सात पहाड़ियों का शहर सतारा महाराष्ट्र राज्य का एक ज़िला है। इसके उत्तर में पुणे, दक्षिण में सांगली, पूरब में सोलापुर, और पश्चिम में रत्नागिरी जिले हैं। इसके इर्द - गिर्द सात पहाड़ियाँ हैं, इसलिए इसे सतारा कहा जाता है, वे हैं जरंदेश्वर, यवतेश्वर, जिंक्यात्रा, कित्लिचा डोंगर, सज्जनगढ़, पैदयाचा बैरोबा, और नक्दिचा डोंगर।
इस शहर की स्थापना 16 वीं सदी में हुई थी,उस दौरान यहां के राजा छत्रपति शाहू थे।सतारा पर पहले राष्ट्रकूट राजवंश ने शासन किया। फिर उस पर चालुक्या और मौर्या साम्राज्य का शासन रहा। 17 वी सदी में इस पर मराठा साम्राज्य का शासन रहा। तृतीय एंग्लो - मराठा युद्ध के बाढ़, अंग्रेजो ने सतारा पर कब्ज़ा कर इसे राजा प्रताप सिंह को सोंप दिया। अंत में सतारा बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा बन गया। भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में सतारा शहर की प्रमुख भूमिका रही है।

कैसे आयें
हवाई जहाज द्वारा
सतारा का नजदीकी एयरपोर्ट पुणे है..जोकि यहां से करीबन 100 किमी की दूरी पर स्थित है.। यह एयरपोर्ट शहर के सभी राज्यों से अच्छे से जुड़ा हुआ है।
ट्रेन द्वारा
सतारा का अपना रेलवे स्टेशन है...जोकि देश के सभी शहरों से जुड़ा हुआ है ..पर्यटक यहां से किसी भी राज्य और शहर की ट्रेन ले सकते हैं।
बस द्वारा
सतारा पहुँचने का सबसे अच्छा विकल्प सड़क है...सतारा सभी राजमार्गों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है...मुंबई से सतारा की दूरी करीबन 256 किमी है। PC: Praveen bhosale

आने का उचित समय
यूं तो पर्यटक सतारा घूमने कभी भी आ सकते हैं..लेकिन इसे घूमने का सबसे अच्छा मस्य मानसून और सर्दियों का मौसम है..ऐसे मौसम में धूप भी कम होती है..साथ ही आप छुट्टियों को अच्छे से एन्जॉय भी कर सकते हैं।
PC: Amitrc7th

रूट मैप
सतारा से मुंबई जाने का रूट
रूट नम्बर 1- मुंबई-रसयानी-लोनावला-पुणे-खंडाला-सतारा वाया बेंगलुरु-मुंबई हाइवे 48..अगर आप रूट नम्बर 1 फ़ॉलो करते हैं तो मुंबई से सतारा पहुँचने में 4 घंटे का वक्त लगेगा।
रूट 2- मुंबई-रसयानी-खोपोली-कोलाड-मानगांव-महाबलेश्वर-मेधा-सतारा वाया नेशनल हाइवे 66 ...अगर आप रूट नम्बर 2 फ़ॉलो करते हैं तो मुंबई से सतारा पहुँचने में 6.5घंटे का वक्त लगेगा।

पिंपरी-चिंचवड में शॉर्ट स्टॉप
पुणे के पास स्थित पिंपरी-चिंचवाड़ एशिया के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक माना जाता है। पिंपरी-चिंचवाड़ का अर्थ है इमली और बरगद के पेड़ हैं, ये सिर्फ सरथ ही नहीं बल्कि अप इस जगह काफी तादाद में इमली और बरगद के पेड़ों को देख सकते हैं।PC: Udaykumar PR

पिंपरी-चिंचवाड़
पिंपरी-चिंचवाड़ में आप मोरया गोसावी के दर्शन कर सकते हैं...यह राज्य के आठ गणपति मन्दिरों में से एक है। मंदिर में दर्शन करने के अलावा आप महाराष्ट्रीयन खाने का जायका भी ले सकते हैं। PC: Dave.kaustubh

सतारा
सतारा का इतिहास पर नजर डाली जाये तो..सतारा पर सबसे पहले राष्ट्रकूट राजवंश ने शासन किया। फिर उस पर चालुक्या और मौर्या साम्राज्य का शासन रहा। 17 वी सदी में इस पर मराठा साम्राज्य का शासन रहा। तृतीय एंग्लो - मराठा युद्ध के बाढ़, अंग्रेजो ने सतारा पर कब्ज़ा कर इसे राजा प्रताप सिंह को सोंप दिया। अंत में सतारा बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिसा बन गया। भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में सतारा शहर की प्रमुख भूमिका रही है।PC: Mangeshjadhav

जिंक्यात्रा किला
सतारा में कई सारे किले और मंदिर है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं...प्रमुख आकर्षण जिंक्यात्रा किला का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था..उस दौरान इस किले का नाम अजिमात्र था। यह 3000 फीट की ऊँचाई पर है और समुद्र तल से 1006 मीटर की ऊंचाई पर है। इस किले का निर्माण औरेंग्जेब के शासन में हुआ था...इस किले को यातेश्वर पहाड़ी से भी देखा जा सकता हैं, जो की यहाँ से 5 किलोमीटर की दूरी पर है। इस किले की चोटी से हम पुरे सतारा शहर का नज़ारा देख सकते हैं।PC: wikimedia.org

सज्जनगढ़ किला
सज्जनगढ़ और वासोटा किलो का निर्माण मराठा शैली में किया गया है। इसे पहले अस्वल्यान्गढ़ या अस्वल्गढ़ के नाम से जाना जाता है। यह 10 वी सदी में बनाया गया। यह सतारा से 9 कि.मी. की दूरी पर है। यह 312 मीटर ऊंचा और 1525 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है।रामनवमी के त्यौहार पर इस किले के आस - पास कि जगह को बहुत सुन्दर तरीके से सजाया जाता है।PC: Himanshu Sarpotdar

नटराज मंदिर
यहां स्थित नटराज मंदिर तमिलनाडू स्थित नटराज मंदिर की तरह हुबहू बना हुआ है।इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1981-82 में तमिलनाडू,कर्नाटक,महाराष्ट्र ,आंध्र प्रदेश और केरला सरकार के सहयोग से सम्पन्न हुआ था।

कास पठार
यह सतारा का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। इसे "पलेटो ऑफ फ्लावर्स" के नाम से भी जाना जाता है। इस कि हरियाली मन को मोहित करती है। यह सतारा से 22 कि.मी. दूर है। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल,और भारत के सबसे खूबसूरत फूलों की घाटियों में से एक कास प्लैटू विविध प्रकार के वनस्पतियों के लिए जाना जाता है। यहाँ खिलने वाले जंगली फूल जो अगस्त से सितम्बर के महीनो में खिलते हैं यहाँ के नज़ारे को एक अलग ही अद्भुत दृश्य में बदल देते हैं। कास प्लैटू महाराष्ट्र के उन प्रसिद्द पर्यटक स्थलों में से एक है जिसे जैव विविधता विश्व विरासत स्थल घोषित कर दिया गया है। कास पठार को देखने का सब से अच्छा समय अगस्त से लेकर नवंबर का है।PC:Nilrocks

पटेश्वर
सतारा के दक्षिण पूर्व से 11 किमी की दूरी पर स्थित पटेश्वर एक धार्मिक स्थल है। यहां करीब आठ गुफाएं हैं जिनमे करीबन हजारों शिवलिंग को देखा जा सकता हैं।

थोसघार झरना
यह झरना सतारा से करीब 20 किमी की दूरी पर स्थित है...मानसून के समय इस झरने की प्राकृतिक खूबसूरती बीएस देखते ही बनती है..मानसून के मौसम में इस झरने को देखने काफी संख्या में पर्यटक इस ओर रुख करते हैं।PC: Challiyan

वजराई
सतारा से 27 किमी की दूरी पर स्थित यह झरना 853 फीट की ऊंचाई से गिरता है..यह जगह ट्रेकर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है...
यह सतारा से 35। कि.मी. की दूरी पर है।मानसून में यह झरना पानी से बार रहता है, जो यहाँ के सैलानियों को बहुत आकर्षित करता है।
PC: Vinayakmore
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