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केरल के सबसे ऐतिहासिक शहरों में शुमार थालास्‍सेरी में क्या करें टूरिस्ट और ट्रैवलर

By Super

आज अपने इस आर्टिकल में हम आपको जिस डेस्टिनेशन से अवगत कराने जा रहे हैं उसे सर्कस, केक और क्रिकेट की भूमि कहा जाता है। जी हां हम बात कर रहे हैं केरल के थालास्‍सेरी की। कन्‍नूर जिले में स्थित, थालास्‍सेरी, उत्‍तरी केरल के सबसे गतिशील शहरों में से एक है।

Read in English: Travel to the Vibrant Town of Thalassery

इसे तेलीचेरी के नाम से भी जाना जाता है, यह शहर मालाबार तट पर सुनहरे पंखों के साथ अपने जीवंत इतिहास और अद्भूत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्‍यात है। इस जीवंत जगह का नाम भारतीय सांस्‍कृतिक इतिहास में सर्कस, क्रिकेट और केक के जन्‍मस्‍थान के रूप में चिन्हित है। आपको बताते चलें कि इस शहर को मालाबार की सांस्‍कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता है क्‍यूंकि यहां काफी संख्‍या में साहित्यिक और राजनीतिक गतिविधियां होती रहती हैं।

इस जीवंत शहर से पहला मलयालम अखबार और उपन्‍यास भी पब्लिश हुआ था। यदि बात थालास्‍सेरी में पर्यटन के आयामों के इर्द गिर्द हो तो आपको बता दें की यहां ऐसा बहुत कुछ है जो किसी भी पर्यटक का मन मोह लेगा। आइये इस लेख के जरिये जाना जाये कि यदि आप थालास्‍सेरी में हों तो वहां ऐसा क्या क्या है जिसे आपको अवश्य देखना चाहिए।

थालास्‍सेरी किला

थालास्‍सेरी किला, एक ऐतिहासिक स्‍मारक है जिसे ईस्‍ट इंडिया कम्‍पनी के द्वारा 1708 में बनाया गया था। इस किले की औपनिवेशिक काल के दौरान व्‍यापारिक और अंग्रेजों की सैन्‍य गतिविधियों में प्रमुख भूमिका रही है। मुझापिलांगड़ तट के किनारे पर स्थित एक चट्टान पर बने इस किले के भीतर औपनिवेशिक शासन और मैसूर आक्रमण के कई किस्‍से और कहानियां शामिल हैं। किले की संरचना में विशाल दीवारें और अलंकृत नक्‍काशीदार दरवाजे शामिल हैं। इस किले में अरब सागर से जुड़ी हुई कई भीतरी गुप्‍त सुरंगें हैं। इतिहास के अनुसार, हैदर अली ( मैसूर के राजा ) ने 1781 में इस किले पर फतेह करने का असफल प्रयास किया था। इस किले की नींव विशाल लेटेराइट पत्‍थरों से निर्मित है और किले के प्रवेश द्वारों को 18 वीं सदी के सुंदर भित्ति चित्रों से सजाया गया है।

थालास्‍सेरी में क्या क्या देखें ट्रैवलर

Photo Courtesy: Neon

इंग्लिश चर्च

इंग्लिश चर्च जिसे सेंट जॉन एंग्लिकन चर्च भी कहा जाता है, थालास्‍सेरी का सबसे ज्‍यादा भ्रमण किया जाने वाला पर्यटन स्‍थल है। इतिहास के हिसाब से यह चर्च 140 वर्षो से भी पहले का है जो मालाबार के पहले चर्चो में से एक है। चर्च, थालास्‍सेरी किले के बेहद करीब स्थित है और दर्शकों को मनोरम दृश्‍य प्रदान करती है। इस चर्च के निकट ही एक कब्रिस्‍तान स्थित है जिसमें मालाबार के कई महान औपनिवेशिक प्रशासकों की कब्र है।

थालास्‍सेरी में क्या क्या देखें ट्रैवलर

Photo Courtesy: Premnath.T.Murkoth

ओवर बरी फॉली

ओवर बरी फॉली थालास्‍सेरी का एक निर्माणाधीन पार्क है जिसकी सुंदरता आने वाले किसी भी पर्यटक का मन मोह सकती है। आपको बता दें कि इस पार्क का ये नाम इ इन ओवरबेरी के नाम पर पड़ा है जिन्होंने सन 1879 के दौरान इस पार्क को बनवाने के लिए अपना योगदान देने वाले। ज्ञात हो कि ये एक मनोरंजक पार्क है जिसका निर्माण एक पहाड़ी के ऊपर किया गया है। यदि आप थालास्‍सेरी में हों तो हमारा सुझाव है कि आप इस [पार्क की यात्रा अवश्य करें।

थालास्‍सेरी में क्या क्या देखें ट्रैवलर

Photo Courtesy: Akhil chandran

जुमा मस्जिद

जुमा मस्जिद, थालास्‍सेरी के सबसे लोकप्रिय धार्मिक आकर्षणों में से एक है जो अरब सागर के करीब स्थित है। इस 1000 साल पुरानी मस्जिद से ही इस क्षेत्र में इस्‍लाम का पुर्नजागरण और विस्‍तार हुआ था। इस मस्जिद का निर्माण मलिक ईबिन दिनार ने करवाया था जो केरल में इस्‍लाम के प्रसार के लिए पहुंचे थे। यह मस्जिद, भारतीय - अरबी वास्‍तुकला शैली के विख्‍यात है जो केवल वैभव ही नहीं अपितु प्राचीनता को भी प्रदर्शित करती है। आपको बताते चलें कि थालास्‍सेरी की विरासत और संस्‍कृति को इस प्राचीन धार्मिक स्‍थल के माध्‍यम से प्रदर्शित किया गया है। थालास्‍सेरी के केंद्र में स्थित होने के कारण जुमा मस्जिद तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

वामिल मंदिर

वामिल मंदिर एक धार्मिक स्‍थल है जो भक्‍तों और पर्यटकों को यहां मनाएं जाने वाले विशेष समारोह के कारण आकर्षित करती है। पर्यटक इस मंदिर तक थालास्‍सेरी शहर से कन्‍नूर शहर को जाने वाले रास्‍ते के सहारे से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर, मालाबार के मंदिरों में किए जाने वाले थेय्यम - एक उत्‍सव नृत्‍य के लिए सबसे ज्‍यादा विख्‍यात है। यह उत्‍सव नृत्‍य, वामिल मंदिर में प्रतिदिन किया जाता है। नृत्‍य प्रदर्शन के दौरान यात्रियों को मंदिर में भ्रमण करने की अनुमति दी जाती है ताकि वह उत्‍साह और उमंग से भरे इस दैवीय कला के रूप का आनंद उठा सकें। प्रतिदिन दिन के 12:30 बजे वामिल मंदिर में इस नृत्‍य प्रदर्शन को शुरू किया जाता है जो आखिर के आधे घंटे तक चलती है। वह लोग जो दैवीय कलाओं की झलक पाना चाहते हैं और मालाबार के मंदिर के इस रंगीन समारोह में सेलिब्रेट करना चाहते हैं, वह वामिल मंदिर में आकर सच्‍ची खुशी प्राप्‍त कर सकते हैं।

कैसे जाएं थालास्‍सेरी

फ्लाइट द्वारा - थालास्‍सेरी के सबसे नजदीक स्थित हवाई अड्डा कालीकट इंटरनेशनल एयरपोर्ट ( है। यह थालास्‍सेरी शहर से 93 किमी. की दूरी पर स्थित है। इस हवाई अड्डे से भारत के सभी प्रमुख शहरों और विदेशों के कुछ शहरों के लिए नियमित उड़ाने उपलब्‍ध हैं। जो पर्यटक हवाई यात्रा से यहां पहुंचते हैं वह थालास्‍सेरी तक बस से या टैक्‍सी हायर करके पहुंच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा - थालास्‍सेरी में रेलवे स्‍टेशन स्थित है जो केरल राज्‍य के कई अंदरूनी शहरों और बाहरी शहरों से अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है। इस रेलवे स्‍टेशन से कुछ शहरों जैसे - कन्‍नूर, कोची, तिरूवनंतपुरम, कोझाकोड़ और पालाक्‍कड़ के लिए रेगुलर ट्रेन चलती हैं। थालास्‍सेरी रेलवे स्‍टेशन कुछ प्रमुख शहरों जैसे - मंगलौर, बंगलौर और चेन्‍नई से भी भली - भांति जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग द्वारा - थालास्‍सेरी शहर, नजदीकी शहरों से सड़क मार्ग द्वारा भली - भांति जुड़ा हुआ है। कन्‍नूर, कोझीकोड़, मंगलौर, कोची, मैसूर और तिरूवनंतपुरम से केरल राज्‍य परिवहन निगम ( के एस आर टी सी ) की कई बसें और प्राइवेट बसें नियमित रूप से थालास्‍सेरी के लिए चलती हैं। मेट्रो शहर जैसे - चेन्‍नई और बंगलौर से थालास्‍सेरी के लिए लक्‍जरी बसें भी चलती हैं।

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