आज भारत का शुमार विश्व के उन चुनिंदा देशों में है जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और विशेषता के लिए जाना जाता है। यहां विश्व के कई महत्त्वपूर्ण देशों से लोग वेकेशन मनाने, मौज मस्ती करने आते हैं। अगर टूरिज्म की दृष्टि से भारत पर गौर करें तो मिलेगा कि आज भारत का टूरिज्म कई वर्गों में विभाजित है। जिसमें रिलिजियस टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म, बिजनेस टूरिज्म, वाइल्ड लाइफ टूरिज्म, फोटोग्राफी टूरिज्म प्रमुख हैं। अब यदि हम आपसे ये कहें कि इनके अलावा एक अन्य तरह का टूरिज्म विदेश के लोगों को भारत की तरफ आकर्षित कर रहा है तो शायद आप सोच में पड़ जाएं। जी हां हम बात कर हैं भारत में इलेक्शन टूरिज्म की। जो लगातार साल दर साल विदेश के लोगों को भारत ला रहा है। ज्ञात हो कि भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए जाना जाता है। साथ ही यहां पर लोकतंत्र के सबसे बड़े मेले यानी 16वीं लोकसभा के लिए वोट डालने की प्रक्रिया के साथ ही लोकसभा चुनावों का भी आगाज हो गया।

आपको बताते चलें कि भारत में हो रहे ये चुनाव कई मायनों में खास हैं एक तरफ इससे जहां देश को भारत का अगला प्रधान मंत्री मिलेगा तो वहीं दूसरी तरफ इस चुनाव से ये भी साफ़ है कि गिरते हुए भारतीय रुपए की हालत कुछ सुधरेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस लोकतंत्र में निर्णायक बानी जनता के नज़रिये को देखने विदेशों से भी पर्यटक भारत आ रहे हैं। या दूसरे शब्दों में कहें तो अब विदेशी पर्यटकों ने इन चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर चुनाव को और भी महत्त्वपूर्ण बना दिया है। BJP Manisfesto, नरेंद्र मोदी और भारत में पर्यटन
आपको बताते चलें कि वोटिंग शुरू होने के साथ ही अमेरिका, फ्रांस, नाइजीरिया, यूके और यूएई के पर्यटकों ने देश में आना शुरू कर दिया है। इस बार इन देशों के पर्यटकों ने देश में हो रहे लोकसभा चुनावों को करीब से देखने का मन बनाया है और सिर्फ 1200 डॉलर रुपए खर्च करके वह अगले छह दिनों के लिए अपनी 'चुनावी बुकिंग' करा ली है।

गौरतलब है कि भारत में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी इस चुनाव में भारत की धरती पर एक बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों को देखा जा सकता है। जहां एक तरफ सम्पूर्ण देश की नज़र उत्तर प्रदेश के वाराणसी पर हैं तो वहीं इलेक्शन टूरिज्म के मद्देनजर भी इस चुनाव में सबसे ज्यादा पर्यटक गुजरात की भूमि के बाद वाराणसी, अमेठी रायबरेली और लखनऊ ही आ रहे हैं। आज इलेक्शन टूरिज्म के चलते ज्यादा से ज्यादा टूरिस्ट भारत आकर सबसे बड़े लोकतंत्र का खेल देखना चाहते हैं।
बात जब इलेक्शन टूरिज्म की हो रही है तो आपको बता दें कि भारत में इसकी शुरुआत 2012 में गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले हुई थी, बताया जाता है कि उस समय करीब 125 विदेशी पर्यटकों ने गुजरात का दौरा किया था और ये जाना था कि भारत में चुनाव कैसे होता है। अगर आकड़ों कि माने तो इस लोक सभा चुनाव में लगभग 2800 विदेशी पर्यटक भारत की भूमि पर होने वाले सबसे बड़े परिवर्तन से रू-ब-रू होंगे।

'इलेक्शन टूरिज्म' के चेयरमैन और गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले मनीष शर्मा कि माने इस चुनाव में सबसे ज्यादा उत्साहित जर्मनी के पर्यटक हैं जर्मनी के बाद फ्रांस, अमेरिका, यूके , यूएई, नाइजीरिया और सिंगापुर से पर्यटकों ने भी इन चुनावों के दौरान भारत आने में अपनी रूचि दिखाई है। मनीष के मुताबिक 1200 डॉलर में पर्यटकों को छह रातों और सात दिनों का पैकेज मुहैया कराया जा रहा है। इस पैकेज में पर्यटकों को चुनावी रैलियों, कैंपेनिंग, अलग-अलग पार्टी के नेताओं के साथ उनकी मुलाकात को शामिल किया गया है साथ ही आये हुए विदेशी पर्यटकों को चुनाव आयोग के अधिकारियों से भी मिलवाया जाएगा ताकि वो भारत के चुनाव को गहनता और गंभीरता से समझ सकें।



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