
कांवड़ लेकर नहीं मिलेगी एंट्री
मीडिया से बात करते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि सावन सावन के महीने में आने वाले बड़ी संख्या में कांवड़ियों को कांवड़ लेकर मंदिर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसा उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही किया गया है।
शिवभक्तों को कांवड़ मंदिर में निर्धारित स्थान पर ही रखकर प्रवेश करना होगा। आम भक्तों की लाइन में लगकर ही कांवड़ियां भी भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक कर सकेंगे। लाइन में कांवड़ लेकर जाने से न सिर्फ कांवड़ियों बल्कि आम भक्तों को भी परेशानी होती है।
डाक बम के लिए है विशेष व्यवस्थाएं
कांवड़िये जहां आम भक्तों के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे वहीं डाक बम के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश की विशेष व्यवस्थाएं की गयी हैं। डाक बम जाने वाले शिवभक्तों को बिना किसी लाइन में लगे ही मंदिर में प्रवेश करने दिया जाएगा। 22 जुलाई से सावन शुरू हो गया है और पहला दिन ही सोमवार होने के कारण काशी विश्वनाथ मंदिर में लगभग 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना भी जतायी जा रही है।
काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं के लिए जो खास व्यवस्थाएं की गयी हैं उनमें जिग-जैग बैरिकेडिंग भी शामिल है। ताकि भक्तों को लाइन में लगकर खड़ा न रहना पड़े। इसके अलावा गर्मी को ध्यान में रखते हुए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं को ओआरएस के घोल भी दिये जाएंगे।

VIP और स्पर्श दर्शन पर रोक
सावन के महीने में अत्यधिक भीड़ होने की वजह से मंदिर में VIP और स्पर्श दर्शन पर पूरी तरह से रोक लगी रहेगी। मंदिर में सावन से संबंधित सभी व्यवस्थाएं 22 जुलाई से ही लागू कर दी जाएंगी, जो अगले 1 महीने तक लागू रहेगी।
हर सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम मंदिर में होने वाली विशेष व्यवस्थाएं :
- हर सोमवार को दैनिक पास निरस्त रहेंगे।
- सोमवार को मंदिर के कॉरिडोर में लॉकर सुविधा भी किसी भी श्रद्धालु को नहीं दी जाएगी।
- सोमवार को मंदिर आने वाले श्रद्धालु बैग, मोबाइल फोन, मोबाइल एक्सेसरीज और अन्य किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं ला सकेंगे।
- सोमवार को मंदिर में पूजन सामग्री जैसे फूल, माला, गंगाजल और दूध के अलावा और कोई भी सामग्री लेकर नहीं आ सकेंगे।
महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन :
महाकाल की नगरी उज्जैन में भी सावन के महीने के साथ-साथ भादो के 15 दिनों तक आने वाले भक्तों के लिए खास व्यवस्थाएं की गयी हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि शिवभक्तों का एक वर्ग पूर्णिमा तिथि से दूसरी पूर्णिमा तिथि तक को सावन का महीना मानता है और दूसरा वर्ग अमावस्या से दूसरी अमावस्या तक को सावन का महीना मानता है।
इस वजह से उज्जैन में शिवभक्तों की पूजा के लिए डेढ़ महीने का समय निर्धारित किया जाता है। सावन के महीने में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले शिवभक्तों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख तक पहुंच जाती है जबकि आम दिनों में यहां दो से ढाई लाख श्रद्धालु आते हैं।
मंदिर परिसर में बनेगा अस्थायी अस्पताल
मिली जानकारी के अनुसार महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति की तरफ से सावन के महीने में मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों के लिए अस्थायी अस्पताल की व्यवस्था की गयी है। अगर ज्यादा भीड़ होने की वजह से कोई भी श्रद्धालु अस्वस्थ हो जाता है तो उसे तुरंत मंदिर परिसर में ही बनाए गये अस्थायी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाया जा सकेगा।

कांवड़ियों के लिए खास व्यवस्थाएं
श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले बड़ी संख्या में कांवड़ियों को बाबा महाकाल को जल अर्पित करने के लिए अलग व्यवस्थाएं की गयी हैं। अगर कोई कांवड़िया पूर्व सूचना दिये मंदिर में जाता है तो शनिवार, रविवार और सोमवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी दिन उसे गेट नंबर 4 से प्रवेश करने दिया जाएगा।
लेकिन अगर कोई कांवड़िया बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे मंदिर में पहुंचता है या शनिवार, रविवार और सोमवार को मंदिर में जाता है तो उसे सामान्य श्रद्धालुओं के साथ ही दर्शन करने की अनुमति होगी। ऐसे कांवड़ यात्री कार्तिक मंडपम में लगे जल पात्र में जल अर्पण करेंगे।
भस्म आरती में सिर्फ रजिस्टर्ड श्रद्धालु
मिली जानकारी के अनुसार सावन और भादो के महीने में महाकालेश्वर मंदिर के भस्म आरती में रजिस्टर्ड श्रद्धालुओं को मानसरोवर भवन और द्वार नंबर 1 से प्रवेश करने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं चलित भस्म आरती दर्शन की व्यवस्था इन महीनों के दौरान भी प्रचलित व्यवस्था के अनुसार अवंतिका द्वार से ही रहेगी। VIP और VVIP अतिथियों के लिए सावन और भादो के महीने में श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में नीलकंठ मार्ग से होते हुए सत्कार कक्ष तक पहुंचने की व्यवस्था की गयी है।

सामान्य श्रद्धालुओं के लिए भी अलग व्यवस्था
महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले सामान्य श्रद्धालुओं के सुलभ दर्शन की व्यवस्था के लिए उन्हें त्रिवेणी संग्रहालय के पास नंदीद्वार श्री महाकाल, महालोक से प्रवेश करवाकर महालोक से मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर 1, टनल मंदिर परिसर, कार्तिक मंडपम, गणेश मंडपम तक ले जाया जाएगा। वहीं भारत माता मंदिर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को शंख से मानसरोवर भवन में प्रवेश करवाकर फेसिलिटी सेंटर 1 से आगे दर्शन के लिए ले जाया जाएगा।



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