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इंदौर के चुनिंदा और बेइंतेहा खूबसूरत मंदिर

जाने इंदौर के खूबसूरत मन्दिरों को

By Goldi

इंदौर में प्राकृतिक वंडर्स के बीच एक सुंदर संतुलन है जो अतीत और वर्तमान का खूबसूरत मिश्रण है। पर्यटन की दृष्टि से इंदौर में संरचनात्‍मक, सांस्‍कृतिक और सामाजिक जीवन में जीवंतता देखने का मिलती है।

ज्ञात हो कि इन बातों के अलावा इंदौर का एक अन्य पहलु भी है जिसके बारे में बहुत ही काम लोग जाते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं यहां मौजूद अलग अलग मंदिरों की जो इंदौर के कल्चर का हिस्सा तो नहीं हां मगर, यदि व्यक्ति को शांति की तलाश है तो इंदौर के इन मंदिरों में ऐसा बहुत कुछ है जो शांति की तलाश करने आये एक पर्यटक का मन मोह सकता है।

वैष्णो धाम

वैष्णो धाम

इंदौर स्थित वैशनी धाम एक जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर की तरह हुबहू है।जम्मू के वैष्णो धाम की तरह इस मंदिर में भी आपको गुफा के रास्ते में गर्भगृह तक पहुंचना होता है।गुफा के रास्ते में एक दो जगह गहरी खाइयाँ, तथा झरने भी बनाये गए हैं। घोर आश्चर्य, शहर के बीचोंबीच स्थित इस आश्चर्यजनक मंदिर में गुफा पार करने के दौरान करीब पंद्रह बीस मिनट के लिए आप किसी दूसरी ही दुनिया में पहुँच जाते हैं।गर्भगृह में जहाँ बिलकुल वैष्णोदेवी मंदिर की तर्ज़ पर माता जी तीन पाषाण की पिंडियों के रूप में विराजित हैं। ये तीनों पिंडियाँ वैष्णोदेवी मंदिर कटरा से यहाँ लाई गई हैं।

बड़ा गणपति मंदिर

बड़ा गणपति मंदिर

बड़ा गणपति मंदिर गणेश जी की विशाल प्रतिमा के कारण विख्‍यात है। इस मंदिर में गणेश जी की मूर्ति की ऊंचाई 25 फीट ऊंची है जिसे पूरी दुनिया में गणपति की सबसे ऊंची मूर्ति माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1875 में किया गया था। इस मूर्ति का निर्माण ईटों, चूने के पत्‍थरों, गुड़, सात पठारों की मिट्टी, घोडों, गाय और हाथियों के पैरों कुचली मिट्टी व कीचड़, पंचरत्‍नों के पाउडर ( हीरा, पन्‍ना, मोती, माणिक और पुखराज ) और कई धार्मिक स्‍थलों के पवित्र जल से किया गया है। मूर्ति का ढ़ांचा, सोने, चांदी, पीतल, तांबे और लोहे से बना हुआ है।

गोमटगि‍री

गोमटगि‍री

गोमटगिरि मंदिर जैन समुदाय के लोगों के बीच पूजा का स्‍थल है, जोकि पहाडी़ के बीच प्राकृतिक वातावरण में स्थित है। यह मंदिर, भगवान गोमटेश्‍वर या बाहुबली की विशाल मूर्ति के कारण प्रसिद्ध है। यह मूर्ति, 21 फीट ऊंची है और श्रवणबेलगोला में स्‍थापित बाहुबली की प्रतिमा की प्रतिकृति है।

कांच मंदिर

कांच मंदिर

इंदौर के भव्य मन्दिरों में से एक कांच मंदिर सफेद पत्‍थर से बना हुआ है जोकि एक जैन मंदिर है। इस मंदिर को एक मध्‍ययुगीन हवेली के रूप में बनाया गया है जिसमें एक चंदवा बालकनी और शिकारा भी है। मंदिर का अंदरूनी हिस्‍सा पूरी तरह कांच से निर्मित है। मंदिर के अंदर दीवारें, छत, खंभे, फर्श, दरवाजे आदि सब कुछ कांच से तैयार किया गया है। मंदिर में भगवान महावीर और तीर्थांकर की मूर्तियां लगी हुई है। इस मंदिर में जैन श्रद्धालु और पर्यटक, दर्शन के लिए जाते है।PC:Arup1981

देवगुरादिया शिव मंदिर

देवगुरादिया शिव मंदिर

भगवान शिव को समर्पित मंदिर देवगुरादिया शिव मंदिर इंदौर शहर से 8 किमी. दूर एक गांव में स्थित मंदिर है। यह मंदिर, चट्टानों से निर्मित एक स्‍मारक है जिसे 7 वीं शताब्‍दी में बनाया गया था।इस मंदिर को अहिल्‍या बाई होलकर के द्वारा 18 वीं सदी में पुनर्निर्मित करवाया गया था। इस मंदिर को स्‍थानीय लोगों के बीच गरूड़ तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की खास विशेषता यह है कि यहां का पानी का स्‍त्रोत गाय के खुले मुख के आकार का है जिसे गौमुख कहा जाता है।

अन्‍नपूर्णा मंदिर

अन्‍नपूर्णा मंदिर

अन्‍नपूर्णा,इंदौर का सबसे पुराना मंदिर है। इस मंदिर की अद्भुत स्‍थापत्‍य शैली, विश्‍व प्रसिद्ध मदुरै के मीनाक्षी मंदिर से प्रेरित लगती है। मंदिर का द्वार काफी भव्‍य है। चार बड़े हाथियों की मूर्ति द्वार पर सुसज्जित हैं। इस मंदिर की ऊंचाई 100 फीट से भी अधिक है।

खजराना मंदिर

खजराना मंदिर

इस प्राचीन मंदिर का निर्माण सन 1735 में होल्कर वंश की महारानी अहिल्याबाई ने करवाया था। इस मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि यहां श्रद्धालु जो भी कामना लेकर आते हैं, वह जरुर पूरी होती है। खजराना मंदिर मंदिर से एक विशेष मान्यता यह जुड़ी है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा की पीठ पर उल्टा स्वस्तिक बनाने से मन्नत पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु यहां दोबारा आकर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं।

बीजासेन टेकरी

बीजासेन टेकरी

बीजासेन माता को समर्पित यह सुंदर मंदिर है इंदौर में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। बीजासेन माता, माता दुर्गा का ही एक स्‍वरूप है। बीजसेन टेकरी के नाम से विख्‍यात यह मंदिर 1920 में बनाया गया था। इस मंदिर से शहर का शानदार नजारा देखने को मिलता है। इस मंदिर से कभी भी कोई भी श्रद्धालु खली हाथ नहीं लौटता है।

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