हमनें अपने पिछले लेख में आपको अवगत कराया था भारत में मौज़ूद अलग अलग बौद्ध मठों से साथ ही हमनें आपकों ये भी बताया था कि आज इस बौद्ध धर्म का शुमार दुनिया के चौथे सबसे बड़े धर्म के रूप में होता है जिसे 38 करोड़ से अधिक लोग मानते हैं। गौरतलब है कि बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है। इसके प्रस्थापक महात्मा बुद्ध शाक्यमुनि (गौतम बुद्ध) थे।
वे 563 ईसा पूर्व से 483 ईसा पूर्व तक रहे। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ैला, और अगले दो हज़ार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फ़ैल गया।
आज अपने इस लेख में हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं भारत के उन शहरों से जो बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों के लिए बडे ही महत्त्वपूर्ण शहर हैँ। ये शहर ऐसे हैं जहां साल भर बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों क तांता लगा रहता है। ज्ञात हो कि बौद्ध धर्म से जुड़े ज्यादातर स्मारक भारत और नेपाल में फैलें हैं जहाँ हर साल देश दुनिया के लोग दर्शन के लिये आते हैं। तो अब देर किस बात की यदि आपको बौद्ध धर्म के वैभव को देखना है तो इन शहरों में अवश्य आएं।
सारनाथ

उत्तरप्रदेश में वाराणसी के पास सारनाथ एक छोटा सा गांव है। इसकी प्रसिद्धि की सबसे बड़ी वजह यहां स्थित डीयर पार्क है, जहां गौतम बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था। पहले बौद्ध संघ की स्थापना भी यहीं की गई थी। सारनाथ का बौद्ध धर्म से गहरा नाता है और यह भारत के चार प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थलों में एक है। ज्ञात हो कि सारनाथ में ही महान भारतीय सम्राट अशोक ने कई स्तूप बनवाए थे। उन्होंने यहां प्रसिद्ध अशोक स्तंभ का भी निर्माण करवाया, जिनमें से अब कुछ ही शेष बचे हैं।
बोधगया

बोधगया बिहार में स्थित है और ऐतिहासिक रूप से उरूवेला, समबोधि, वज्रासन या महाबोधि के नाम से जाना जाता था। बोधगया अपने कद्रदानों को आध्यात्म और वास्तुकला आश्चर्य का अनुभव कराता है। चूँकि बिहार में कई मठ पाये जाते हैं और इसका नाम भी विहार से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है मठ होता है। आपको बताते चलें कि बौद्ध धर्म तथा धार्मिक आध्यात्म के परिपेक्ष्य में बोधगया का स्थान काफी ऊँचा है। बोधगया पर्यटन के अन्तर्गत बौद्ध धर्म तथा कई अन्य पंथों के सबसे ज्यादा प्रामाणिक और ऐतिहासिक केन्द्र आते हैं।
कुशीनगर

कुशीनगर, उत्तरप्रदेश में एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ शहर है। बौद्ध धर्म के ग्रंथों के अनुसार, गौतम बुद्ध ने अपनी मृत्यु के बाद यहीं पारिनिर्वाण को हीरान्यावती नदी के पास प्राप्त किया था। ज्ञात हो कि महाकाव्य रामायण में भगवान राम के पुत्र कुश के नाम के रूप में इसका उल्लेख भी मिलता है। इस शहर में 3 और 5 वीं शताब्दी के कई प्राचीन स्तुप और विहार स्थित है। इनमें से अधिकाश: स्मारकों को मौर्य सम्राट अशोक के द्वारा तैयार करवाया गया है।



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