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यूनेस्को की हेरिटेज साइट लिस्ट में शामिल हुआ शांतिनिकेतन, जानिए क्या है इस शहर की खासियत

पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल किया गया है। यह भारत में 41वीं जगह है जिसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल किया गया है। इस बात की घोषणा यूनेस्को ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिया और इसके साथ ही भारत को इस उपलब्धि के लिए बधाई भी दी। पिछले काफी लंबे समय से ही शांतिनिकेतन को विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल करने का प्रयास भारत कर रहा था।

shantiniketan

यूनेस्को की सऊदी अरब में हुई विश्व धरोहर समिति के 45वें सत्र के दौरान इसे विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल करने का फैसला लिया गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर अपनी खुशी जाहिर की है। शांतिनिकेतन का नाम लेते ही हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम जो कौंधता है, वह कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का नाम होता है। शांतिनिकेतन को अगर रवींद्रनाथ टैगोर का घर कहा जाए, तो यह कहना गलत नहीं होगा। देबेंद्रनाथ टैगोर (रवींद्रनाथ टैगोर के पिता) ने शांतिनिकेतन में एक आश्रम की स्थापना की थी, जहां जाति और पंथ से परे किसी भी पंथ को मानने वाले या जाति के व्यक्ति ईश्वर की स्तुति में शामिल हो सकेंगे। शांतिनिकेतन के साथ जो नाम हमेशा जुड़ा होता है, वह है विश्वभारती विश्वविद्यालय।

कोलकाता से लगभग 160 किमी दूर, बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर ने 1901 में सिर्फ 5 विद्यार्थियों के साथ विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। 1921 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और आज यहां 6000 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। यह भारत का ऐसा विश्वविद्यालय है जहां आज भी गुरुकुल परंपरा का निर्वाहन किया जाता है। छात्र ना सिर्फ पेड़ के नीचे बैठकर शिक्षा प्राप्त करते हैं, बल्कि यहां दिन की शुरुआत ही प्रार्थना सभा के साथ होती है।

विश्वभारती यूनिवर्सिटी के अलावा और भी कई बातें हैं, जो शांतिनिकेतन को खास बनाती हैं।

छातीमतला

छातीमतला शांतिनिकेतन की सबसे फेमस जगहों में से एक है। इसकी स्थापना भी रविन्द्रनाथ टैगोर ने की थी। छातीमतला पेड़ों से घिरी हुई हरी-भरी जगह है जिसकी स्थापना कला, ध्यान और योग जैसी एक्टिविटीज को करने के लिए की गई थी। यहां पर आपको बेहद शांति और सुकून का अहसास होगा। इस जगह पर बैठकर पेड़ों की ठंडी छांव और सिर्फ और सिर्फ पक्षियों के कलरव सुनते हुए आप पूरा दिन बीता सकते हैं।

अमर कुटीर

Shantiniketan

अगर बोलपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को देखना और खरीदारी करनी है तो यहां जरूर आना चाहिए। यह ऐसी जगह है जहां आपको शांतिनिकेतन में होने का वास्तविक अहसास करवाती है। बंगाल की पारंपरिक हैंडीक्राफ्टस, स्थानीय स्तर पर बनायी जाने वाली खाने-पीने की चीजें, कपड़े, परिधान, ज्वेलरी और भी काफी कुछ आपको यहां मिल जाएगा। शांतिनिकेतन में जाने पर यह जगह मस्ट वीजिट की लिस्ट में आती है।

रवींद्रनाथ टैगोर का घर

tagore house

शांति निकेतन में रविन्द्रनाथ टैगोर जिस जगह पर सबसे ज्यादा वक्त बिताते थे, वह है टैगोर हाउस। रविन्द्रनाथ टैगोर के पिता देबेन्द्रनाथ ठाकुर ने इस भवन को बनवाया था। बंगाल के आर्किटेक्चर में बनी ये बिल्डिंग वाकई खूबसूरत है। ये इमारत काफी बड़ी और इसमें कई कमरे भी हैं। इसी बड़े भवन में कई चित्र और पेंटिंग्स हैं। रविन्द्रनाथ टैगोर को जानने और समझने के लिए टैगोर हाउस एक अच्छी जगह है। अगर आप शांति निकेतन जाते हैं तो जगह पर जाना न भूलें।

सोनाझुरी हाट

sonajhuri haat

शांतिनिकेतन का मुख्य आकर्षण सोनाझुरी या खोवाई हाट है। अगर बंगाल की पारंपरिक संस्कृति को समझना है, लेकिन आपके पास ज्यादा घुमने के लिए समय नहीं है, तो आपको सोनाझुरी हाट देखना चाहिए। सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही सोनाझुरी हाट लगती है। इस हाट में ग्रामीण इलाकों से हैंडिक्राफ्ट आर्टिस्ट अपने हाथों से बनाए सामान को बेचते हैं। यहां की पेटिंग्स, कपड़ों पर की गयी कलाकारी, बैग्स, ज्वेलरी आपको बहुत पसंद आएंगी। इस हाट में संथाल जनजाति के लोग डांस और गाते हुए भी दिख जाएंगे। यहां खाने-पीने की भी कई अच्छी दुकानें हैं, जहां आपको पारंपरिक बंगाली वेज और नॉन-वेज क्वीजीन मिल जाएगा।

कैसे पहुंचे शांतिनिकेतन

शांति निकेतन जाने का सबसे आसान तरीका ट्रेन है। इसका सबसे नजदीकी स्टेशन बोलपुर स्टेशन है जो शांतिनिकेतन से सिर्फ 3 किमी दूर है। हावड़ा, सियालदह स्टेशनों से बोलपुर के लिए ट्रेन मिल जाएगी। फ्लाइट से आने पर आपको कोलकाता एयरपोर्ट उतरना होगा और वहां से सड़क या ट्रेन से शांतिनिकेतन जा सकेंगे। अगर आप सड़क मार्ग से शांतिनिकेतन जाने का सोच रहे हैं तो कोलकाता से यहां के लिए बस, टैक्सी या फिर किराए पर प्राइवेट गाड़ियां आसानी से मिल जाएगी।

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