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सौंदर्य और संस्कृति का राज्य गुजरात

Posted By: Staff

भारत के पश्चिम में बसा राज्य गुजरात अपनी स्थलाकृतिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। गुजरात हमेशा से भारत के इतिहास में सांस्कृतिक और व्यापार का केंद्र माना जाता रहा है। गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर है।
गुजरात में कुल 26 जिलों है, जो किसी बाकी राज्य की तरह इष्टतम विविधता प्रस्तुत करते हैं। अरब सागर और सहयाद्रि रेंज की पहाड़ियां और स्वच्छ और प्राचीन समुद्र तट, अरावली रेंज, सतपुड़ा रेंज और सह्याद्री रंजे कच्छ के रण का अनूठा स्थलाकृतिक है, यहाँ आये पर्यटकों को शायद ही किसी अन्य जगह ऐसा नज़ारा देखने को मिलेगा।

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तीथल काले रेत का समुद्र तट, मांडवी बीच , चोरवाड़ समुद्र तट , अहमदपुर-मांडवी बीच , सोमनाथ बीच, पोरबंदर तट , द्वारका बीच, गुजरात के समुद्र तटों की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है और वैसे ही तीर्थस्थलों की भी। द्वारका और सोमनाथ जैसी जगह हमारे भारतीय पौराणिक कथाओं और धर्म का अभिन्न हिस्सा हैं, कुछ वैसे ही है अंबाजी मंदिर और गिरनार की पहाड़ियों पर बने हिंदू और जैन मंदिर। गुजरात के राष्ट्रीय उद्यानों और वन्य जीव अभयारण्यों में 40 से अधिक जानवरों की प्रजातियों को संरक्षण देते है जैसे की दुर्लभ एशियाई शेर, जंगली गधा और कृष्णमृग।

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गिर राष्ट्रीय उद्यान, वंस्दा नेशनल पार्क , वेरावादर कृष्णमृग राष्ट्रीय उद्यान , नारायण सरोवर वन्य जीव अभयारण्य , थोल झील पक्षी अभ्यारण्य , कच्छ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य राज्य के वन्य जीवों की रक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से कुछ हैं। विशाल सागर तट वाले इस राज्य में इतिहास युग के आरम्भ होने से पूर्व ही अनेक विदेशी जातियाँ थल और समुद्र मार्ग से आकर स्थायी रूप से बसी हुई हैं। इसके उपरांत गुजरात में अट्ठाइस आदिवासी जातियां हैं। जन-समाज के ऐसे वैविध्य के कारण इस प्रदेश को भाँति-भाँति की लोक संस्कृतियों का लाभ मिला है।

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गुजरात के प्रमुख दर्शनीय स्थल- अहमदाबाद, बड़ोदरा, दीव, जामनगर, पोरबंदर राजकोट, भावनगर, जूनागढ़, सोमनाथ तथा सूरत शहर। गुजरात न केवल जानवरों के संरक्षण में आगे है बल्कि ये भारत का आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से धनी राज्य भी है, गुजरात पारंपरिक हस्तशिल्प का केंद्र भी है जो दुनिया भर के पर्यटकों द्वारा सराहा जाता रहा है। यहां के लोगों का पारंपरिक पहनावा भी बड़ा ही ख़ास है। पगड़ी, प्लेटेड जैकेट लंबी आस्तीन का कुर्ता , पतलून, बैगी बॉटम के साथ चूड़ीदार यहाँ के पुरुषों के पारंपरिक पहनावे हैं, जाहिर सी बात है जब पहनावा इतना रंग बिरंगा होगा तो लाजमी है कि पर्यटक इस राज्य की ओर आकर्षित हों। रंग बिरंगा घाघरा और चोली, जटिल कढ़ाई के साथ दर्पण कांच आपके संग्रह योग्य हैं। अगर आप गुजरात में हैं तो पाटन की पटोला साड़ियों को घर ले जाना न भूलें ये आपकी अलमारी में बिलकुल अलग और ख़ास लगेंगी।

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गुजरात कपास, तम्बाकू और मूँगफली का उत्‍पादन करने वाला देश का प्रमुख राज्‍य है तथा यह कपड़ा, तेल और साबुन जैसे महत्‍वपूर्ण उद्योगों के लिए कच्‍चा माल उपलब्‍ध करता है। यहाँ की अन्‍य महत्‍वपूर्ण नकदी फसलें हैं - इसबगोल, धान, गेहूँ और बाजरा। गुजरात के वनों में उपलबध वृक्षों की जातियाँ हैं-सागवान, खैर, हलदरियो, सादाद और बाँस। गुजरात की अधिकांश लोक संस्कृति और लोकगीत हिन्दू धार्मिक साहित्य पुराण में वर्णित भगवान कृष्ण से जुड़ी किंवदंतियों से प्रतिबिंबित होती है। कृष्ण के सम्मान में किया जाने वाला रासनृत्य और रासलीला प्रसिद्ध लोकनृत्य "गरबा" के रूप में अब भी प्रचलित है। यह नृत्य देवी दुर्गा के नवरात्र पर्व में किया जाता है। एक लोक नाट्य भवई भी अभी अस्तित्व में है। 

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भारत के पश्चिमी भाग में बसा समृद्धशाली राज्य गुजरात अपने त्योहारों और सांस्कृतिक उत्सवों के लिये विश्व प्रसिद्ध है। भाद्रपद्र (अगस्त-सितंबर) मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी, पंचमी और षष्ठी के दिन तरणेतर गांव में भगवान शिव की स्तुति में तरणेतर मेला लगता है।भगवान कृष्ण द्वारा रुक्मणी से विवाह के उपलक्ष्य में चैत्र (मार्च-अप्रैल) के शुक्ल पक्ष की नवमी को पोरबंदर के पास माधवपुर में माधवराय मेला लगता है। उत्तरी गुजरात के बांसकांठा ज़िले में हर वर्ष मां अंबा को समर्पित अंबा जी मेला आयेजित किया जाता हैं।राज्य का सबसे बड़ा वार्षिक मेला द्वारका और डाकोर में भगवान कृष्ण के जन्मदिवस जन्माष्टमी के अवसर पर बड़े हर्षोल्लास से आयोजित होता है। इसके अतिरिक्त गुजरात में मकर संक्राति, नवरात्र, डांगी दरबार, शामला जी मेले तथा भावनाथ मेले का भी आयोजन किया जाता हैं।

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