एक मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी को बंद करने का फैसला सुनाया है। सिर्फ इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व प्रभागीय वन अधिकारी किशन चंद को लताड़ लगायी है।
मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला इन पशुओं के प्राकृतिक आवास और वन अभयारण्य के क्षेत्रों में पर्यटन के संभावित प्रभाव को कम करने के लिए ही लिया है। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अब टाइगर सफारी की अनुमति सिर्फ नेशनल पार्क के परिधीय क्षेत्र और बफर ज़ोन में ही रहेगी। नेशनल पार्क के मूल भाग में टाइगर सफारी नहीं होगी।

लेकिन इस अनुमति के साथ भी सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्तें भी रखी हैं। यह कदम जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में पर्यटन को बढ़ावा और अभयारण्य के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के बीच के संतुलन को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
कोर्ट ने पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व प्रभागीय वन अधिकारी किशन चंद को यह लताड़ जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई में उनकी भागीदारी के कारण लगायी है। इस मामले पर अपनी टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने राजनेताओं और वन अधिकारियों की सांठगांठ पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए इस बात पर जोर दिया कि इससे गंभीर पर्यावरणीय गिरावट आएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अगले 3 महीने के अंदर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें मूल रूप से अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई के बारे में जानकारी दी गयी हो। सुप्रीम कोर्ट ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंपी है और इसकी अंतरिम रिपोर्ट मांगी है।
इसके साथ ही कोर्ट ने टाइगर रिजर्व के अंदर सफारी के कॉन्सेप्ट की जांच करने के संकेत भी दिये हैं। बताया जाता है कि इसकी जांच के लिए भी सुप्रीम कोर्ट एक कमेटी का गठन करेगी जो पारिस्थितिक संरक्षण और एक जिम्मेदार पर्यटन के बीच संतुलन को बनाने के लिए सभी आवश्यक शर्तों को लागू करेगी।



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