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शूरवीरों का शहर- चित्तौड़गढ़

अगर आपको इतिहास से प्यार है और उसके बारे में जानने को उत्सुक है तो चित्तौड़गढ़ आपके लिए एकदम बेस्ट प्लेस है...

By Goldi

राजस्थान भारत का एक ऐसा राज्य है,जिसे देखने के लिए लोग दूर विदेशों से खींचे चले आते हैं।अब तक हमने आपको राजस्थान के कई शहरों के बारे में अवगत कराया इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहे हैं राजस्थान के शूरवीर शहर के नाम से चर्चित चित्तौड़गढ़ के बारे में।

चित्तौड़गढ़ की नींव मौर्य ने 7 वीं शताब्दी के दौरान रखी गयी थी। जो लगभग 700 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और अपने शानदार किलों, मंदिरों, दुर्ग और महलों के लिए जाना जाता है। लोककथाओं के मुताबिक,एक लोककथा के अनुसार हिंदू महाकाव्य के एक महत्वपूर्ण चरित्र और पांडवों में से एक, भीम ने एक साधु से अमरत्व का रहस्य जानने के लिए इस स्थान की यात्रा की थी। हालांकि वह अपनी अधीरता के कारण अपने प्रयास में सफल नहीं हो सका। उसने कुंठा और क्रोध में जमीन पर पैर पटका जिसके कारण इस स्थान पर एक जलाशय बना जो भीम लात के नाम से जाना जाता है।

आइये जानते हैं चित्तोड़गढ़ में घूमने की जगहों के बारें में

चित्तौड़गढ़ किला

चित्तौड़गढ़ किला

चित्तौरगढ़ किले को भारत का सबसे बड़ा किला माना जाता है। यह लंबाई में लगभग 3 किलोमीटर है व परिधि में लगभग 13 किलोमीटर लंबा, कुछ लगभग 700 एकड़ की ज़मीन में फैला हुआ है यह किला।
किले तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं है आपको किले तक पहुँचने के लिए एक खड़े और घुमावदार मार्ग से एक मील चलना होगा। इस किले में सात नुकीले लोहे के दरवाज़े हैं जिनके नाम हिंदू देवताओं के नाम पर पड़े। इस किले में कई सुंदर मंदिरों के साथ साथ रानी पद्मिनी और महाराणा कुम्भ के शानदार महल हैं।किले में कई जल निकाय हैं जिन्हें वर्षा या प्राकृतिक जलग्रहों से पानी मिलता रहता है। किले के अंदर ही कई महल व अन्य रचनाएँ स्थापित हैं। इन अद्भुत रचनाओं में शामिल हैं, रानी पद्मिनी महल,राणा कुंभ महल और फ़तेह प्रकाश महल।
PC: wikicommon

कीर्ति स्तंभ, चित्तौड़गढ़

कीर्ति स्तंभ, चित्तौड़गढ़

कीर्ति स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1448 ई. में करवाया था। यह स्तम्भ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ क़िले में स्थित है। इस शानदार स्तम्भ को 'विजय स्तम्भ' के रूप में भी जाना जाता है। महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूदशाह ख़िलजी को युद्ध में प्रथम बार परास्त कर उसकी यादगार में इष्टदेव विष्णु के निमित्त यह कीर्ति स्तम्भ बनवाया था। इस स्तम्भ के ऊपर जाने के लिए 54 सीढियाँ हैं, लेकिन वर्तमान में पर्यटक इसे केवल बाहर से देख सकते हैं।PC: flickr.com

नगरी

नगरी

मौर्य राजवंश का प्रमुख शहर था नगरी चित्तौड़गढ़ से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह बरीच नदी के किनारे स्थित है।पहले इस शहर को "माध्यमिका" के नाम से जाना जाता था और मौर्य काल से गुप्त काल तक इसने बहुत उन्नति की। इन वर्षों में खुदाई में इस स्थान के बारे में कई रोचक तथ्यों का पता चला जैसे हिंदू और बौद्ध संस्कृति से इसका संबंध। खुदाई के दौरान इस ऐतिहासिक स्थल से टेराकोटा टाईल्स से सजा हुआ एक स्तूप मिला।PC: wikimedia.org

कालिका माता मंदिर

कालिका माता मंदिर

कालिका माता मंदिर का निर्माण आठवीं सदी में सिसोदिया राजवंश के राजा बप्पारावल द्वारा सम्पन्न हुआ था। हालांकि चौदहवी शताब्दी में महाराणा हमीर सिंह ने मंदिर में कलिका माता की मूर्ति को स्थापित किया, तब से यह कलिका माता के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।देवी कलिका वीरता एवं शक्ति का प्रतीक हैं व इन्हें चित्तौड़गढ़ की रक्षक माना जाता है। कलिका माता मंदिर कई शानदार नक्काशीदार चित्र व मूर्तियों से सजा स्थापत्य कला का एक सुंदर नमूना है। वार्षिक उत्सव कालिका माता का आशीर्वाद लेने आए भक्तों की एक बड़ी संख्या को आकर्षित करता है।PC: wikimedia.org

गोमुखकुंड

गोमुखकुंड

गोमुखकुंड, प्रसिद्द चितौड़गढ़ किले के पश्चिमी भाग में स्थित एक पवित्र जलाशय है। गोमुख का वास्तविक अर्थ ‘गाय का मुख' होता है। पानी, चट्टानों की दरारों के बीच से बहता है व एक अवधि के पश्चात् जलाशय में गिरता है।यात्रियों को जलाशय की मछलियों को खिलाने की अनुमति है। इस जलाशय के पास स्थित रानी बिंदर सुरंग भी एक विख्यात आकर्षण है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, यह सुरंग एक भूमिगत कक्ष की ओर जाती है, जहांचित्तौड़गढ़ की रानी पद्मिनी ने 'जौहर' किया था।
PC: wikicommon

 पद्मिनी का महल

पद्मिनी का महल

पद्मिनी महल सुंदर और बहादुर रानी पद्मिनी का घर था। यह महल चित्तौड़गढ़ किले में स्थित है और रानी पद्मिनी के साहस और शान की कहानी बताता है। महल के पास सुंदर कमल का एक तालाब है।
ऐसा विश्वास है कि यही वह स्थान है जहाँ सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी के प्रतिबिम्ब की एक झलक देखी थी। रानी के शाश्वत सौंदर्य से सुलतान अभिभूत हो गया और उसकी रानी को पाने की इच्छा के कारण अंततः युद्ध हुआ। इस महल की वास्तुकला अदभुत है और यहाँ का सचित्र वातावरण यहाँ का आकर्षण बढाता है। पास ही भगवान शिव को समर्पित नीलकंठ महादेव मंदिर है।PC: flickr.com

चित्तौड़गढ़ संग्रहालय

चित्तौड़गढ़ संग्रहालय

चित्तौड़गढ़ संग्रहालय को फतेह प्रकाश पैलेस संग्रहालय के नाम से जाना जाता है और यह चित्तौड़गढ़ में जरुर देखे जाने वाली एक जगह है। चित्तौड़गढ़ के फतेह प्रकाश पैलेस संग्रहालय में कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कलाकृतियां रखी हुईं हैं।PC: flickr.com

कुंभा श्याम मंदिर, चित्तौड़गढ़

कुंभा श्याम मंदिर, चित्तौड़गढ़

कुंभा श्याम मंदिर भगवान विष्णू को समर्पित है, जो यहाँ वराह अवतार में पूजे जाते हैं (उनका शुकर अवतार)। इस मंदिर का निर्माण महाराणा संग्राम ने अपनी पुत्रवधू मीरा की विशेष विनती पर किया था। यह चित्तौड़गढ़ किले में स्थित कुंभा मंदिर के निकट स्थित है।PC: flickr.com

मीराबाई मंदिर

मीराबाई मंदिर

मीराबाई मंदिर चित्तौड़गढ़ की सबसे धार्मिक जगहों में से एक है। राजपूत राजा महाराणा कुंभा के शासन में इस मंदिर का निर्माण हुआ था। भक्ति पंथ आंदोलन की प्रमुख प्रतिभागी मीराबाई को यह मंदिर समर्पित है।
PC: wikimapia.org

मेनल

मेनल

मेनल, चित्तौड़गढ़ से 90 किमी की दूरी पर चितौड़गढ़- बूंदी मार्ग पर स्थित एक छोटा शहर है। इस जगह के सुन्दर परिदृश्य और प्राचीन मंदिर खजुराहो जैसे लगते हैं; इसलिए यह जगह छोटा खजुराहो के नाम से भी जानी जाती है।इस जगह पर पहले से ही बहुत से प्राचीन बौद्ध मंदिर हैं, और खुदाई से अन्य धार्मिक स्थलों का अनावरण जारी है। मंदिरों के अलावा इस जगह पर सुंदर जल प्रपात, घने जंगल भी हैं जिसके कारण यह एक प्रसिद्द पिकनिक स्थल है।PC: flickr.com

सीतामाता वन्यजीवन अभ्यारण्य

सीतामाता वन्यजीवन अभ्यारण्य

सीतामाता वन्यजीवन अभ्यारण्य अरावली के पहाड़ों और मालवा के पठार पर फैला हुआ है। यह अभ्यारण्य घने पर्णपाती वनों से से घिरा हुआ है, जो केवल एक अकेला ऐसा वन है जहाँ इतनी बड़ी संख्या में सागौन के वृक्ष हैं।इसके अल्वा यहाँ बाँस, साल, आँवला और बेल के वृक्ष भी है, लगभग आधे से अधिक वृक्ष सागौन के हैं। इस अभ्यारण्य से होकर जाखम और करमोई नदियाँ बहती हैं। इस अभ्यारण्य में जानवर जैसे तेंदुआ, हाइना, सियार, जंगली बिल्ली, साही, चित्तीदार हिरण, भालू और चार सींगों वाला मृग देखें जा सकते हैं। उड़ने वाली गिलहरी जो एक रोचक निशाचर प्राणी है, उसे आप यहाँ रात में वृक्षों के बीच उड़ता हुआ देख सकते हैं। इस स्थान का पौराणिक महत्व भी है इस स्थान का पौराणिक महत्व भी है क्योंकि ऐसा माना जाता है की भगवान राम की पत्नी सीता अपने निर्वासन के दौरान यहाँ ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में रही थी।

PC: wikimedia.org

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

हवाईजहाज
चित्तौड़गढ़ का निकटतम हवाई अड्डा डबोक हवाई अड्डा है जिसे महाराणा प्रताप हवाई अड्डे के नाम से भी जाना जाता है, जो 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा सभी प्रमुख भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

रेलवे स्टेशन
चित्तौड़गढ़ का रेलवे स्टेशन महत्वपूर्ण शहरों जैसे अजमेर, जयपुर, उदयपुर, कोटा और नई दिल्ली से जुड़ा हुआ है।

सड़क
इस शहर तक रास्ते द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है और राज्य परिवहन और निजी बस दोनों प्रकार की सेवा यहाँ उपलब्ध है। चित्तोड़गढ़ की निम्नलिखित शहरों से दूरी
दिल्ली-578 किमी
जयपुर-309 किमी
उदयपुर-117 किमी
जोधपुर- 320 किमी
अहमदाबाद - 375 किमी
आगरा-543 किमी
PC: wikimedia.org

कब आयें

कब आयें

गर्मियों में इस स्थान का मौसम बहुत गर्म होता है और इस दौरान अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक जाता है। मानसून के दौरान रुक रुक कर होने वाली वर्षा के कारण हवा नम होती है। इस स्थान की यात्रा के लिए ठंड का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि तापमान 11 डिग्री सेल्सियस और 28 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है।

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