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होली 2018: कहीं होती है लट्ठबाजी तो कहीं भांग के नशे में खेली जाती है होली

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रंगों का भव्य त्यौहार होली, भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक हैं, जिसे पूरे भारतवर्ष में बेहद हर्सौल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत में होली के त्यौहार को बसंत के शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। होली का पर्व लोगों में उत्साह के साथ मेलजोल का भाव बढ़ाता है, इस दिन लोग सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाकर एक दूसरे को गले लगाकर गुलाल और रंग लगाते हैं।

होली का त्यौहार, हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक फाल्गुन महीने और अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक फरवरी और मार्च में  पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। होली का पर्व भारत के उत्तर भारत समेत अन्य क्षेत्रों में बेहद ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। भारत की विविध संस्कृति को देखते हुए होली का पर्व पूरे देश विभिन्न विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है।

होली सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी लोकप्रिय त्यौहार है, इस पर्व को अमेरिका, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और मॉरीशस में विदेशी इस त्यौहार को बेहद ही उल्लास के साथ मनाते हैं। इतना ही नहीं होली के दौरान कई विश्वव्यापी यात्री/पर्यटक भारत की सैर करने का भी प्लान करते हैं, ताकि वह होली और भारत की विविध संस्कृती को देख सकें।

साल 2018 में होली 1 और 2 मार्च को मनायी जाएगी। ऐसे में आज हम आपको अपने लेख के जरिये भारत की बेहद खास पांच जगहों के बारे मे बताने जा रहे हैं, जहां होली को बेहद ही उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

बरसाना

बरसाना

जब भी भारत में होली के लोकप्रिय स्थानों की बात होती है, तो उसमे सबसे पहला नाम आता है बरसाने का, क्योंकि यहां की सिर्फ होली ही नहीं बल्कि लट्ठमार होली काफी प्रसिद्ध है। इस होली को पारंपरिक लट्ठ या छड़ी से खेला जाता है, लाठमार होली राधा और कृष्ण की किंवदंतियों के साथ जुड़ा हुई है। पौराणिक कथायों के मुताबिक, जब भगवान कृष्ण नंदगांव से बरसाना राधा से मिलने जाते थे, जहां वह राधा की गोपियां और अन्य ग्वाले को तंग किया करते थे, कृष्ण की नटखटता से तंग आकर गोपी और ग्वाले कृष्ण को डंडा और लट्ठ मारते थे।

लट्ठमार होली नंदगांव और बरसाने में होली से एक हफ्ते पहले मनायी जाती है । साल 2018 में 24 फरवरी को लट्ठमार होली का आयोजन किया जाएगा। इस लट्ठ मार होली को एन्जॉय करने से पहले खुद को सावधान रखें!Pc:Narender9

मथुरा-वृन्दावन

मथुरा-वृन्दावन

अगर आप एक पारम्परिक होली का जश्न देखना चाहते हैं, तो जुड़वां शहर मथुरा-वृन्दावन की सैर करें। मथुरा-वृन्दावन को मुख्यत: मन्दिरों का शहर कहा जाता है, जहां भगवान कृष्ण का जन्म और लालन-पालन हुआ था। इन दोनों जुड़वां शहर में होली के पर्व को बेहद ही उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

यदि आप होली के आसपास मथुरा और वृंदावन की यात्रा करते हैं, तो यहां आप माखनचोर/मक्खन चोर कृष्ण के सम्मान में विशेष पूजा और अनुष्ठानों का आयोजन का हिस्सा बन सकते हैं।Pc:J.S. Jaimohan

एक दिन में घूमे मथुरा-वृन्दावन

शांतिनिकेतन

शांतिनिकेतन

पश्चिम बंगाल के बोलपुर के पास शांतिनिकेतन में बसंत उत्सब/वसंत उत्सव की शुरुआत प्रसिद्ध भारतीय कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। हालांकि, अब यह त्यौहार बंगाली संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन चुका है। बसंत उत्सब के दौरान इस शांत तटीय शहर की यात्रा करने का सबसे बेस्ट समय है, इस दौरान ना सिर्फ आप यहां होली को अच्छे से एन्जॉय कर सकते हैं, बल्कि आप बंगाली परम्परा और रीती-रिवाजों को भी जान समझ सकते हैं।

रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित किया गया रवींद्रनाथ टैगोर के विश्वभारती विश्वविद्यालय के छात्र रंगीन कपड़े पहनकर इस दौरान गायन और नृत्य सहित शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पेशकश करते हैं।Pc:Partho72

मुंबई

मुंबई

जब बात होली के जश्न की हो तो इसमें मुंबई कैसे पीछे रह सकता है, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में सभी त्यौहार अपनी जीवंतता और उत्साह से मनाये जाते है। होली के दौरान मुंबई अपने ही रंग में रंगी हुई होती हैं। शहर भर में कई होली इवेंट्स और रंगीन पार्टियों का आयोजन किया जाता, जहां ना केवल धमाकेदार होली पार्टीज होती है, बल्कि यहां डीजे, खाना, रेन डांस ,फन गेम्स आदि भी शामिल होते हैं।

तो आप होली 2018 बैश के लिए कहाँ जाएंगे?
pc:Steven Gerner

कहीं गुलाल में रंगे विदेशी तो कहीं लाठियां खाते पुरुष, भारत में कुछ यूं खेली गयी होली

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