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भारत में रहकर इनके चक्कर में नहीं पड़े तो...आपने जीवन में कुछ नहीं किया

Written By: Goldi

घूमना एक ऐसी चीज है जो हर किसी को पसंद होती है..और साथ ही घूमने की कोई उम्र भी नहीं होती है लेकिन कुछ ऐसी जगहें होती हैं जिन्हें हमें बूढ़े होने से पहले घूम लेना चाहिए। घूमना सिर्फ घूमना ही नहीं होता बल्कि नई नई चीजों का जानना समझना भी होता है, साथ ही पूरी दुनिया की यात्रा और तरह तरह के व्यंजन को चखना भी एक अलग तरह का एहसास होता है।
ना आपको समुद्री किनारा पसंद है ना पहाड़
 

अब यदि आप भारत में हैं और आपको घूमने का शौक है तो आज जो हम आपको बताने जा रहे हैं वो आपके ही लिए है।दूसरे शब्दों में कहा जाये तो आज हम आपको बताएंगे उन ट्रेवल एक्टिविटी के बारे में जिनको आपको 35 की उम्र पार करते करते अवश्य ही कर लेना चाहिए। तो आज ही अपने दोस्तों, परिवार, पत्नी को मनाइये और निकल जाइये इन खास चीजों का आनंद लेने के लिए...

ऋषिकेश में राफ्टिंग

ऋषिकेश में राफ्टिंग

शोर मचाती और दहाड़ती नदी के बीचों बीच अकेले नाव चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। अगर आप को इस एडवेंचर भरे खेल का आनंद लेना है तो ऋषिकेश आइये और जगाइए अपने अंदर के एडवेंचर वाले गॉड को। यहां जहां आप एक तरफ पहाड़ों से टकराती नदी को देखेंगे तो वहीँ दूसरी तरफ खूबसूरत नज़ारे भी आप का मन मोह लेंगे।

कैसे पहुंचे ऋषिकेश

कैसे पहुंचे ऋषिकेश

ऋषिकेश का निकटतम हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट है और दिल्ली से भी जुड़ा है।इंडियन एयरलाइंस दिल्ली और देहरादून के बीच छोटे विमान संचालित करती है और दिल्ली सबसे सुविधाजनक हवाई अड्डा है।

रेलमार्ग
रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है , यह हरिद्वार के माध्यम से भारत में प्रमुख शहरों और कस्बों के साथ जुड़ा हुआ है।

सड़कमार्ग
ऋषिकेश देश के सभी बड़े स्थानों के साथ अच्छी तरह से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।PC: wikimedia.org

गोवा में क्वैड बाइकिंग

गोवा में क्वैड बाइकिंग

गोवा में बीच, बीयर, ब्यूटी और नाईट लाइफ के अलावा भी बहुत कुछ है। यदि आप गोवा में हैं तो एक बार क्वैड बाइकिंग का लुत्फ़ अवश्य लीजिये। क्वैड बाइक से गोवा की सैर और रेत भरे बीचों को देखने का अपना एक अलग ही मजा है।

कैसे पहुंचे गोवा

कैसे पहुंचे गोवा

हवाईजहाज से
डाबोलिम हवाई अडडा राज्य की राजधानी पणजी से 29 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह अच्छी तरह से चेन्नई, मुंबई, नई दिल्ली, हैदराबाद, कोचीन और बेंगलुरू से दैनिक उड़ानों से जुड़ा हुआ है।

ट्रेन से
गोवा के दो प्रमुख रेलवे स्टेशन मडगांव और वास्को है , जो अच्छी तरह से देश भर से ट्रेन से जुड़े हुए हैं।करमाली और थिवम कोंकण रेलवे के स्टेशन है, करमाली पणजी में जाने के लिए स्टेशन है और थिवम मापुसा या कलांगुटे जाने के लिए स्टेशन है। भारत के सभी प्रमुख शहरों से गोवा के लिए सीधी ट्रेनें हैं।

सड़क मार्ग से - गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग NH4A, NH17 और NH17A के माध्यम से भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है, राजमार्ग सड़के उत्कृष्ट हालत में हैं और काफी अच्छी गति पर वाहन चलाने लायक है। गोवा से शहरों और पड़ोसी राज्यों में शहरों के लिए ऑपरेटिंग बस सेवाएं हैं।

मनाली

मनाली

मनाली से लेह तक बाइकिंग मनाली से लेह के बेच इस रूट का शुमार दुनिया के सबसे जटिलतम रूटों में है। यदि आप कुछ तूफानी और खास करना चाहते हैं तो एक बार जी हां जीवन में एक बार मनाली से लेह के बीच अपनी बाइक चलाते हुए आइये। इस रूट पर गाडी चला ली तो आपको धरती पर ही स्वर्ग के दीदार हो जाएंगे।

नीलगिरि

नीलगिरि

नीलगिरि पर साइकिलिंग अपनी 24 खूबसूरत पहाड़ियों के कारण आज नीलगिरि प्रकृति से प्रेम करने वालों का स्वर्ग है। यहां आने के लिए ट्रैकिंग को बड़ी कॉमन चीज है आप इस बार कुछ अलग कुछ तूफानी ट्राई करिये आप एक बार साइकिल से इस स्थान की यात्रा करिये।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

निलगिरी का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कोयम्बटूर है जोकि निलगिरी से 99 किमी की दूरी पर है.. यह अच्छी तरह से चेन्नई, मुंबई, नई दिल्ली, हैदराबाद, कोचीन और बेंगलुरू से दैनिक उड़ानों से जुड़ा हुआ है।

ट्रेन द्वारा
निलगिरी का नजदीकी रेलवे स्टेशन ऊटी है, इस स्टेशन देश के सभी भागों से जुड़ा हुआ है।

वाघा बॉर्डर

वाघा बॉर्डर

वाघा बॉर्डर पर सेरिमनी वैसे तो इसे आप कभी भी देख सकते हैं लेकिन हम आपसे इसे 30 साल के अंदर देखने की सलाह इसलिए दे रहे हैं क्योंकि इसको देखने के बाद आपके अंदर का देशप्रेम और मिटटी की मुहब्बत बढ़ जायगी। 1959 से लेके आज तक भारतीय थल सेना द्वारा इस सेरिमनी का आयोजन किया जा रहा है।

कैसे पहुंचे वाघा बॉर्डर

कैसे पहुंचे वाघा बॉर्डर

वाघा बॉर्डर अमृतसर से 31 किमी की दूरी पर स्थित है..अमृतसर से पर्यटक यहां बस या कार और टैक्सी द्वारा पहुंच सकते हैं।

समय- वाघा बोर्डे की सेरेमनी का टाइम शाम 5 हैं..किन हम आपसे इसे 30 से 35 साल के अंदर देखने की सलाह इसलिए दे रहे हैं क्योंकि इसको देखने के बाद आपके अंदर का देशप्रेम और मिटटी की मुहब्बत बढ़ जायगी। 1959 से
लेके आज तक भारतीय थल सेना द्वारा इस सेरिमनी का आयोजन किया जा रहा है।

कूर्ग

कूर्ग

कूर्ग की खूबसूरती अगर आपको कूर्ग की खूबसूरती निहारना है तो कम से कम 3 दिन यहां आपको रहना पड़ेगा। इस जगह का शुमार यहां की खूबसूरती के चलते भारत के कुछ चुनिंदा डेस्टिनेशनों में होता है। आप जब भी यहां आये तो यहां से कॉफ़ी खरीद के अवश्य ले जाएं। जब जब आप इस कॉफ़ी को पियेंगे कूर्ग और वहां की खूबसूरती आपके दिमाग में आ जायगी।

हम्पी के खंडहरों को निहारिये

हम्पी के खंडहरों को निहारिये

यहां आप जहाँ जहां नज़र दौड़ाएंगे आपको मंदिर और इतिहास देखें को मिलेगा। हम्पी में इतिहास के अलावा बहुत कुछ है। ये स्थान मंदिरों और इतिहास के अलावा कविता, कला नक्काशी, वास्तुकला का संगम है। इस स्थान पर ऐसा बहुत कुछ है जिसको आपने पहले कभी नहीं देखा होगा।

कैसे पहुंचे हम्पी

कैसे पहुंचे हम्पी

हम्पी टूरिस्ट्स के बीच एक खासा पॉपुलर है। हम्पी बैंगलोर से करीबन 343 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बैंगलोर से हम्पी जाने के लिए बस से छ घंटे की यात्रा है।

भानगढ़

भानगढ़

खौफ़ से कीजिये मुलाकात भानगढ़ में भानगढ़ किला देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है। तो अगर आपके अंदर खौफ पर विजय पाने का जज्बा को तो यहां अवश्य आइये।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

जयपुर से सरिस्का/ अलवर जाने वाले मुख्य मार्ग से भानगढ किले की दूरी लगभग 3 किमी हटकर है।

बीर में पैराग्लाइडिंग

बीर में पैराग्लाइडिंग

पैराग्लाइडिंग के लिए बीर किसी जन्नत से कम नहीं है।बीर अपनी पैराग्लाइडिंग के लिए ही दुनिया भर में जाना जाता है, कहते हैं पैराग्लाइडिंग के लिए यहां का मौसम आदर्श है । यहाँ लैंडिंग का स्थान बिल्लिंग है जो बीर से 14 किलोमीटर की दूरी पर है। पैराग्लाइडिंग के लिये प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है और इसे कोई नौसिखिया नही कर सकता। बीर में कई निजी टूर संचालक हैं जो पैराग्लाइडिंग के लिये आवश्यक आधारभूत उपकरण
और प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं। तो जीवन में एक बार इसे आप अवश्य ट्राई कीजिये।

दूधसागर फॉल की ट्रैकिंग

दूधसागर फॉल की ट्रैकिंग

दूधसागर तक ट्रैकिंग के लिए शरीर का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। तो अब यदि आप दूधसागर तक की ट्रैकिंग पर जा रहे हों तो आज से व्यायाम शुरू कर दीजिये। ट्रेन से तो दूधसागर सभी जाते हैं, इस बार आप प
थरीले रास्तों पर ट्रेक करते हुए यहां जाइये। हमारा दावा है आप इस यात्रा और उस दौरान मिले एडवेंचर को कभी भूल नहीं पाएंगे

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